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बच्चों को नि:शुल्क बांट रहे 17 वर्षो से ज्ञान


SANDEEP PANDEY 14/03/2018 11:17:44
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LUCKNOW.  सेवा के लिये उम्र का मोहताज होने की कोई जरूरत नही है। यह बात अंबेडकरनगर मेंं जलालपुर के उस्ताद शायर व पूर्व प्रवक्ता जाहिद जाफरी ने सिद्ध कर दी है। उन्होने नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद अपने घर और द्वार को शिक्षा का मंदिर बनाकर पिछले 17 वर्षो से निःशुल्क बच्चों को अपने ज्ञान का भण्डार लुटा रहे हैं। खास तौर पर फारसी की तालीम देने के लिए वह काफी चर्चित हैं।
जाहिद जाफरी ने घर के एक कोने को किताबों की लाइब्रेरी बना देने के साथ उसी कमरे में उर्दू-हिन्दी साहित्य के साथ क्षेत्र के बच्चों को फारसी भाषा की नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं। पढ़ाने का उनका तरीका कुछ ऐसा है कि बच्चे किताबों में रमते चले जाते हैं।

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2001 में हुए थे रिटायर
2001 में सुभाष राष्ट्रीय इंटर कालेज सैदही से बतौर उर्दू प्रवक्ता रिटायर हुए जाहिद जाफरी का 80 वर्ष की उम्र में भी पठन पाठन व लेखन का शौक अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है। मध्यम वर्ग के घरेलू परिवेश में बुनकरी पेशा की सीमित आमदनी के चलते जलालपुर के एक इंटर कालेज से महज हाईस्कूल की सनद लेकर उन्होंने तमाम उच्च शिक्षा ली।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अदीब कामिल, फिर गोरखपुर से स्नातक और अवध विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री प्राप्त करने वाले जाहिद जाफरी की पहचान जहां आज एक कुशल शिक्षक के रूप में लोगों के दिलों में छाप छोड़े हुए है।

उर्दू अकादमी को लौटा दी पुरस्कार की राशि
सादगी पसन्द व्यक्तित्व के कायल जाहिद जाफरी जनपद के पहले शायर हैं, जिन्होंने स्वयं रचित पुस्तक तौजीह उर्दू पर उर्दू अकादमी की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों प्राप्त पुरस्कार की 10 हजार रुपए की धनराशि अकादमी को फौरन वापस कर दी थी। उन्होंने कहा था मेरी जहानत धन की भूखी नहीं है। उन्होंने अब तक दो दर्जन किताबों की रचना की है।

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ईरान रेडियो पर किया फारसी में प्रोग्राम
शायर जाहिद जाफरी ने 2002 में मुल्क ईरान की कई अदबी नाशिस्तों में शामिल होकर अपनी जहानत और काबिलियत का लोहा मनवाया। वहीं ईरान रेडियो स्टेशन पर फारसी में प्रोग्राम पेश करने का भी उन्हें अवसर मिला और अपने देश का नाम ऊंचा किया। एक शाम बच्चियों को फारसी की शिक्षा देते हुए जनाब जाफरी ने कहा कि बच्चे मुझसे सीखना चाहते हैं और मैं उन्हें सिखाना चाहता हूं, ये सिलसिला जिंदगी की आखिरी सांस तक जारी रहेगा।

Web Title: Knowledge for 17 years sharing free of charge to children ( Hindi News From Newstimes)


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