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टीवी संक्रामक रोग, इलाज जरूरी: डा. सूर्यकांत


SHUBHENDU SHUKLA 23/03/2018 23:39:55
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Lucknow. टीबी एक संक्रामक रोग है,जिसका पूरा इलाज जरूरी है। नहीं तो कई और लोगों की जान जोखिम में डाल देता है। टीबी छुपाने वाली नहीं बल्कि बताने वाली बीमारी। तभी इसका इलाज संभव है। टीबी माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरकलोसिस नामक जीवाणु से होता है। जब इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति खांसता ,छींकता व थूकता है,तो उस थूक में मौजूद जीवाणु हवा में मिल जाते हैं। जिससे आस-पास के लोगों में संक्रमण फैलाते हैं। यह कहना है उत्तर प्रदेश क्षय नियंत्रण टास्क फोर्स के चेयरमैन डा.सूर्यकान्त का। 

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उन्होंने बताया कि टीबी के जीवाणू की खोज रार्बट कांच नामक चिकित्सक ने 24 मार्च 1882 को की थी। यह खोच टीबी के इलाज में मील का पत्थर साबित हुयी। इसलिए इस बीमारी को कांच की बीमारी भी कहते हैं। इस खोज के कारण हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस के रूप में मनाते हैं।

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उन्होंने बताया कि वर्ष 1943 से पहले टीबी की कोई दवा नहीं हुआ करती थी,तब इस बीमारी का इलाज अच्छा भोजन ,अच्छी चिकित्सकीय देखभाल और शुद्घ हवा द्वारा किया जाता था। यह आयुर्वेद में भी वर्णित है। इसे बाद में सेनेटेरिया इलाज के नाम से जाना गया। यह टीबी कंट्रोल के लिए आज भी महत्वपूर्ण है। टीबी की पहली दवा स्ट्रेप्टोमाइसिन की खोज वैक्समैन नामक बैज्ञानिक ने 1943 में की थी।

 इसके बाद इस बीमारी की और अच्छी दवा आयी। इन दवाओं के कारण विकसित देशों में टीबी पूरी तरह से कंट्रोल होने वाली थी,लेकिन एचआईवी बीमारी के आने चलते विकशित देशों मे टीबी की बीमारी दोबारा बढऩे लगी। टीबी की बढ़ती सं या को देखते हुए  विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीबी को 1993 में वैश्विक आपातकाल घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में विश्व की एक तिहाई और भारत की  आधी आबादी टीबी से संक्रमित है।

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एक करोड़ नये मरीज

उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2014 की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में टीबी के एक करोड़ नये मरीज पाये गये। जिनमें से कुल 15 लाख मौंते हुयी। वहीं भारत में दुनिया के एक चौथाई मामले जिनकी संख्या लगभग 28 लाख के करीब बतायी गयी। टीबी से मरने वाला हर पांचवां व्यक्ति भारतीय था। भारत में हर पांच मिनट में दो मौंतें होती हैं। प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा लोगा काल के गाल में समा जाते हैं। वहीं प्रतिवर्ष 4 लाख 23 हजार लोग टीबी की बीमारी से अपनी जांन गवांते हैं।

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एमडीआर टीबी जटिल समस्या

डा.सूर्यकान्त ने बताया कि साधारण टीबी के अलावा अब नये प्रकार की टीबी देखने में आ रही है। जिसे एमडीआर टीबी नाम दिया गया है। इस बीमारी में टीबी की मु य दवायें बेअसर होने लगती हैं। एमडीआर टीबी भारत में जटिल समस्या बनती जा रही है। इसके इलाज में अधिक समय,पैसा व दवाइयों की आवश्यकता पड़ती है। 

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उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2015 के आंकड़ों में टीबी के कुल मामलों में लगभग 5 लाख मामले एमडीआर टीबी के थे। जिसमें से 1.5 लाख मरीज अकेले भारत में थे। एमडीआर टीबी के कुल मरीजों में से 50 हजार मरीज एक्सडीआर टीबी के थे। जो लोग समय पर दवा नहीं लेते या फिर दवा का कोर्स आधे में छोड़ देते हैं, उन्हें एमडीआर टीबी अपनी चपेट में ले लेती है।

यह सबसे बड़ी समस्या

डा.सूर्यकांत के मुताबिक उत्तर प्रदेश में लगभग 7.5 लाख मरीज टीबी की चपेट मे हैं। जिसमें से 2.5 लाख मरीज सरकारी व 2.5 लाख मरीज निजी सेक्टर में उपचार ले रहे हैं । वहीं 2.5 लाख मरीज ऐसे हैं जिनका पता नहीं चल रहा है। एक टीबी का मरीज अपने जीवन में 20 लोगों को संक्रमित करता है। आने वाले सालों में हमारी सबसे बड़ी चुनौती इसी संक्रमण को रोकना है। भारत सरकार  ने टीबी की बीमारी को समाप्त करने के लिए 2015 का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है।

Web Title: Dr. Suryakant told that TB infections should be completely cured ( Hindi News From Newstimes)


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