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बलात्कार के लिए सजा बदल गई, पर मानसिकता ज्यों की त्यों


NEELAM SHUKLA DEWANGAN 23/04/2018 15:15:38
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भले ही बलात्कारी के लिए पाक्सो एक्ट में बदलाव कर सजा--मौत का प्रावधान कर दिया गया हो, लेकिन देश में महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों में कमी नजर नहीं आ रही है। ताज़ा मामला मध्य प्रदेश के इंदौर का है, जहां एक मॉडल एवं ब्लॉगर से सड़क पर सरेआम मनचलों ने बदतमीजी की। इस बात का खुलासा मॉडल ने सोशल मीडिया पर किया।

model allegedly molested two men on raod

  मॉडल से सरेआम छेड़खानी

मॉडल ने ट्विटर पर बताया है कि इंदौर की व्यस्त सड़क पर जब वो स्कूटी चला रही थीं तो दो युवकों ने उसकी स्कर्ट खींचते हुए 'दिखाओ इसके नीचे क्या है जैसे भद्दे कमेंट किए। मॉडल ने अपनी पीड़ा सोशल मीडिया पर व्यक्त की। उन्होंने लिखा, ये सब आज हुआ जब मैं अपनी एक्टिवा से जा रही थी, इसी दौरान दो युवकों ने मेरी स्कर्ट खींचने की कोशिश की और कहा कि दिखाओ इसके नीचे क्या पहना है? इससे मेरी गाड़ी का संतुलन बिगड़ा और मैं हादसे का शिकार हो गई। इससे मुझे चोटें भी आई हैं। ये सब इंदौर की व्यस्त सड़क पर हुआ है। मैं इससे अंचभित हूं।

  हाथरस में छह वर्ष की बच्ची का शव मिला

हाथरस में एक घर की छत से खून टपक रहा था। लोग जमा हुए और छत पर जाकर देखा तो रेत से भरे बोरे में छह वर्ष की बच्ची का शव पड़ा था। बताया जा रहा है कि बच्ची पड़ोस की थी और एक दिन पहले से गायब थी।

  पैंतीस हजार में मां बेटी को खरीदा था

सूरत पुलिस अब तक 86 जख्म वाली बच्ची की पहचान नहीं सकी, लेकिन इस बीच एक महिला का भी शव मिला है। बताया जा रहा है कि शायद वह उसकी मां का हो। हांलाकि बच्ची से रेप और हत्या केे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी का कहना है कि उसने पैंतीस हजार में मां बेटी को खरीदा था।

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  तीन लाख में बलात्कारियों से समझौता

तीन लाख रुपए लेकर दलित परिवार ने अपनी बच्ची के बलात्कारियों से समझौता कर लिया। अबॉर्शन कराना पड़ा था बच्ची का, अन्यथा वो तीन लाख भी नहीं देना पड़ता आरोपियों को। आखिरकार पुलिस खुद मामले तक पहुंच गई।

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ये तो मामले सिर्फ बानगी भर हैं। अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ आरोपी ही दोषी हैं इन सबमें? पूरा समाज और कानून व्यवस्था दोषी है। पर सवाल यह है कि क्या फांसी की सजा देकर बलात्कार जैसे घिनौने अपराध को रोका जा सकता है..क्या मानसिकता बदली जा सकती है... इस सवाल को उठाने का मकसद ये कतई नहीं है कि सजा का प्रावधान फांसी न हो...बिल्कुल हो...लेकिन क्या फांसी की सजा ही अंतिम विकल्प होगा या इस प्रावधान को लागू करके 6 महीने, 8 महीने, 1 साल की बच्चियों के साथ लगातार हो रहे इस घिनौने अपराध पर रोक लग सकेगी। केवल फांसी भर देने से यह नहीं रुकेगा।

