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कासगंज के बाद हरियाणा हिंसा? धर्म के नाम पर सियासी रोटियां सेंकने की तैयारी!


ANKIT RASTOGI 01/05/2018 12:24 PM
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New Delhi. बीते दिन 30 अप्रैल, सोमवार को हरियाणा के गुरुग्राम में साम्प्रदायिकता को लेकर बड़ा बखेड़ा पनपता नज़र आया। यहां संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के बैनर तले कई संगठनों ने मिलकर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ उठाई। उन्होंने एक सुर में खुले में नमाज़ का विरोध किया उन्होंने सरकार से खुले में नमाज पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं इसके विपरीत मुस्लिम समाज ने हिंदू संगठनों पर उनकी नमाज में बाधा डालने का आरोप लगाया है।

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 Haryana violence after Kasganj

खुले में नमाज पर विरोध...

खुले में नमाज के खिलाफ आवाज उठाते हुए प्रदर्शन करने वाले संगठनों ने धमकी दी कि यदि इस मामले में सुनवाई नहीं की गई तो शुक्रवार को सड़क पर उतर कर इसके खिलाफ अपनी आवाज को और भी बुलंद तरीके से पेश करेंगे।

हिंदू संगठनों का आरोप है कि शुक्रवार के दिन खुले में पढ़ी जाने वाली नमाज गैर कानूनी ढंग से जमीन कब्जियाने की एक शुरुआत है।

देश विरोधी नारे लगाने का आरोप...

इतना ही नहीं उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नमाज के दौरान मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगो ने खुले में देश विरोधी बातें की। साथ ही यहां ‘भारत विरोधी’ और पाकिस्तान के समर्थन में नारे भी लगाये गए।

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कासगंज में भी इन्ही मुद्दों पर भड़की थी हिंसा...

 Haryana violence after Kasganj

बता दें इससे पहले बीते जनवरी माह में उत्तर प्रदेश के कासगंज में भी गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा यात्रा के दौरान इसी तरह का साम्प्रदायिक मुद्दा सामने आया था।

इस दौरान वहां हिंदू-मुस्लिम बवाल ने हिंसक रूप ले लिया था, जो काफी समय तक चर्चा में रहा। इसकी आंच अभी भी इलाके में ज़िंदा है। इस हिंसा में चंदन गुप्ता की मौत होगी थी।

ये है गुरुग्राम का पूरा मामला...

खबरों के मुताबिक़ गुरुग्राम के सेक्टर 53 इलाके में 20 अक्टूबर को एक खाली प्लॉट पर कुछ लोग नमाज पढ़ रहे थे। आरोप है कि 6 लोगों ने इनकी नमाज पढ़ने के दौरान हंगामा किया और उन्हें वहां से जाने को कहा। बाद में घटना का वीडियो वायरल होने के बाद आरोपियों पर पुलिस ने एक्शन लिया था।

प्रदर्शन करने वाले संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने यह भी धमकी दी है कि वह खुले में नमाज रोकने के लिए शुक्रवार को सड़क पर उतरेंगे।

वहीं, सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे करीब 50 प्रदर्शनकारी शहर के कमला नेहरू पार्क में इकट्ठे हुए। यहां से उन्होंने मिनी सचिवालय तक मार्च निकाला।

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हिंदू संगठनो ने सीएम को लिखा पत्र...

इसके बाद, प्रदर्शनकारियों ने सीएम मनोहर लाल खट्टर को लिखी गई एक चिट्ठी डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप सिंह को सौंपी।

चिट्ठी में प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सेक्टर 53 में शुक्रवार को पढ़ी जाने वाली नमाज गैरकानूनी ढंग से जमीन कब्जाने की शुरुआत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नमाजियों ने वहां भारत विरोधीऔर पाकिस्तान के समर्थनमें नारे लगाए।

नमाज के नाम पर जमीन कब्जियाने की कोशिश?

 Haryana violence after Kasganj

संगठन ने अपनी चिट्ठी में आरोप लगाया है, ‘बीते डेढ़ महीने से कुछ लोग गुड़गांव के वजीराबाद स्थित एक जमीन के टुकड़े पर नमाज पढ़ रहे हैं। उनका मकसद इस पर अवैध ढंग से कब्जा करना है।

हिंदुस्तान मुर्दाबादऔर पाकिस्तान जिंदाबादके नारों की वजह से वहां का माहौल खराब हो रहा है। जब कुछ देशभक्त युवकों ने उन्हें ऐसा करने से रोका तो पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की।

क्या जय श्री रामऔर वंदे मातरमबोलना अपराध है, जिसकी वजह से युवाओं को गिरफ्तार किया गया?’ वहीं, बताई गई जगह पर बीते 10 साल से नमाज पढ़ने वालों ने आरोपों को खारिज किया है।

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मुस्लिम समुदाय ने खारिज किये आरोप...

