मुख्य समाचार
पाकिस्तानी बल्लेबाज आसिफ अली की बेटी की मौत, कैंसर का थी शिकार राज्यपाल ने ‘मधु अभिलाषा’ और ‘हिंद स्वराज्य का पुनर्पाठ’ पुस्तकों का किया विमोचन कांग्रेस अंतिम चरण की सात से ज्यादा लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करेगी: प्रवक्ता पाकिस्तान की दो बेटियों ने काशी में किया मतदान, बोलीं बेहतरीन है हिंदुस्तान IPL को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, मुंबई पुलिस ने IPL में मुहैया कराई सुरक्षा, नहीं मिला पैसा सीआईएसएफ ने दो सूडान मूल के नागरिकों से बरामद की लाखों की विदेशी करेंसी प्रेम नारायण मेहरोत्रा के 'भजन संग्रह' का विमोचन लड़कियों के लिए सुनहरा मौका, बालों से होगी कमाई, करना होगा ये काम राजधानी में टेंट कारोबारी की राह चलते गोली मारकर हत्या से मची सनसनी वोटर लिस्ट में तेजस्वी की जगह इस शख्स की तस्वीर, मचा हड़कंप आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर वॉल्वो बस पलटी, पांच की मौत, दो दर्जन घायल चुनाव आयोग पीएम मोदी के इशारे पर कर रहा पक्षपातपूर्ण बर्ताव : कांग्रेस आयोग में आंतरिक घमासान के निपटारे के लिए सीईसी ने मंगलवार को बुलाई बैठक मायावती ने कहा- क्या वाराणसी 1977 के रायबरेली को दोहराएगा कान फिल्म फेस्टिवल 2019 में जलवा बिखेरकर लौटीं दीपिका पादुकोण, एयरपोर्ट पर वायरल हुईं तस्वीरें समीक्षा अधिकारी पर्चा लीक मामले में सीबीसीआईडी ने कोर्ट को भेजी अंतिम रिपोर्ट भाजपा ने चुनाव आयोग से की मायावती-अखिलेश की शिकायत  दो अलग अलग घटनाओं में जहरीला पदार्थ खाने से युवती और किशोरी की मौत
 

...तो क्या योगी राज में भी चलेगा सूचना आयोग का खेल, आयुक्त पर गंभीर आरोप


SHUBHENDU SHUKLA 22/01/2018 19:14:37
548 Views

22-01-2018200938Seriousallega1

Lucknow. यूपी को उत्तम प्रदेश बनाने के भरोसे पर भले ही आम जनता ने बीजेपी को सत्ता सौंप दी है। लेकिन गुंडों और दबंगों की तो दूर सरकारी विभागों में ही अधिकारियों की गुंडई देखने को मिल रही है। जब विभागीय अधिकारी ही इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं तो अपराधों पर रोक लगाने का दावा कहां तक सच होगा इसका अनुमान लगाया जा सकता है।

यह भी पढ़ें...सांख्यिकी कार्यालय में भी टेंडर का खेल, एडिश्नल डायरेक्टर ने कहा-जो करना है कर लो...

दरअसल उप्र सूचना आयोग के सूचना आयुक्त अरविंद सिंह विष्ट पर पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि वह पुलिस से मिलीभगत कर आरटीआई डालने वालों के खिलाफ फर्जी मुकदमा लिखवाने के खिलाड़ी बन चुके हैं। जब कोई व्यक्ति आरटीआई के तहत सूचना मांगता है तो बिना सुनवाई किए ही मामले का निस्तारण कर देते हैं। यदि कोई उपर शिकायत करता है तो पुलिस से मिलीभगत कर उसके खिलाफ षड्यंत्र रचकर केस दर्ज करा देते हैं। वहीं, राजधानी की पुलिस भी कान में खूंटा डालकर मामले की बिना जांच किए ही गरीबों का उत्पीड़न करने से पीछे नहीं हटती है। 

