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Health_is_wealth : Sanitary Napkins से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां, जानें वजह


HARENDRA SINGH 04/02/2018 09:44:42
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Health is wealth Sanitary Napkins Causes Critical illness Newstimes

New Delhi. Sanitary Napkins का इस्‍तेमाल केवल 12 फीसदी महिलाएं ही पीरियड्स के दौरान कर पा रही हैं। बाजार में धीरे-धीरे कुछ लोकल ब्रांड्स भी उतर रहे हैं। Sanitary Napkins का बाजार फिलहाल 4500 करोड़ रुपए का बताया जाता है। 7 से 10 साल बाद यह 21 हजार करोड़ हो जाने का अनुमान है।

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रिसर्च के मुताबिक

एक रिसर्च के मुताबिक एक शहरी महिला पूरी जिंदगी में करीब 17 हजार पैड इस्‍तेमाल करती है। इन पैड्स से सेहत व पर्यावरण से जुड़े खतरे भी हैं। सैनिटरी नैपकिन के कारोबार से जुड़े एक्‍सपर्ट बताते हैं कि दस साल पहले चीन की हालत भी भारत जैसी थी। वहां भी तीन MNC ब्रांड का बाजार पर दबदबा था। पर आज की तारीख में केवल एक लोकल ब्रांड  का 22 फीसदी बाजार पर कब्‍जा है।

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भारत में पीरियड्स के दौरान 35.5 करोड़ में से करीब 80 फीसदी लड़कियां/महिलाएं अपना सामान्‍य रूटीन फॉलो नहीं कर पातीं। वे ज्‍यादातर घर में ही रहती हैं। इसका कारण यह है कि वे महंगे सैनिटरी नैपकिन नहीं खरीद सकतीं।

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Sanitary Napkins बनाने में इन चीजों का होता है इस्‍तेमाल

बाजार में बिकने वाले ब्रांडेड सैनेटरी नैपकिन में सुपर एब्‍जॉर्बेंट पॉलीमर्स (जेल), ब्‍लीच किया हुआ सेलुलोज वूड पल्‍प, सिलिकॉन पेपर, प्‍लास्टिक, डियोडेरेंट आदि का इस्‍तेमाल होता है। Sanitary Napkins में डायोक्सिन का इस्‍तेमाल किया जाता है।

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Sanitary Napkins से होती है समस्‍या

डायोक्सिन को नैपकिन को सफेद रखने के लिए काम में लिया जाता है। हालांकि इसकी मात्रा कम होती है लेकिन फिर भी नुकसान पहुंचाता है। इसके चलते ओवेरियन कैंसर, हार्मोन डिसफंक्‍शन, डायबिटीज और थायरॉयड की समस्‍या हो सकती है। नैपकिन में रूई के अलावा रेयॉन को भी उपयोग में लाया जाता है।

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इससे सोखने की अवधि बढ़ती है। रेयॉन में भी डायोक्सिन होता है। नैपकिन बनाने के दौरान इन पर कृत्रिम फ्रेगरेंस और डियो छिड़का जाता है। इनसे एलर्जी और त्‍वचा को नुकसान होने का खतरा रहता है। लंबे समय तक नैपकिन के इस्‍तेमाल से वेजाइना में स्‍टेफिलोकोकस ऑरे‍यस बै‍क्‍टीरिया बन जाते हैं। इससे डायरिया, बुखार और ब्‍लड प्रेशर जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। 

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ये है सुरक्षित उपाय 

Organic Cloth Pads 
ये पैड्स रूई और जूट या बांस से बनते हैं। इन्‍हें रखने में भी कोई दिक्‍कत नहीं होती। उपयोग किए गए पैड्स को धोकर फिर से इस्‍तेमाल किया जा सकता है। साथ ही ये पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाते।

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Menstrual cup 
वर्किंग वूमन और लड़कियों के लिए मेंस्‍ट्रुअल कप काफी उपयोग है। यह गम रबर से बना होता है। अच्‍छी क्‍वालिटी के कप की कीमत 700 रुपये है। लेकिन एक बार खरीदने के बाद 10 साल तक की चिंता समाप्‍त।

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