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सरकार की स्वच्छता मुहिम पर उठे सवाल


SANDEEP PANDEY 05/02/2018 17:23:04
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LUCKNOW. गांव की छोटी सी परिधि में ढेर सारे सोख्ता टैंक के शौचालयों का निर्माण एक अन्य तरह के प्रदूषण और गंदगी को भी जन्म दे रहा है। इससे भविष्य में जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण फैलने का खतरा हो सकता है। जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज के चीफ प्राक्टर डॉ. राजेश मल्ल ने यह सवाल सहयोगी आरबी पीजी कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के रविवार को बाराबंकी स्थित रहीमाबाद व दौलतपुर में आयोजित स्वच्छता शिविर में उठा दिए।

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  शुद्ध जल का संकट खड़ा होगा

उन्होने यह तर्क दिया कि पक्के टैंक वाले शौचालयों में तो पानी बाहर निकल जाता है पर कच्चे टैंकों का पानी लगातार नीचे जाने से उसके शुद्ध पानी का स्रोत प्रभावित होगा और वह एक दिन शुद्ध जल का संकट खड़ा कर देगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक व्यवस्था में मानवीय मूल्यों की गिरावट और अज्ञानता ने कई तरह की गंदगी को जन्म दिया है।

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  यूनीसेफ से प्रमाणित है शौचालय मॉडल

चीफ प्रॉक्टर डॉ. मल्ल के बयान पर जिला पंचायत राज अधिकारी आशुतोष कुमार ने कहा कि उनका बयान सहीं नहीं है, शायद उन्होंने सोख्ता टैंक के स्ट्रैक्चर को जाने बिना यह बात कही है। विभाग जिस शौचालय के मॉडल को प्रोत्साहित कर रहा है, वह यूनीसेफ से प्रमाणित है। इसके सोख्ता टैंक की गहराई महज एक मीटर है। ऐसे सोख्ता टैंक में शौच के समय डाले जाने वाले पानी का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा पुनः सूर्य की किरणों से वाष्पित होकर समाप्त हो जाएगा जबकि महज थोड़ा सा हिस्सा ही जमीन में जाएगा। यह भी कहा कि यह मॉडल पूर्णतयाः सुरक्षित है।

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  अकेले बाराबंकी में बनने है साढ़े तीन लाख शौचालय

जिस शौचायल के स्ट्रैक्चर पर सवाल उठाए गए है, उसी मॉडल के शौचालय निर्माण का जिला प्रशासन का लक्ष्य अक्टूबर 2018 तक साढ़े तीन लाख परिवारों में निर्माण कराना है। प्रत्येक शौचालय निर्माण पर सरकार 12 हजार रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि के रूप में देती है।

Web Title: Questions on the cleanliness drive of the government ( Hindi News From Newstimes)


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