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मेघालय से अफस्पा हटा, अरुणाचल में भी बस 8 थाने जद में


NEELAM SHUKLA DEWANGAN 23/04/2018 17:40:42
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New Delhi. केंद्र सरकार ऩे एक बड़ा फैसला करते हुए मेघालय से आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट हटा दिया है. साथ ही अरुणाचल प्रदेश में भी 16 के बजाए केवल 8 पुलिस स्टेशनों में ही अब यह कानून लागू रहेगा। पिछले साल सितंबर 2017 तक मेघालय की 40 प्रतिशत आबादी अफस्पा के अंतर्गत आती थी। इस कानून के तहत सुरक्षाबलों को विशेष अधिकार मिलते हैं, जिसका काफी समय से विरोध किया जाता रहा है। पूर्वोत्तर में तैनात केंद्रीय बलों की जगह भारतीय रिजर्व बटालियन लेगी।

home ministry removed afspa from meghalaya also eight police station effected in arunachalpradesh

केंद्रीय गृहमंत्रालय ने विवादास्पद अफस्पा यानि आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट) को मेघायल से पूरी तरह से हटा दिया है। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने कहा कि अब मेघालय से इस स्पेशल एक्ट को पूरी तरह से हटा दिया है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में भी अफस्पा को कम कर दिया है। जहां 2017 में अरुणाचल प्रदेश में 16 अफस्पा पुलिस स्टेशन थे, वो इस साल घटकर सिर्फ 8 रहे गए हैं। इस कानून के तहत सुरक्षाबलों को विशेष अधिकार मिलते हैं, जिसका काफी समय से विरोध किया जाता रहा है। सितंबर 2017 तक मेघालय के 40 फीसदी क्षेत्र में अफस्पा लागू था। MHA के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार के साथ बातचीत के बाद मेघालय से अफस्पा को पूरी तरह से हटाने का फैसला लिया गया। गृह मंत्रालय ने मार्च 2018 में कहा कि उन्होंने असम, अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में 10 भारतीय रिजर्व बटालियन की तैनाती को मंजूरी दे दी है। पूर्वोत्तर में तैनात केंद्रीय बलों की जगह भारतीय रिजर्व बटालियन लेगी।

गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक यह फैसला 31 मार्च से अमल में आ गया है. इसके अनुसार पूरे मेघालय से इस कानून को हटाया गया है. साथ ही असम के सीमावर्ती इलाकों के 16 पुलिस स्टेशनों और आउटपोस्ट से घटाकर 8 तक सीमित कर दिया गया है. साल 2017 में पूर्वोत्तर में उग्रवादी घटनाएं 37 फीसदी तक घटी हैं और इसी के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने यह फैसला लिया है.पूर्वोत्तर राज्यों में साल 2017 से सुरक्षा के लिए तैनान जवानों की मौत की घटनाओं में 30 फीसद की गिरावट आई है साथ ही आम नागरिकों की मौत के आंकड़े भी 23 फीसद कम हुए हैं. सुदूर इलाकों को जोड़ने के लिए हेलिकॉप्टर सेवा को असम तक बढ़ाने का फैसला भी लिया गया है.गृह मंत्रालय ने बताया कि उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (सोंगबिजीत) का असर भी कम हुआ है. हिंसा की घटनाओं पर लगाम लगाने के ऑपरेशन में (NDFB-S) के 63 काडर निष्क्रिय हुए हैं और इनमें में 1000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. दिसंबर 2014 से मार्च 2018 के बीच हुए ऑपरेशन में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं.इलाके में सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने इसी साल मार्च में 10 रिजर्व बटालियन बनाने की घोषणा की थी. इसमें असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और त्रिपुरा के लिए दो-दो बटालियन निर्धारित की थीं. इन नई बटालियन के खर्च में आने वाली लागत का 75 फीसदी और इनके लिए आधारभूत सुविधाएं बनाने में आने वाली लागत का 50 फीसदी केंद्र सरकार वहन करेगी.

क्या है अफस्पा?

आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर्स ऐक्ट सेना को जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के विवादित इलाकों में सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार देता है। इस ऐक्ट को लेकर काफी विवाद है और इसके दुरुपयोग का आरोप लगाकर लंबे समय से इसे हटाने की मांग की जाती रही है। AFSPA का सेक्शन 4, सुरक्षाबलों को किसी भी परिसर की तलाशी लेने और बिना वॉरंट किसी को गिरफ्तार करने का अधिकार देता है। इसके तहत विवादित इलाकों में सुरक्षाबल किसी भी स्तर तक शक्ति का इस्तेमाल कर सकते हैं। संदेह होने की स्थिति उन्हें किसी गाड़ी को रोकने, तलाशी लेने और उसे सीज करने का अधिकार होता है। सुरक्षाबलों का कहना है कि सबसे पहले 1958 में पूर्वोत्तर में विद्रोहियों से निपटने के लिए संसद की तरफ से लागू किया गया AFSPA जवानों को जरूरी अधिकार देता है। उनके मुताबिक इस कानून की मदद से काफी खतरनाक स्थितियों में आतंकी या दूसरे खतरों से जूझ रहे जवानों को कार्रवाई में सहयोग मिलने के साथ-साथ सुरक्षा भी मिलती है।

एक अन्य निर्णय में गृह मंत्रालय ने पूर्वोत्तर में विद्रोहियों के लिए आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति के तहत 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये तक सहायता राशि कर दी है। सरकार की यह नई पॉलिसी 1 अप्रैल, 2018 से लागू होगी। सरकार ने मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड जाने वाले विदेशियों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट और संरक्षित क्षेत्र परमिट में थोड़ी ढीलाई बरती है। हालांकि, पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान जैसे देशों के लिए अभी इस क्षेत्र में प्रतिबंध जारी रहेगा। आपको बता दें कि पिछले 4 वर्षों में क्षेत्र में उग्रवाद से संबंधित घटनाओं में 63 फीसदी की गिरावट देखी गई है। गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 2017 में नागरिकों की मौत में 83 फीसदी और सुरक्षा बलों के हताहत होने के आंकड़े में 40 फीसदी की कमी आई है। वर्ष 2000 से तुलना की जाए तो 2017 में पूर्वोत्तर में उग्रवाद संबंधी घटनाओं में 85 फीसदी की कमी देखी गई है। वहीं, 1997 की तुलना में जवानों की मौत का आंकड़ा भी 96 फीसदी तक कम हुआ है।

इसके साथ ही सरकार ने विदेशी नागरिकों की यात्रा को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड जानेवाले विदेशियों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र के परमिट और संरक्षित क्षेत्र के परमिट में ढील दे दी है। हालांकि ये पाबंदी कुछ देशों के लिए जारी रहेगी, जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन शामिल हैं।

Web Title: home ministry removed afspa from meghalaya also eight police station effected in arunachalpradesh ( Hindi News From Newstimes)


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