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25 साल पुरानी दुश्मनी खत्म करने के बाद क्या सपा-बसपा दोहरा पाएंगे इतिहास 


GAURAV SHUKLA 14/03/2018 09:04 AM
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Lucknow. गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव के परिणाम बुधवार(14 मार्च) को घोषित होंगे। इसके लिए काउंटिंग शुरु हो चुकी है। इस वक्त सभी की निगाहें चुनावी परिणामों का इंतजार कर रही हैं। जिसका बड़ा कारण सपा बसपा के बीच हुआ आपसी तालमेल है। बसपा ने एक ओर जहां उपचुनाव न लड़ने की अपनी परंपरा को बरकरार रखा, तो वहीं दोनों सीटों पर सपा के प्रत्याशी को समर्थन देकर भविष्य में महागठबंधन को लेकर चल रही बातों पर एक अनुकूल संकेत दे दिया है। कयास लगाए जाने लगे हैं कि 2019 में मोदी लहर पर विराम लगाने के लिए एक बार फिर यूपी में सपा बसपा एक साथ एक मंच पर आ सकते हैं। लेकिन यह सब तभी संभव है जब उपचुनाव के नतीजे सार्थक निकलें। 

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गौरतलब है कि 1993 में पहली बार सपा नेता मुलायम सिंह यादव और बसपा नेता कांशीराम ने गठबंधन किया था। जिसके परिणाम स्वरूप चुनावों में सपा को 100 से ज्यादा और बसपा को 67 सीटों पर सफलता मिली थी। उस दौरान पहली बार सपा बसपा गठबंधन की सरकार बनी थी। लेकिन 1995 में गठबंधन तोड़ने की घोषणा और गेस्टहाउस कांड के बाद यह सियासी विरोध निजी हो गया। 

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गेस्ट हाउस कांड के बाद कई बार गठबंधन को लेकर चर्चा हुई। लेकिन बसपा सुप्रीमो हमेशा ही इस पहल से किनारा करती रही। जिसके बाद लोकसभा उपचुनाव में एक बार फिर सुप्रीमो मायावती ने सपा प्रत्याशी को समर्थन कर यूपी की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया। 

Web Title: sp bsp litmus test in gorakhpur and phulpur ( Hindi News From Newstimes)


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