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महिलाओं और पुरुषों में भेदभाव की लकीर घरों से लेती जन्म


SANDEEP PANDEY 27/02/2018 14:40:13
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LUCKNOW.  सुखन चौखट संस्था की ओर से सोमवार को महिला दिवस को लेकर आयोजित एक कार्यशाला विषय 'स्त्री की स्वाधीनता' का आयोजन किया गया। संस्था की सदस्या डॉ. सीमा सिंह ने छात्राओं को बताया कि महिलाओं और पुरुषों में भेदभाव की लकीर घरों से ही जन्म लेती है। एक पिता जिस तरह अपने पुत्र को लाड़ करता है उस तरह अपनी पुत्री को नहीं।

कुछ ऐसे ही मुद्दों को लेकर सदस्या ने छात्राओं के आगे प्रश्न खड़े किये। संस्था की सदस्याओं ने छात्राओं से प्रश्नों के माध्यम से विचार साझा किये। छात्राओं ने भी इस मौके पर उनके प्रश्नों के उत्तर बड़ी बेबाकी से दिये। इस मौके पर संस्था की ओर से डॉ. शालिनी सिंह, काजल, डॉ. नीतू रावत और दर्जनों छात्राओं के साथ महिला शिक्षिकाएं भी मौजूद थीं।

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महिलाओं को होना होगा तैयार

डॉ. सीमा सिंह ने बताया कि मेडिकल स्टोर पर काली पन्नी में मिलने वाले सामान को महिलाएं जिस दिन बिना पन्नी के घर ले जा सकेंगी, उस दिन महिलाओं को लेकर समाज की दिशा बदल चुकी होगी। लेकिन, इसके लिए सबसे पहले महिलाओं को ही तैयार होने की जरूरत है। इसका बीज छात्रा हो अथवा महिला उसे खुद ही रखना होगा।

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महिला सशक्तिकरण कहने से नहीं मिलेगा सम्मान

राजकीय महिला पॉलीटेक्निक लखनऊ के प्रधानाचार्य डीके रुद्रा ने कहा कि देश के अंदर महिला सशक्तिकरण की बात करने मात्र से नारी को सम्मान नहीं मिलने लगेगा। जिस दिन दहेज वापस उपहार बन जायेंगे और माता-पिता अपने बेटे को बेटियों की तरह पालेंगे, उस दिन यह धारणा बदल जायेगी।

Web Title: Differentiation of discrimination in women and men is born from homes ( Hindi News From Newstimes)


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