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खुलासा : डाटा लीक मामले में निशाने पर एनालिटिका, कर रही बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी


ANKIT RASTOGI 03/05/2018 13:21:18
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London. फेसबुक के बाद ट्विटर के डाटा लीक होने के मामले में भी राजनीतिक विश्लेषक फर्म कैंब्रिज एनालिटिका का नाम आने की वजह से कंपनी ने एनालिटिका को बंद करने का फैसला लिया है।

कंपनी का कहना है कि हमारे सभी कर्मचारियों ने पूरी इमानदारी के साथ काम किया। लेकिन जिस तरह से मीडिया ने कंपनी की निगेटिव इमेज को लोगों के सामने प्रेजेंट किया, उससे कंपनी की इमेज पर गहरा असर पड़ा।

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Anatilica doing the bore-bed adjustment

मौजूदा हालातों को देखते हुए कंपनी को बंद कर देना ही बेहतर फैसला होगा। क्योंकि निगेटिव इमेज बन जाने के कारण कंपनी पर लोगों का भरोसा कम हुआ।

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  नहीं पडेगा हो रही जांच पर फर्क...

हालांकि कंपनी ने यह भी साफ़ किया कि एनालिटिका के बंद हो जाने से हो रही जांच पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा।

खबरों के मुताबिक़ कंपनी ने बयान जारी कर कहा, "कैंब्रिज एनालिटिका के भरोसे के बावजूद हमारे कर्मचारियों ने नैतिक और कानूनी रूप से सही होकर काम किया। लेकिन मीडिया के गलत कवरेज से हमारे कस्टमर्स और सप्लायर्स दूर होते चले गए।"

"नतीजतन हमने फैसला लिया है कि अब एनालिटिका का कारोबार लंबे समय तक चलाना मुश्किल होगा।"

फेसबुक ने कहा था कि करीब 8 करोड़ 70 लाख लोगों के डेटा तक एक ऐप के जरिए पहुंच बनाई गई। बाद में इसे एक राजनीतिक सलाह देने वाली कंपनी को दे दिया गया। सोशल नेटवर्किंग साइट ने ये भी कहा कि उनकी खुद की जांच जारी रहेगी।

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, "इस फैसले से हमारी प्रतिबद्धताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हम भरोसा दिलाते हैं कि ऐसा दोबारा नहीं होगा।"

"हमारी पेरेंट कंपनी एससीएल इलेक्ट्रॉनिक्स भी दिवालिया घोषित हो चुकी है। इससे भारत के ऑपरेशंस पर भी असर पडे़गा।"

बता दें एनालिटिका की जांच ब्रिटेन की संसदीय समिति कर रही है। समिति के अध्यक्ष डेमियन कॉलिंस ने कहा, "कंपनी ने जो किया, उसके लिए उनकी गंभीर जांच हो रही है। अगर एनालिटिका ने खुद के बंद करने का फैसला किया है तो भी जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा।"

एनालिटिका पर 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प को फायदा पहुंचाने के भी आरोप लगे। हालांकि ट्रम्प की कैंपेन टीम ने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने कैंब्रिज एनालिटिका की कोई मदद ली थी।

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इससे पहले हाल ही में खबर आई फेसबुक के बाद अब माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर का भी नाम डाटा लीक मामले में जुड़ गया है। इस कारण एक बार फिर लोगों के दिलों की धड़कने बढ़ती नज़र आ रही हैं।

निजी डाटा के लीक होने की टेंशन तो लोगों के लिए चिंता का सबब है ही, लेकिन कहीं न कहीं इस बात की चिंता लोगों में समाई हुई है कि आखिर उनकी निजी जानकारी हासिल करने के बाद कैंब्रिज एनालिटिका जैसी कंपनियां करती क्या हैं?

साफ़ है कि इस तरह कि कंपनियां आपके डाटा का उपयोग अपने फायदे के लिए ही करते हैं। वरना आपकी निजी जानकारी से भला उन्हें क्या मिलने वाला।

दरअसल अभी तक की जानकारी से यह बात साफ़ होती है कि सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े लोगों के डाटा को सेव कर चुनावी प्रक्रिया को पूरा करने का काम किया जाता है।

बता दें एनालिटिका जैसी कंपनिया यूजर्स के डाटा को हासिल करके चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और भविष्य में लोगों की सोच को बदलने का काम करती हैं।

डाटा का इस्तेमाल राजनीति को लेकर लोगों की सोच जानने के लिए किया जाता है। इसके तहत उनके सामने सोशल मीडिया पर ऐसा कंटेंट परोसा जाता है। जिसके माध्यम से लोग अपनी चहेती पार्टी या फिर किसी बड़े नेता की लोकप्रियता से प्राभावित दिखते हैं।

इसके बाद शुरू होता है असल गेम। आपकी सोच-समझ को बदलने का खेल पूरी प्लानिंग के तहत किया जाता है। आपके सामने चीजों को इस तरह से प्रेजेंट किया जाता है कि लोग इस एहसास से भी परे रह जाते हैं कि उनका माइंड वाश करने का काम बड़ी सफाई के साथ किया जा रहा है।

मामले में डाटा फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका के एक स्पोक्सपर्सन का कहना है कि कंपनी ने ट्विटर का इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक विज्ञापनों के लिए किया है।

एनालिटिका ने दावा किया कि उसने जीएसआर के साथ ट्विटर डाटा शेयर करने के लिए कभी कोई प्रोजेक्ट नहीं लिया ना ही कंपनी को जीएसआर से कोई डाटा मिला है।

स्पोक्सपर्सन के मुताबिक, कैम्ब्रिज एनालिटिका सिर्फ एक डाटा फर्म है और किसी के राजनीतिक विचार बनाने में इसका कोई हाथ नहीं है।

आरोप ये लगाया जा रहा है कि फेसबुक की तरह ही ट्विटर ने ब्रिटिश डाटा फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका (सीए) को 2015 में यूजर्स का डाटा बेचा था।

वहीं ट्विटर ने लगाए जा रहे सभी आरोपों को एक सिरे से दरकिनार करते हुए लीक मामले से अपना पल्ला झाड़ने वाला बयान दे दिया है।

लगाये जा रहे आरोपों पर ट्विटर के स्पेक्सपर्सन का कहना है कि माइक्रो ब्लॉगिंग साइट का कैम्ब्रिज एनालिटिका से कोई संबंध नहीं है।

यहां तक ट्विटर एनालिटिका के किसी भी अकाउंट के विज्ञापन को साइट में जगह नहीं देती। साइट ने ये फैसला कैम्ब्रिज एनालिटिका की पॉलिसी विरोधी गतिविधियों की वजह से लिया है।

Web Title: Anatilica doing the bore-bed adjustment ( Hindi News From Newstimes)


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