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इस बीमारी के संक्रमण से बचने के लिए मास्क जरूरी


SANDEEP PANDEY 20/03/2018 16:04:44
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LUCKNOW.   अगर खांसी बंद नहीं हो रही है तो बिना देरी किये हुए बलगम की जांच करवानी चाहिये। ज्यादातर देरी या लापरवाही करने पर मरीज को टीबी की बीमारी हो सकती है। अगर समय पर जांच से बीमारी का पता चल जाये तो दवा से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। संक्रमित मरीज व टीबी की बीमारी से बचाव के लिए मास्क लगाना सबसे कारगर हो सकता है। यह कहना है केजीएमयू माइक्रोबायोलॉजी के चिकित्सक डॉ. शीतल वर्मा का। सोमवार को वह टीबी की बीमारी व रोकथाम के लिए जनजागरुकता कार्यक्रम के बारे में बता रहे थे।

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2025 से पहले भारत को टीबी मुक्त बनाना

डॉ. शीतल वर्मा ने बताया कि 2025 से पहले भारत को पूरी तरह से टीबी मुक्त बनाना है। देश में प्रति वर्ष 28 लाख टीबी के नए मामले आते हैं। इसमें 5 लाख लोगों की मृत्यु होती है। करीब 10 लाख लोग या तो बिना उपचार के रह जाते हैं, जिन्हें विशेषज्ञों द्वारा लापता कहा जाता है। उप्र में प्रतिवर्ष 3 लाख टीबी के नए केस सामने आते हैं। हर तीसरे मिनट में दो लोगों की मृत्यु टीबी की वजह से होती है।

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5000 मरीजों की नि:शुल्क जांच होती है

माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. अमिता जैन ने बताया कि विभाग की लैबोरेटरी में अत्याधुनि उपकरणों के साथ टीबी की जांच के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रत्येक वर्ष लैबोरेटरी में 5000 मरीजों की नि:शुल्क जांच की जाती है।

मरीजों को जांच व दवा मुफ्त में

टीबी मरीजों की सभी प्रकार की जांचें सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह से मुफ्त में की जाती हैं और दवाइयां भी नि:शुल्क ही दी जाती हैं। ऐसे में लंबे समय तक खांसी आने, बुखार होने पर बलगम की जांच जरूर करानी चाहिए।

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एमडीआर टीबी क्या है

डॉक्टरों के मुताबिक एमडीआर बिगड़ी हुई टीबी है। इस बीमारी में टीबी की दो प्रमुख दवाएं रिफाम्पिसिन और आइसोनियाजिड काम नहीं करती। गलत दवाओं का सेवन, अधूरा इलाज एमडीआर टीबी का अहम कारण है। इसका इलाज 24 से 27 महीने तक चलता है।

टीबी के लक्षण

-दो सप्ताह से अधिक खांसी आना।

-सीने में दर्द, बुखार आना और अचानक वजन घटना।

-भूख न लगना, खाया पीया न लगना व कमजोरी महसूस होना।

-रात में अचानक पसीना आना।

Web Title: Mask required to prevent infection of this disease ( Hindi News From Newstimes)


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