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ओशो की पुण्यतिथि: कुंडली देख ज्योतिषी ने कहा था, सात साल तक जी गया तो बुद्ध बन जाएगा


UMENDRA SINGH 19/01/2018 12:36 PM
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Lucknow. आचार्य रजनीश यानि ओशो जो अपने अनुयायियों के लिए धरती पर रहते ही भगवान हो गए। ओशो जिनकी कुंडली देखते ही वाराणसी के ज्योतिषियों ने कह दिया था कि यह बालक 7 साल से ज्यादा जिंदा नहीं रहेगा। हां अगर जिंदा रहा तो धरती पर दूसरा बुद्ध हो जाएगा। ओशो जिंदा भी रहे और उनके चाहने वालों के लिए भगवान बुद्ध सरीखे ही हो गए। 

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आज ओशो की पुण्यतिथि है। उन्होंने 19 जनवरी 1990 को पुणे में अपनी अंतिम सांसें ली थीं। ओशो का चिंतन हमेशा से भौतिकतावादी लगा लेकिन असल में वह था अध्यात्म का ही एक रूप। उनके विचार थे खुद में लीन रहना। आचार्य रजनीश ने अपना पहला शिविर 1964 में राजस्थान के कनकपुर में लगाया था।

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लैटिन भाषा का शब्द है ओशो

उनका नाम तो रजनीश था लेकिन वह ओशो के नाम से प्रसिद्ध थे। यह लैटिन भाषा के शब्द है जिसका अर्थ है समुद्र में विलीन हो जाना। अपने नाम की ही तरह ओशो विचारों के सागर में विलीन रहते थे। 

बातचीत शब्द नहीं था पसंद

ओशो से जब भी कोई बातचीत शब्द कहता था तो वह नाराज हो जाते थे। वह इसको संवाद कहते थे। वहीं ओशो का कहना था कि वर्तमान में जीना चाहिए। तभी आप जीवन का आनंद ले सकते हैं।

जब पिता भी पैर पकड़कर रोए थे

ओशो तो संन्यासी बन गए थे लेकिन शायद कम ही लोग जानते होंगे कि उनके पिता ने भी संन्यास ले लिया था। इससे भी बड़ी बात यह है कि उनके पिता ने अपने बेटे ओशो से ही संन्यास लिया था। इतना ही नहीं वह संन्यास लेते समय ओशो के पैर पकड़कर बहुत रोए भी थे। 

कैसे हुई मौत, आज भी है रहस्य

ओशो की मुत्यु पुणे के आश्रम में हुई थी। लेकिन उनकी मौत पर विवाद ही चला आ रहा है। ओशो के कुछ शिष्यों का मानना है कि उनकी मौत प्राकृतिक नहीं थी, तो वहीं कुछ इस दावे को झूठा बताते हैं। 

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