कांग्रेस के प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के सबसे बड़ा राज का खुलासा


UMENDRA SINGH 20/05/2018 11:48 AM
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New Delhi. कांग्रेस के राजीव गांधी को भारत के सबसे सफल प्रधानमंत्रियों में से एक गिना जाता है। वो इंदिरा गांधी के बड़े बेटे थे लेकिन स्वभाव से एकदम शांत थे। देश में कम्प्यूटर क्रांति का जनक उनको ही माना जाता है। श्रीपेरंबदूर में 21 मई 1991 को राजीव गांधी को बम से उड़ाकर मार डाला गया था। सबसे बड़ा सवाल है कि शांत स्वभाव वाले राजीव गांधी की किससे क्या दुश्मनी थी जो उनकी हत्या कर दी गई। आइए हम बताते हैं।

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rajeev gandhi murder news

   श्रीलंका से किया वो शांति समझौता बन गया जानलेवा

राजीव गांधी अपनी मां इंदिरा गांधी की मौत के बाद प्रधानमंत्री बने थे। 1984 में ऐतिहासिक मतों से राजीव को पीएम चुना गया था। इसके तीन साल बाद यानि 1987 में उन्होंने श्रीलंका से एक समझौता किया। यह समझौता एक शांति समझौता था। श्रीलंका के राष्ट्रपति जे आर जयवर्धने से राजीव गांधी ने यह जानलेवा समझौता किया था जिसकी कीमत उनको अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

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   आखिर था क्या समझौते में जिसने ले ली उनकी जान

श्रीलंका के राष्ट्रपति से राजीव गांधी ने जो समझौता किया था उसमें एक खास बात थी। उन दिनों श्रीलंका में लिट्टे प्रमुख प्रभारकरन और दूसरे तमिल विद्रोहियों का आतंक था। प्रभाकरन तो श्रीलंका में अपनी पूरी सरकार चलाता था। राजीव ने जो समझौता किया था उसके तहत राजीव को इंडियन पीस कीपिंग फोर्स को श्रीलंका भेजना था जिसका मकसद तमिल विद्रोहियों और लिट्टे को हथियार डालने पर मजबूर करना था।

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   श्रीलंका की मदद करके हो गये दु्श्मन नंबर वन

लिट्टे प्रमुख प्रभाकरन जो अपनी समानान्तर सरकार चला रहा था। जिसके साथ हजारों तमिल विद्रोही लड़ाके भी थे। उसने इस समझौते के बाद राजीव गांधी को अपना दुश्मन नंबर वन मान लिय़ा था। प्रभाकरन के पास ऐसे-ऐसे आधुनिक हथियार, लड़ाके और फिदायीन हमलावर थे जो उसके एक इशारे पर मरने मारने को उतारू थे। इसी के बाद उसने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रची।

   मालदीव में तमिल संगठन पर कार्रवाई ने बढ़ा दी थी नफरत

इसके साथ ही एक घटना और हुई जिसने राजीव के खिलाफ तमिलों की नफरत को और बढ़ा दिया। घटना 1988 की है। एक तमिल संगठन प्लोट मालदीव में सरकार का तख्ता पलट करना चाहता था। उसकी कोशिश को एन वक्त पर राजीव गांधी ने भारतीय सेना भेजकर नाकाम करवा दिया था। इसके बाद तो तमिलों में राजीव गांधी के प्रति नफरत की आग भड़क उठी।

   सुरक्षा कम हुई तो रची हत्या की साजिश और मार डाला

राजीव गांधी 1984 से 1989 तक पीएम रहे। तब तक उनकी सुरक्षा काफी मजबूत थी। तब तक लिट्टे शांत बैठा रहा। इसके बाद जब वो पीएम पद से हटे तो उनकी सुरक्षा भी कम हो गई। यहीं पर मौका मिला लिट्टे को। 21 मई 1991 को मद्रास से 40 किमी दूर श्री पेंरबदूर में लिट्टे ने अपनी आत्मघाती हमलावर को बम से लैस करके भेजा और जैसे ही वो राजीव के करीब पहुंची, बम फट गया जिसमें राजीव के चीथड़े उड़ गये।

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