मामले में शिकायतकर्ता और नेहरू युवा संगठन वेल्फेयर सोसाइटी चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रमुख वाजिद खान ने कहा, ‘हम नमाज पढ़ते वक्त एक दूसरे से बात भी नहीं करते। नारे लगाने का तो सवाल ही नहीं उठता। ये सब झूठे आरोप हैं।

उधर, प्रदर्शन करने वाले संगठन की चिट्ठी में लिखा है, ‘गुरुग्राम में रह रहे रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों की पहचान होनी चाहिए। उन्हें हिंदू कॉलोनियों, सेक्टरों और पास-पड़ोस में नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

इस तरह की इजाजत केवल उन जगहों पर दी जानी चाहिए जहां इनकी आबादी 50 पर्सेंट से ज्यादा हो। अगर ऐसा नहीं हुआ तो शांति भंग का खतरा बना रहेगा।

वायरल वीडियो की ये है कहानी...

बता दें कि पिछले महीने 20 अप्रैल को खाली प्लॉट पर नमाज शुरू होने से ठीक पहले कुछ लोग मौके पर पहुंचे थे। घटना से जुड़े वीडियो में दिखता है कि इन लोगों ने जय श्री रामऔर राधे-राधेके नारे लगाए। साथ ही वहां आए लोगों को जाने के लिए कहा। बीते हफ्ते इस मामले में केस दर्ज हुआ। आरोपियों की पहचान अरुण, मनीष, दीपक, रोहित, रवींदर और मोनू के तौर पर हुई है।

ये सभी वजीराबाद और कन्हाई गांवों के रहने वाले हैं। इन्हें रविवार को जमानत मिल गई थी। उधर, प्रदर्शन करने वाले संगठनों में से एक बजरंग दल के जिलाध्यक्ष अभिषेक गौर ने चेतावनी दी, ‘हमने जिला प्रशासन से दरख्वास्त की है कि खुले में नमाज पर रोक लगाई जाए।

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अगले शुक्रवार बवाल की आशंका...

हम टीम बनाकर इस शुक्रवार को नजर रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि सरकारी जमीनों पर गैरकानूनी ढंग से खुले में नमाज न पढ़ी जा सके।

ये है कासगंज हिंसा का मामला...

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इससे पहले कासगंज में भी 26 जनवरी को तिरंगा यात्रा को साम्प्रदायिक मुद्दा बना दिया गया था। यहां हिंसा में चंदन गुप्ता की मौत हो गई थी।

इसके साथ ही सोशल मीडिया पर चंदन की मौत की चर्चाओं के साथ एक और युवा राहुल उपाध्याय की हिंसा में मौत होने का प्रचार किया जा रहा था, जो बाद में झूठा साबित हुआ।

ट्विटर और फ़ेसबुक पर राहुल की तस्वीर शेयर की जाने लगी। उन्हें 'शहीद' करार देने वाले पोस्ट लिखे जाने लगे। लेकिन कुछ देर बाद ही असलियत लोगों के सामने आ गई जब राहुल उपाध्याय ने खुद थाने पहुंचकर अपने ज़िंदा होने का सबूत पेश किया।

घटना के वक्त राहुल उपाध्याय अलीगढ़ में अपने गांव नगला खानजी में थे। सोशल मीडिया पर फैल रहे अफवाह की जानकारी उन्हें जान-पहचान के लोगों से मिली।

इसके बाद सोशल मीडिया पर एक और अफवाह फैलाई गई कि एक हिंदू ने ही चंदन गुप्ता पर गोली चलाई थी। सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया कि मृतक पर गोली चलाने वाले का नाम कमल सोनकर था।

धीरे-धीरे अफवाह सोशल मीडिया के ज़रिए उत्तर प्रदेश के तनावग्रस्त क्षेत्रों में पहुंच गई। कासगंज के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह ने इसे महज एक अफवाह बताया था और कहा था कि पुलिस अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। जांच के बाद की यह स्पष्ट हो पाएगा।

राहुल ने बताया, "मुझे समझ में आ गया था कि कुछ लोग दंगा भड़काने के लिए मेरा इस्तेमाल किया। कहा जा रहा था कि हिंदुओं को मारा जा रहा है। मैं तुरंत ही पुलिस स्टेशन गया और सारी बातें बताई।"

घटना के बाद यह भी बात सामने आई कि भीड़ के एक पक्ष ने पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए। यह भी दावा किया गया कि इसके बाद ही तिरंगा यात्रा ने हिंसक रूप ले लिया।

हालांकि कासगंज के डीएम आरपी सिंह का कहना था कि 'इस बात में कितनी सत्यता है, ये बताया नहीं जा सकता। अभी तक इस बात का कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया है।

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गुरुग्राम बवाल में सियासी एंगल...  

अब गुरुग्राम में भी ऐसा ही कुछ माहौल बनता हुआ जान पड़ रहा है। एक बार फिर देश विरोधी नारों का जिक्र किया जाने लगा है।

‘हिन्दुस्तान मुर्दाबाद’ और पाकिस्तान जिंदाबाद की बात कही जा रही है। हालांकि बात में कितनी सत्यता है इस बात का अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ।

मामले में यह भी आशंका जताई जा रही है कि हो सकता है कि इस मामले को सियासी दांव-पेंच के तहत हवा दी जाने की कोशिश की जा रही है।

दोनों ही पक्ष खुद को सही और दूसरे को गलत ठहराने का भरसक प्रयास करने में जुटे हैं। इसलिए सरकार को इस मामले में बेहद ही सतर्कता के साथ जांच करानी चाहिए कि असल मामला है क्या?

Web Title: Haryana violence after Kasganj ( Hindi News From Newstimes)


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