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करीब आए अखिलेश-माया, सीबीआई ने शुरू की जांच !


RAJNISH KUMAR 11/05/2018 17:21 PM
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Lucknow. केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार को घेरने की रणनीति बनाने की कोशिश में जुटीं बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती पर सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है। सीबीआई ने इस मामले में दस्तावेजों की समीक्षा करनी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि जल्द ही मायावती के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है। बता दें कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री योगी ने मायावती के कार्यकाल में 21 चीनी मिलों की बिक्री मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।

Cbi Investigation start against mayawati

सीएजी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट 2012 में सरकार को सौंप दी थी, लेकिन अखिलेश सरकार ने इस घोटाले पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर नवंबर 2017 में गोमती नगर थाने में चीनी घोटाले मामले की एफआईआर दर्ज करायी गई। इसमें दो कंपनियां, नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और गिरियासो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चीनी मिलें खरीदे जाने की बात कही गई है। सरकार की जांच में ये दोनों कंपनियां फर्जी पाई गईं। नम्रता मार्केटिंग के हिस्से चार मिलें और गिरियासो के हिस्से तीन चीनी मिल आए थे। यही नहीं इसमें मनमाने तरीके से कुछ और कंपनियों को फायदा पहुंचाने की बात कही गई है। जिन कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया, उनमें वेव इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है।

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योगी सरकार ने चीनी मिल घोटाले को लेकर 12 अप्रैल, 2018 को सीबीआई को पत्र लिखा। इस पत्र में कहा कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर बनायी गयी बोगस कंपनियों को प्रदेश की 21 चीनी मिलें बेच दी गईं, इनमें देवरिया, बरेली, लक्ष्मीगंज, हरदोई, रामकोला, छितौनी और बाराबंकी की बंद पड़ी सात चीनी मिलें भी शामिल हैं।

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मायावती सरकार के पूर्व मंत्री और उनके करीबी सहयोगी रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पिछले साल दावा किया था कि चीनी मिलों को उस समय की मुख्यमंत्री मायावती और बसपा के महासचिव सतीश मिश्रा के निर्देशों पर बेचा गया था। हालांकि राजनीतिक दल इसे सियासी दुश्मनी बताते हुए कार्रवाई की बात कर रहे हैं।

  चुनाव आ गए तो सीबीआई भी आ रही है: अखिलेश

प्रदेश की योगी सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश सीएजी की रिपोर्ट के आधार पर की है, लेकिन सियासी गलियारों में ये सवाल उठ रहे हैं कि कहीं इस जांच का मकसद बसपा मुखिया मायावती पर दबाव बनाना तो नहीं है? या सीबीआई के डर से महागठबंधन को रोकने की कोशिश तो नहीं है? हालांकि गुरुवार को अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती का बचाव करते हुए कहा था, चुनाव आ गए तो सीबीआई भी आ रही है।

  मायावती के शासनकाल में 21 चीनी मिलें बेची गई थीं

गौरतलब है कि बहुजन समाज पार्टी की सरकार ने 2007 में 21 सरकारी चीनी मिलों के निजीकरण का फैसला लिया था। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, 2010-11 में हुए इस सौदे में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। रिपोर्ट में बताया गया कि चीनी मिलों की नीलामी से सरकार को कुल 1179.84 करोड़ का नुकसान हुआ।

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मायावती के शासनकाल में 21 चीनी मिलें बेची गई थीं, लेकिन सबसे खास बात यह है कि इनमें से 10 ऐसी चीनी मिलें थीं, जो उस समय चालू हालत में थीं। यही नहीं, सरकार ने बंद पड़ी 11 मिलों को कौड़ियों के दाम बेचा और चालू मिलों को भी औने-पौने दाम पर बेच दिया था।

Web Title: Cbi Investigation start against mayawati ( Hindi News From Newstimes)


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