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जैसे 1860 में बने इंडियन पीनल कोड में हत्या की सजा फांसी या आजीवन कारावास है, 150 साल से जिस सजा का प्रावधान देश में है और हजारों की संख्या में लोगों को फांसी दी जा चुकी है वहां 100 रुपया से लेकर कार आगे पीछे करने पर हत्याएं की जाती हैं। तो सवाल है कि प्रावधान करके भी क्या आप हत्याओं को रोक सके। निर्भया कांड के बाद देश में बलात्कार को लेकर जनजाग्रति हुई, कानून भी बना, कानून और कठिन भी बना, लेकिन क्या बलात्कार जैसी घटनाओं को रोक जा सका? क्या दुनिया में तमाम देशों में फांसी की सजा का प्रावधान है और है तो क्या वहां बलात्कार जैसा अपराध रोक लिया गया।

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8 महीने की बच्ची के साथ बलात्कार कर रहा मनुष्य, मनुष्य इसलिए कि वो मनुष्य योनी में पैदा हुआ है नहीं तो उसे जानवर भी अपनी योनी का स्वीकार न करें, क्या केवल इस डर से कि उसे फांसी की सजा हो जाएगी, वो ये अपराध नहीं करेगा, जबकि उसके कृत्य को साधारण भी नहीं असाधारण मानसिक असतुंलन के केस से भी ऊपर माना जा सकता है, ऐसे किसी शख्स को फांसी देने से क्या घटनाओं की पुनरावृत्ति खत्म हो जाऐगी?

क्या सरकार कानून लाने से पहले कोई स्टडी करना उचित नहीं समझती कि जिस समाज में वेश्यावृत्ति के लिए सही और उपयुक्त कानून बना है वहां क्या इस तरह के अपराध होते हैं, क्या सरकार को सोचना नहीं चाहिए कि बच्चियों के साथ हैवानियत को रोकने के लिए हर बदलते समाज की अनुरुप अगर कानूनी वैश्यालयों की जरुरत है, तो क्यों न उसे मूर्त रुप देने के लिए आगे कदम बढ़ाये जाएं, समाज वैश्यावृत्ति को घृणित नजर से देखे ये उससे ज्यादा महत्तवपूर्ण है कि बच्चियों से इन दंरिदों को बचाया जा सके।

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अब सवाल ये पैदा होता कि रास्ता क्या है? फांसी न दी जाये तो आखिर बच्चियों को इन दंरिदों से बचाया कैसे जाए। इस सवाल का जवाब खुद देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास है, जिन्होंने पहली बार देश में जनआंदोलन को बनाया और आज उसके परिणाम दिखने को मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री के स्वच्छ अभियान ने देश को कूड़े से मुक्त नहीं कर दिया, न ही हम विकसित देशों की तरह सुन्दर शहरों में तब्दील हो गये, लेकिन उस जनजागरण कार्यक्रम ने आज यह सोचने पर जरुर मजबूर कर दिया है कि यार सड़क पर गंदगी न करो, कूड़ा मत फेंको, पान की पीक दीवारों पर मत मारो, और केवल ये ही नहीं आम मानस के मन में भय बैठ गया है कि ऐसा करने पर शायद कोई देखने वाला शख्स ही न टोक दे।

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सवाल अब ये है कि पीएम मोदी को इसे लेकर कौन सा कानून बनाना पड़ा, भारत की जनता को कब डराना पड़ा, पुलिस और अदालत का भय कब दिखाना पड़ा। देश का जनजागरण करने का इतिहास का सबसे बड़ा कोई मिशन था तो वो स्वच्छता अभियान था। फिर बलात्कार जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ये जनजागरण क्यों नहीं, क्यों न मोदी, सरकार, मंत्री, स्वयसेवी संघटन, अभिनेता अभिनेत्री, ब्यूरोक्रैसी, टीचर स्टूडेंट निकलकर जनजागरण करें और इस घिनौनी घटनाओं को रोकने के लिए समाज में एक लहर पैदा करें।

Web Title: model allegedly molested two men on raod ( Hindi News From Newstimes)


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