हर साल Raksha Bandhan त्योहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha of Shravan month) की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यानी इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 3 अगस्त को मनाया जाएगा।
Raksha Bandhan पर भूलकर भी न करें ये गलती, इस शुभमुहूर्त पर ही बांधे राखी

Lucknow. रक्षाबंधन के त्योहार को भाई-बहन के बीच प्यार और विश्वास का प्रतीक जाता है। इस त्योहार का इंतजार सभी भाई-बहनों को बेसब्री से रहता है। इस दिन भाई जहां कहीं भी हो, वे अपनी बहन से मिलने और उनसे राखी बंधवाने उनके पास पहुंच ही जाते हैं। हर साल यह त्योहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha of Shravan month) की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यानी इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 3 अगस्त को मनाया जाएगा।

राखी बांधने का शुभमुहूर्त

हर साल मनाए जाने वाले रक्षाबंधन के त्योहार दिन बहने भाइयों की कलाइयों पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधती हैं और भाई इसके बदले बहनों की रक्षा का वचन देते हैं। वहीं, रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के समय भद्राकाल और राहुकाल (Bhadrakala and Rahukaal) का विशेष ध्यान रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भद्राकाल में राखी बांधना शुभ नहीं होता है। मान्यता यह है कि भद्राकाल में किसी भी तरह के शुभ काम करने से उसमें सफलता नहीं मिलती है।

रक्षाबंधन की कथा

मान्यताओं (beliefs) के अनुसार भद्राकाल में राखी न बंधवाने के पीछे एक कथा प्रचलित (legend prevalent) है। जिसके अनुसार लंका के राजा रावण (King of Lanka Ravana)  ने अपनी बहन से भद्रा के समय राखी बंधवाई थी, जिसके कारण ही उसका सर्वनाश हुआ था। इसी मान्यता के आधार पर जब भी भद्राकाल लगा रहता है तो उस समय बहने अपने भाइयों के कलाई पर राखी नहीं बांधती हैं। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि भद्राकाल में भगवान शिव (Lord Shiva in Bhadrakala) तांडव करते हैं इस कारण इस समय में कोई  शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार, भद्रा शनिदेव की बहन (sister of Bhadra Shani Dev) है। भद्रा भी शनिदेव की तरह उग्र स्वभाव (fiery nature) की है। भद्रा को ब्रह्माजी ने शाप (Brahma cursed Bhadra) दिया कि जो भी भद्राकाल में किसी भी तरह कोई भी शुभ कार्य करेगा उसमें उसे सफलता नहीं मिलेगी।

इस साल का सुबह मुहूर्त

ज्योतिषों ( Astrologers) के अनुसार, इस साल 3 अगस्त सोमवार को सोम का ही नक्षत्र (the constellation of Mon) होने से रक्षाबंधन का मुहूर्त बहुत ही शुभ है। सुबह 7 बजकर 18 मिनट पर सूर्य का नक्षत्र उत्तराषाढ़ (the constellation Uttarashah) समाप्त हो रहा है जिसके बाद से चन्द्र का नक्षत्र श्रवण (the constellation of Chandra Shravan) आरंभ होगा। इस बात रक्षाबंधन पर भद्राकाल ज्यादा देर तक नहीं रहेगा। सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक ही भद्रा रहेगा। उसके बाद से पूरा दिन राखी बांधी जा सकती है।