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फ्लिपकार्ट और वॉलमार्ट की डील पर मोदी सरकार मौन, आरएसएस डील के खिलाफ


NEELAM SHUKLA DEWANGAN 11/05/2018 16:19:26
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New Delhi. भारतीय ट्रेडर्स द्वारा इस डील का विरोध और तेज हो गया अमरीकी कम्पनी वॉलमार्ट के भारतीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट में 77 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का विरोध अब और जोर पकड़ रहा है.अब इस विरोध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आनुषांगिक संगठन स्वदेशी जागरण मंच भी उतर चुका है।

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फ्लिपकार्ट और वालमार्ट के बीच हुई डील को लेकर देश के व्यापारियों में काफी चिंता का माहौल है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आनुषांगिक संगठन स्वदेशी जागरण मंच भी इसका विरोध कर रही है. इस बीच चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंड्स्ट्री(सीटीआई) ने मोदी सरकार से सवाल किया है कि आखिर मोदी सरकार इस डील को लेकर चुप क्यों है? सीटीआई के संयोजक बृजेश गोयल व हेमंत गुप्ता का कहना है कि मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई को मंजूरी नहीं मिली है। यही कारण है कि वालमार्ट ईकॉमर्स के माध्यम से देश में पैर रखने जा रही है।

मोदी सरकार से सवाल इस वजह से पूछा जा रहा है कि जब बीजेपी सत्ता से बाहर थी तो यूपीए सरकार द्वारा मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई को मंजूरी देने के प्रस्ताव पर बीजेपी ने ही जमकर विरोध जताया था और वालमार्ट का जमकर विरोध किया था। सीटीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप गुप्ता और महासचिव रमेश आहूजा ने बताया कि हम केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु को इस संबंध में एक पत्र भी लिख रहे हैं। पत्र का विषय है कि क्या उन्हें इस डील की सभी जरुरी जानकारी है। क्या इस डील में सभी कानूनी पहलुओं का पालन किया गया है? इसके अलावा ईकॉमर्स से संबंधित नियमों की जानकारी भी मांगी गई है। इसके अलावा इनकम टैक्स व तमाम राज्यों के टैक्स विभागों को भी पत्र लिखते हुए यह जानकारी मांगी गई है कि ईकॉमर्स साइट्स पर किस तरह के टैक्स नियम लागू होते हैं।

साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषांगिक संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने इसका विरोध किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में अमेरिकी खुदरा कंपनी वॉलमार्ट द्वारा प्रमुख भारतीय ऑनलाइन परिचालक फ्लिपकार्ट में 77 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 16 अरब डॉलर ( 1.05 लाख करोड़ रुपये) में खरीदने को अनैतिक और राष्ट्रहित के खिलाफ बताया है. मंच का दावा है कि अमेरिकी रिटेल कंपनी मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी मेक इन इंडिया अभियान को मार देगी.

प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे पत्र में स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि संघ और मोदी की बीजेपी के साथ सर्वसम्मति थी कि मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश उद्यमशीलता और रोजगार पैदा करने के अवसरों को मार डालेगा’, जोकि किसान विरोधीहै और इसलिए इसे अनुमति नहीं दी जा सकती. मंच ने कहा है कि आश्चर्यजनक रूप से वॉलमार्ट नियमों को धता बताते हुए भारतीय बाजार पर हमला करने के लिए ई-कॉमर्स के रास्ते का उपयोग कर रहा है. ये बात नोट की जानी चाहिए कि दुनिया में कहीं भी, वॉलमार्ट का कोई मार्केट प्लेस मॉडल नहीं है.

मंच ने कहा है कि वे बड़े भारी मन से पीएम मोदी को पत्र लिख रहे हैं और गुजारिश करते हैं कि वे हस्तक्षेप करेंगे. दूसरे देशों के अनुभवों और वॉलमार्ट, कास्को के उदाहरण के जरिए मंच ने मल्टी नेशनल कंपनियों द्वारा घरेलू कंपनियों के अधिग्रहण के इतिहास का भी जिक्र किया है. पत्र में चेताया गया है कि खतरा अब दरवाजे पर खड़ा है और बाजार में भारी उथल पुथल मच सकती है. इसके साथ ही पत्र में लघु और मध्यम व्यापार, छोटी दुकानें और ज्यादा से ज्यादा रोजगार पैदा करने के मौके के खत्म होने की भविष्यवाणी भी की गई है. मंच ने कहा है, हमें विश्वास है कि आप हस्तक्षेप करेंगे और ये सुनिश्चित करेंगे कि आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति का हित सुरक्षित रहे. स्वदेशी जागरण मंच के सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि ये अधिग्रहण ई-कॉमर्स के जरिए मल्टी ब्रैंड रिटेल सेक्टर में मल्टी नेशनल कंपनियों की एंट्री साबित होगा.

आपको बता दें कि वैश्विक स्तर पर छह बड़े देशों के बाद वॉलमार्ट चीनी सामानों का सबसे आयातक है, और उसका नंबर सातवां है. यह सौदा 1 लाख करोड़ रुपए का रहा. इसके साथ ही भारतीय ट्रेडर्स द्वारा इस डील का विरोध और तेज हो गया है. इसका विरोद करने वाले ट्रेडर्स का कहना है कि वॉलमार्ट ऑनलाइन मार्कीट के जरिए देश के ऑफलाइन बाजार में उतरेगी, जिससे छोटे रिटेलर्स का धंधा चौपट हो जाएगा. ताज्जुब इस बात को लेकर है कि मोदी सरकार इतनी बड़ी डील पर खामोश क्यों है? जबकि यह सबको समझ आ रहा है कि एफडीआई के नियमों को धत्ता बताते हुए वालमार्ट देश में आने जा रहा है। आखिर क्यों देश के छोटे व मझोले व्यापारियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है?

Web Title: flipkart sold to walmart, rss upset with modi government ( Hindi News From Newstimes)


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