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जानें क्यों जल रहा गृह युद्ध की आग में सीरिया?


PRADEEP CHANDRA JOSHI 13/04/2018 18:47:22
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New Delhi.  आज सीरिया को जो हाल है और जिस तरह वहां जारी गृह युद्ध की आग में लोगों का कत्लेआम हो रहा है। उसे देख कर कोई भी विचलित हो सकता है। किन्तु अब तो हद ही हो चुकी है सीरिया का गृह युद्ध समाप्त न होकर जैसे सारी दुनिया को बनाने जा रहा है। जिस तरह पिछले साल और इस साल सीरिया में रासायनिक गैसों का प्रयोग किया गया। उसने सारी दुनिया को उलझा कर रख दिया है।

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सीरिया के साथ कई बड़े देश भी इस गृहयुद्ध में उलझते नजर आ रहे है। ये देश तो गृह युद्ध के कारण पूरी तरह तबाह और बर्बाद हो चुका है किन्तु इसके कारण दुनिया के बांकी देश न तबाह हो जाए अब तो बस यही डर सताने लगा है। 

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जानें कैसे हुई सीरिया में गृह युद्ध की शुरुआत?

बता दें कि किसी भी देश में संघर्ष तभी शुरू होता है जब कि वहां बेरोजगारी, भ्रष्टाचार का बोलबाला हो, राजनीतिक स्वतंत्रता का अभाव हो और शिक्षा की कमी हो, और सीरिया में ये भी यही सब कुछ था और इन सभी कारणों के चलते लोगों में अपने शासक बसर अल-असद की दमनकारी नीति के खिलाफ निराशा थी। बता दें कि बशर अल-असद ने सन 2000 में अपने पिता हाफिज अल असद की जगह ली थी और इसी बीच अरब के कई देशों में सत्ता के खिलाफ शुरू हुई बगावत से प्रेरित होकर मार्च 2011 में सीरिया के दक्षिणी शहर दाराआ में भी लोकतंत्र के समर्थन में आंदोलन शुरू हुआ था।

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विद्रोहियों ने उठा लिए सरकार के खिलाफ हथियार

उस समय सीरिया की असद सरकार को यह असहमति रास नहीं आई और उसने आंदोलन को क्रूरता के साथ कुच लना शरू कर दिया। सरकार के बल प्रयोग का पूरे सीरिया में राष्ट्रीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया और लोगों ने बशर अल-असद से इस्तीफे की मांग शुरू कर दी। जैसे-जैसे वक्त बीतता गया आंदोलन और अधिक तेज होता गया। विरोधियों ने सरकार के खिलाफ हथियार उठालिये। असद ने इस विद्रोह को विदेश समर्थित आतंकवाद करार दिया और इसे कुचलने का संकल्प लिया। 

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विदेशी ताकतों ने किया हस्तक्षेप

दोनों ही पक्षों में तब से ही संघर्ष चल रहा है। सीरिया पर नियंत्रण को लेकर सरकार विरोधियों के बीच का ये संघर्ष 2012 आते-आते गृह युद्ध में तब्दील हो गया। सैकड़ों विद्रोही गुटों ने एक समानांतर व्यवस्था स्थापित कर ली ताकि सीरिया पर उनका नियंत्रण कायम हो सके। इसका नतीजा यह हुआ कि यह लड़ाई असद और उनके विरोधियों से आगे निकल गई। सीरिया की लड़ाई में क्षेत्रीय और दुनिया की ताक़तों की एंट्री हुई। इसमें ईरान, रूस, सऊदी अरब और अमरीकी का सीधा हस्तक्षेप सामने आया।

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शिया बनाम सुन्नी के रूप में युद्ध

इन देशों ने असद और उनके विरोधियों को सैन्य, वित्तीय और राजनीतिक समर्थन देना शुरू किया सीरिया में कई देशों की एंट्री से युद्ध की स्थिति और गंभीर और विकराल हो गई। बाहरी देशों पर सीरिया में सांप्रदायिक दरार पैदा करने का भी आरोप लगा। सुन्नी बहुल सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद शिया हैं। इसी संघर्ष में शिया बनाम सुन्नी की भी स्थिति पैदा हो गई। इस बीच जिहादी ग्रुपों को शिया और सुन्नी का विभाजन रास आया और उन्हें भी यहां पसरने का मौका मिल गया।

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रूस दे रहा सीरिया को सर्पोट जबकि अमेरिका विरोध में

असद के लिए सीरिया में स्थिति मुश्किल होती जा रही थी। असद ने अपना नियंत्रण हासिल करने के लिए विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाकों में सितंबर 2015 में हवाई हमले शुरू किए। रूस ने भी सीरिया का साथ दिया। रूस का कहना है कि हवाई हमले में केवल आतंकवादियों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि ऐक्टिविस्टों का कहना था कि हमला पश्चिमी देशों के समर्थन वाले विद्रोही ग्रुपों पर किया गया। जबकि अमेरिका का कहना है कि सीरिया को तबाह करने के लिए असद सरकार जिम्मेदार है।

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सीरिया में रासायनिक हथियारों का प्रयोग

2014 से लेकर अब तक अमरीका ने सीरिया में कई हवाई हमले किए हैं। सुन्नी बहुल सऊदी अरब ईरान के ख़िलाफ सीरिया में विद्रोहियों को मदद कर रहा है। असद के ख़िलाफ़ विद्रोहियों को मदद करने में सऊदी अरब की सबसे बड़ी भूमिका है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पिछले पांच सालों में कम से कम सीरिया में ढाई लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और तो और इस बीच सीरिया में दो बार रासायनिक हथियारों का भी प्रयोग किया जा चुका है जिसकी कीमत सीरिया की आम जनता और मासूम छोटे बच्चों ने अपनी जान गवा कर चुकाई है। मासूमों की मौत पर जहां सारी दुनिया इस घटना की भर्त्सना कर रही है।

 वहीं बड़े देश एक दूसरे पर इन घटनाओं के लिए आरोप और प्रत्यारोप लगा रहे है कोई यह नहीं सोच रहा है कि इस तरह की घटना न हो और युद्ध ग्रस्त सीरिया में शांति बहाल हो। बड़े-बड़े देश शांति की बात तो करते हैं पर युद्ध करने को भी आतुर हो जाते है। जबकि सभी जानते हैं कि युद्ध के बाद की शान्ति कैसी होती है।   

Web Title: Learn why the burning Syria in civil war ( Hindi News From Newstimes)


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