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बस छोड़ साइकिल से चलते थे बजरंग के पिता, कभी घी तक खाने के नहीं थे पैसे


SUJEET KUMAR 13/04/2018 17:28:49
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Lucknow. पहलवान बजरंग पूनिया ने इंडिया को 17वां गोल्ड मेडल दिलाया है। बजरंग ने पुरुषों के 65 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड जीता है। कॉमनवेल्थ गेम्स बजरंग का ये दूसरा मेडल है। इससे पहले उन्होंने 2014 में ग्लास्गो में खेले गए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था। पर 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की झोली में 17वां गोल्ड डालने वाले बजरंग का जीवन काफी संघर्षों वाला रहा है।

आइए जानते हैं क्या है, पहलवान बजरंग की कहानी...

commonwealth games 2018 gold coast bajrang punia

बजरंग को कुश्ती विरासत में मिली है। बजरंग के पिता बलवान पूनिया अपने समय के एक नामी पहलवान रहे हैं, लेकिन गरीबी के चलते वह आगे नहीं बढ़ सके। कुछ ऐसा उनके बेटे बजरंग के साथ भी हुआ। बजरंग के पिता के पास अपने बेटे को घी तक खिलाने के पैसे नहीं थे। बेटे घी खाए इसके लिए वह बस का किराया बचाकर साइकिल से चलने लगे। बचे हुए किराए से वह बेटे को भरपूर खाना खिलाते थे, ताकि उनका बेटा उनके सपने को पूरा कर सके। 

commonwealth games 2018 gold coast bajrang punia

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बजरंग 24 साल की उम्र दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने छत्रसाल स्टेडियम से कुश्ती के गुर सीखे। धीरे- धीरे बजरंग एक अच्छे पहलवान बने और 2014 में कॉमनवेल्थ खेलों में 61 किलोग्राम वर्ग में रजत जीता। इसके बाद वह 2018 में गोल्ड जीते। 

Web Title: commonwealth games 2018 gold coast bajrang punia ( Hindi News From Newstimes)


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