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दक्षिण भारत में मची पोंगल की धूम


HARSHIT MISHRA 14/01/2018 12:18 PM
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दक्षिण भारत में मनाए जाने वाले पोंगल त्योहार पर फसलों की कटाई के दौरान जल्लीकट्टू का आयोजन किया जाता है। पोंगल पर्व की पशुधन पूजा बिल्कुल गोवर्धन पूजन की तरह है। नगर के छोटे-छोटे गांवों में यह पर्व पूरे धूमधाम के साथ जोर-शोर से मनाया जाता है। पोंगल पर्व की पशुधन पूजा में चावल, दूध, घी, शकर से भोजन तैयार कर सूर्यदेव को भोग लगाते हैं।

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पोंगल में सूर्य को त्योहार का प्रमुख देवता माना जाता है, तो वहीं तमिल साहित्य में भी सूर्य का यशोगान उपलब्ध रहा है। पोंगल में पशुधन व घर के हर जानवर को स्नान कराया जाता है। बैलों और गौमाता के सींग रंगे जाते है। उन्हें स्वादिष्ट भोजन पकाकर खिलाया जाता है। सांडों-बैलों के साथ भाग-दौड़ कर उन्हें नियंत्रित करने का जश्न भी होता है। यह खतरनाक खेल है और बहादुरी की मांग करता है।

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हालाकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट इस खेल पर रोक भी लगा चुका है और तमिलनाडु सरकार को नोटिस भी जारी किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल राज्य सरकार से नाराजगी जताते हुए कहा था कि आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया? साथ ही कानून व्यवस्था ठीक न रख पाने पर फटकार भी लगाई। पिछले साल फरवरी में हुए जल्लीकट्टू में 900 से ज्यादा सांडो और 1200 से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।

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वर्षों पूर्व पोंगल कन्याओं द्वारा बहादुरी दिखाने वाले युवकों से विवाह करने का पर्व भी हुआ करता था। आज के आधुनिक बदलते परिवेश में पोंगल खेत और खलिहान के बजाए ड्राइंग रूम में टीवी के पर्दे पर सिकुड़ता जा रहा है। पारंपारिक रूप से सम्पन्नता को समर्पित यह त्योहार मानव जीवन में समृद्धि लाने के लिए मनाया जाता है।

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Web Title: Pongal Dhoom in South India ( Hindi News From Newstimes)


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