यह भी पढ़ें...कौन कर रहा भाजपा को सद्बुद्धि देने के लिए यज्ञ

क्या है मामला

पीड़ित तेलीबाग निवासी आनंद का आरोप है कि उन्होंने किसी मामले को लेकर आरटीआई डाली थी। जिसकी सुनवाई सूचना आयुक्त अरविंद सिंह बिष्ट के यहां होनी थी लेकिन बिष्ट ने बिना सुनवाई के ही मामले को निस्तारित कर दिया। इसके बाद पीड़ित ने मुख्य सूचना आयुक्त से मामले की शिकायत की और सुनवाई दूसरे अधिकारी से करवाने की अपील की। जब इस बात की जानकारी बिष्ट को हुई कि उनके खिलाफ शिकायत हुई है, तो वह बौखला उठे और आयोग पहुंचने पर आनंद को बंधक बना लिया। करीब 2 घंटे तक आयोग में उनका उत्पीड़न होता रहा। इसी बीच यहां मानवाधिकार कार्यकर्ता जय विजय पहुंचे तो प्रकरण जानने के बाद 100 नंबर को सूचना दे दी। सूचना पाकर विभूतिखंड थाने से मौके पर पहुंची पुलिस ने उल्टे पीड़ित पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया।

यह भी पढ़ें...मीडिया कंपनी ने ही कर डाला कई महिलाओं का उत्पीड़न, जब इस महिला पत्रकार को जबरन...

जब आनंद के आयोग में बंधक बनाए जाने की जानकारी उनके साथियों को हुई तो उन्होंने भी फोन कर जानकारी लेने की कोशिश की। आनंद के छूटने के बाद जब उनके साथियों ने न्याय के लिए लड़ाई लड़ना शुरू किया तो उनके साथियों पर भी झूठी एफआईआर दर्ज करा दी गई। इसके बाद पीड़ित को ही पुलिस थाने उठा ले गई। जबकि अरविंद सिंह बिष्ट से कोई पूछताछ पुलिस ने नहीं की। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत की। जब वहां सुनवाई नहीं हुई तो बिष्ट पर एफआइआर दर्ज कराने के लिए एसएसपी के यहां शिकायत भेजी लेकिन मामला आयुक्त का होने के कारण पुलिस चुप्पी साधे हुए है। 

यह भी पढ़ें...शिक्षक का नाबालिग पर आया दिल, 18 महीने तक बनाया संबंध, पत्नी को पता चला तो...

जबरदस्ती करवा दिया हस्ताक्षर

मामला बढ़ता देख पुलिस ने आनंद को बुलाया और आयोग में ले जाकर बिष्ट से समझौता का दबाव बनाने लगे। जब वह नहीं माना तो गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देकर एफीडेविड पर साइन करा लिया गया कि उसके साथ कोई घटना नहीं हुई है। वहीं,  के समर्थन में आए साथी तनवीर अहमद सिद्दीकी, एके गोयल, संजय आजाद, जयविजय, हरपाल सिंह पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। पीड़ित ने अब राज्यपाल और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

यह भी पढ़ें...बेटी के साथ करता था रेप, मां भी देती थी साथ, खुलासे के बाद 20 साल की सजा

हजरतगंज पुलिस की मिली भगत

बताते चलें कि पहले भी बिष्ट ने तनवीर अहमद पर आरटीआई मामले को लेकर बंधक बनाने के साथ ही मारपीट की थी लेकिन उस समय मीडिया वहां पहुंच गई थी। जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा था। उस समय भी हजरतगंज पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर किसी भी तरह की कार्रवाई करना उचित नहीं समझा था। पुलिस के करतूतों के कारण ही गरीबों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। आए दिन लोग शोषण का शिकार हो रहे हैं।  हालांकि, वह मामला अब कोर्ट में चल रहा है। जो भी हो चिंताजनक बात यह है कि गरीब जनता जिस अधिकारी से न्याय की उम्मीद करे वहीं फर्जी मुकदमें में फंसाने लगे तो कहां फिर कहां जाए। 

Web Title: Serious allegations against Information Commissioner Arvind Singh Bisht ( Hindi News From Newstimes)


अब पाइए अपने शहर लखनऊ की खबरे (Lucknow News in Hindi) सबसे पहले Newstimes वेबसाइट पर और रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें न्यूजटाइम्स की हिंदी न्यूज़ ऐप एंड्राइड (Hindi News App)


कमेंट करें

अपनी प्रतिक्रिया दें

आपकी प्रतिक्रिया