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अविश्वास प्रस्ताव : अटल जैसा न हो जाए मोदी सरकार का हाल, 26 में से 2 बार ही मिली सफलता 


GAURAV SHUKLA 20/07/2018 10:12:22
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Lucknow. केन्द्र की मोदी सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव के बाद चर्चाओं का दौर गर्म है। इसी के साथ चार साल में पहली बार आए इस अविश्वास प्रस्ताव को लेकर वोटिंग जारी है। हालांकि सत्ता पक्ष अपने पास बहुमत के आंकड़े से ज्यादा नंबर होने के चलते प्रस्ताव की असफलता को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। मोदी सरकार के 4 साल के कार्यकाल में यह पहला अविश्वास प्रस्ताव है लेकिन इससे पहले संसद के इतिहास में अब तक तकरीबन 26 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। हालांकि इसमें दो बार ही सफलता मिल सकी है। 

NoConfidenceMotion in Parliament
संसद में पहली बार 1963 में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। यह प्रस्ताव जेबी कृपलानी ने रखा थे। वहीं दोबारा कांग्रेस के अध्यक्ष न बनाए जाने से कृपलानी ने पार्टी छोड़ किसान मजदूर प्रजा पार्टी की शुरुआत की थी। जो बाद में सोशलिस्ट पार्टी के सात मिलकर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में बदल गयी थी। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सांसद जेबी कृपलानी द्वारा नेहरू के खिलाफ लाए गये अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में कुल 62 वोट पड़े थे, जबकि विरोध में 347 वोट पड़े थे। जिसके बाद यह अविश्वास प्रस्ताव औंधे मुंह गिर गया था। 

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इसके बाद नेहरू के निधन पर लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री बने और उनके तीन साल के कार्यकाल में कुल तीन बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। लेकिन उन्हें एक बार भी सफलता हासिल नहीं हो सकी। इसके बाद सत्ता की कमान इंदिरा को मिली। इसके बाद सत्ता की कमान इंदिरा को मिली। इंदिरा ने भी शास्त्री के बचे हुए कार्यकाल को पूरा किया। लेकिन उन्हें भी दो बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा। भारतीय संसद के इतिहास में अगर किसी को सबसे ज्यादा अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा तो वह इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। जिसमें विपक्ष की ओर से कुल 16 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। लेकिन एक बार भी विपक्ष को कामयाबी हासिल न हो सकी। जहां इंदिरा के कार्यकाल में सबसे ज्यादा अविश्वास प्रस्ताव आने का रिकॉर्ड दर्ज है वहीं विपक्ष की ओर से सबसे ज्यादा अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का रिकॉर्ड मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद ज्योति बसु के नाम पर दर्ज है। उन्होंने अपने चारों प्रस्ताव इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ रखें। 

NoConfidenceMotion in Parliament

जब अविश्वास प्रस्ताव के बाद गिरी सरकार 

भारतीय संसद के इतिहास में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव को 1978 में सफलता मिली। आपातकाल के बाद हुए चुनाव में जनता पार्टी को बहुमत मिला और मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। इसके बाद मोरारजी देसाई सरकार के कार्यकाल में दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। पहले प्रस्ताव में तो कोई परेशानी नहीं हुई। लेकिन 1978 में दोबारा अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद सरकार के घटक दलों में मतभेद के चलते हार का अंदाजा लगाते हुए मत विभाजन से पहले ही मोरारजी देसाई ने इस्तीफा दे दिया। 

NoConfidenceMotion in Parliament


अविश्वास प्रस्ताव से गिरी अटल सरकार 

एनडीए सरकार के कार्यकाल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने विपक्ष में रहते हुए दो बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किये। इसके बाद प्रधानमंत्री बनने उन्हें भी दो बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा। हालांकि पहली बार अटल सरकार को बचाने में सफल न हो सके। इसके विपरीत दूसरी बार उन्होंने विपक्ष को मात दे दी। 

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1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को जयललिता की पार्टी से समर्थन वापस लेने के बाद अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा। उस दौरान वाजपेयी सरकार एक वोट के अंतर से हार गयी। मत विभाजन से पहले ही मोरारजी देसाई ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 2003 में आए अविश्वास प्रस्ताव एनडीए ने आराम से विपक्ष को हरा दिया। एनडीए को 312 वोट मिले जबकि विपक्ष 186 वोटों पर ही सिमट गया। 

Web Title: NoConfidenceMotion in Parliament ( Hindi News From Newstimes)


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