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 निजीकरण के टेंडर निरस्त न होने पर अभियंता करेंगे आंदोलन, 17 फरवरी तक वापस लेने की मांग


SHUBHENDU SHUKLA 14/02/2018 22:52:14
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Lucknow. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन से 17 फरवरी तक निजीकरण प्रक्रिया टेंडर वापस लेने की मांग की है। अन्यथा प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी व अभियंता प्रांतव्यापी आंदोलन प्रारम्भ करने के लिए बाध्य होंगे।

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समिति के पदाधिकारियों की बुधवार को बैठक हुई। समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि पॉवर कॉरपोरेशन के निदेशक कार्मिक से वार्ता का कोई परिणाम नहीं निकला। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि इस सम्बन्ध में संघर्ष समिति से पॉवर कार्पोरेशन के चेयरमैन आलोक कुमार जल्द वार्ता करेंगे।

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निजीकरण का प्रयोग असफल

उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा व आगरा में निजीकरण का प्रयोग असफल साबित हुए हैं। ऐसे में सात अन्य जिलों का निजीकरण करने के बजाय पहले नोएडा व आगरा के निजीकरण की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने टेंडर रद्द करने की मांग की। संघर्ष समिति ने कहा कि सहारनपुर, कन्नौज, इटावा, उरई, रायबरेली, मऊ व बलिया की बिजली आपूर्ति की पूरी जिम्मेदारी संघर्ष समिति को दे दी जाये, तो समिति एक साल में 15 प्रतिशत तक लाइन हानियां लाने में सक्षम है, लेकिन यदि सुधार के बजाए निजीकरण ही लक्ष्य है, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

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घोटाला के लिए नियुक्त कंसल्टेंट

समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला करने के लिए शक्ति भवन में बड़े पैमाने पर कंसल्टेंट नियुक्त किये गए हैं। इन कंसल्टेंट्स के तार बिजली आपूर्ति करने वाली निजी कंपनियों से पहले से ही जुड़े हुए हैं। टेंडर की प्रक्रिया मात्र औपचारिकता है। शक्ति भवन में बिजली के अत्यंत अनुभवी विशेषज्ञों के होते हुए कन्सल्टैंट रखे जाने का घोटाले के अलावा और कोई औचित्य नहीं है। समिति कन्सल्टेंट हटाओ अभियान भी चलाएगी। बैठक में राजीव सिंह, गिरीश पाण्डेय, सदरुद्दीन राना समेत अन्य पदाधिकारी शामिल हुए।

Web Title: Engineers will not protest if tender of privatization is not canceled in lucknow ( Hindi News From Newstimes)


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