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एक फोन काल ने छीन ली परिवार की खुशियां, सीएम ने भी नहीं ली दुखियारों की सुध


SHUBHENDU SHUKLA 08/05/2018 21:26:08
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Lucknow. शहीदों की चिताओं पर हर बरस लगेंगे मेले। कभी यही हरफें शहीदों का मान बढ़ाया करती थी लेकिन अब शायद ऐसा नहीं है। देश की गन्दी राजनीति ने शहीदों को भी सूली पर चढ़ा दिया और अब हालात यह हो चुके है कि शहीदों की कब्र पर उनके अपनों के सिवा आसूं बहाने वाला भी कोई नहीं बचा। जो हम दिखाने जा रहे है वो गन्दी राजनीति की एक नज़ीर भर है।

The martyr was killed in the encounter, three days later still the CM Yogi did not meet the relatives

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राजधानी में जानकीपुरम के अजनहर गांव के रहने वाले बीएसएफ में तैनात वीर जवान अब इस दुनिया में नहीं है। जवान के घर आये एक फोन कॉल ने उसके परिवार की खुशिया पल भर में ही छीन ली। सपूत के शहीद होने के तीन दिन बाद भी परिजनों से मिलने न तो सीएम पहुंचे और न ही कोई जनप्रितिनिधि।

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  मुठभेड़ में शहीद

श्रीनगर में बीएसएफ में तैनात अवदेश सिंह के घर तीन दिन पहले आधी रात के बाद एक फोन आया था और फोन करने वाले ने कहा कि अवदेश आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए। हैरान करने वाला पहलू यह है कि जवान को शहीद हुए तीन दिन हो चुके है और उसके पार्थिव शरीर की राह देखते हुए परिजनों की आँखे भी पथरा गई लेकिन शव आज भी उसके घर नहीं पंहुचा। और तो और परिवार का एक मात्र कमाने वाले वीर सपूत के शहीद होने के तीन दिन बाद भी कोई भी जनप्रितिनिधि उनके घर नहीं पहुंचा। 

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  राजनीति में व्यस्त नेता

आमतौर पर शहीदों की राजनीति करने वाले बड़े - बड़े नेताओं ने भी राजधानी के इस शहीद के परिवार की सुध नहीं ली। अपने लाल को खो चुका यह परिवार भी हैरान और परेशान है कि गम का पहाड़ टूटने के बाद भी उनके परिवार वालों के लिए किसी के पास समय नहीं है। जब शहीद के परिवार को राजधानी में यह हाल है तो और का क्या हाल होगा। वजह कोई भी हो लेकिन शहीद के परिजनों को न्याय की दरकार है।  

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