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सोनिया गांधी के इन पांच बड़े चतुराई भरे फैसलों ने गिरा दी येदियुरप्पा सरकार


UMENDRA SINGH 19/05/2018 18:43 PM
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New Delhi. कर्नाटक का राजनीतिक दंगल बीएस येदियुरप्पा के इस्तीफे के एलान का साथ शनिवार को खत्म हो गया। येदियुरप्पा सिर्फ ढाई दिन के मुख्यमंत्री बन सके और अपना बहुमत साबित नहीं कर सके। इसके बाद उनको इस्तीफा सौंपना पड़ा। आपको बता दें कि भाजपा की हार और कांग्रेस की जीत में जो सबसे बड़ी वजह थी वो थी कांग्रेस की मंझी नेता सोनिया गांधी के वो 5 फैसले जिन्होंने पूरी तस्वीर ही पलटकर रख दी। आइए जानते हैं उन फैसलों को जिन्होंने कांग्रेस के सिर जीत का सेहरा बांध दिया।

sonia gandhi on karnataka

   पहला फैसला: नतीजों के इंतजार के बिना जोड़तोड़ शुरू

कांग्रेस संरक्षक सोनिया का पहला बड़ा कदम रहा दूरदर्शिता जिसकी राजनीति में बहुत जरूरत होती है। आपको याद होगा जब 15 मई को कर्नाटक के चुनाव नतीजे आ रहे थे। भाजपा अपनी सीटों पर जीत और हार की गणित लगा रही थी लेकिन सोनिया गांधी ने नतीजों से पहले ही जोड़तोड़ शुरू कर दी थी। नतीजे पूरे आए भी नहीं थे कि सोनिया ने जेडीएस के साथ गठबंधन का एलान भी कर दिया था।

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   दूसरा फैसला: कुमारस्वामी को साधने के लिए माया को साधा

सोनिया का दूसरा बड़ा फैसला रहा जनता दल सेक्यूलर के प्रमुख कुमार स्वामी को मनाने के लिए बड़ी योजना बनाना। कांग्रेस और जेडीएस ने एक दूसरे का विरोध कर कर्नाटक का चुनाव लड़ा था। हालांकि हालात बदले तो सोनिया गांधी ने नया रास्ता निकाला। उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती को कुमार स्वामी को मनाने के लिए साथा। बसपा-जेडीएस ने मिलकर चुनाव लड़ा था। सोनिया का यह पैतरा भी काम कर गया।

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   तीसरा फैसला: विधायकों को टूटने न देने से बचाने के लिए बनाई बड़ी योजना

सोनिया गांधी का तीसरा बड़ा कदम रहा उनका वो आदेश जो उन्होंने राहुल गांधी को दिया था। उन्होंने साफ कह दिया था कि कांग्रेस के 78 विधायकों को किसी भी कीमत पर बचाया जाये। उन्होंने ही कहा था कि सबको रिजॉर्ट में ले जायें। इस बीच जब विधायकों को तोड़ने की खबरें आईं तो सोनिया ने कांग्रेस के बड़े नेताओं को आदेश देकर विधायकों को वहां से हटवा ही दिया और कोई भी विधायक टूट नहीं पाया।

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   चौथा फैसला: 15 दिन के समय को 24 घंटे में बदलवा देना

सोनिया गांधी का चौथा फैसला सबसे बड़ा रहा। इस फैसले के लिए उनकी सक्रियता की जितनी तारीफ की जाये कम है। 16 मई को रात 8.30 बजे राज्‍यपाल वजुभाई वाला ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया और 15 दिन में बहुमत सिद्ध करने को कहा। हालांकि सोनिया ने उसी रात अपने सीनियर नेताओं को रात 12 बजे सुप्रीम कोर्ट भेज दिया और 15 दिन के समय को 24 घंटे में बदलवा दिया। अगर येदियुरप्पा को 15 दिन का समय मिल गया होता तो यकीनन तस्वीर कुछ और ही होती।

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   पांचवा फैसला: भाजपा की लंच पॉलिटिक्स भी कर दी फेल

सोनिया का पांचवा फैसला सबसे बड़ा और निर्णायक रहा। उनको खबर मिली थी कि विधानसभा में लंच के समय भाजपा कांग्रेस के विधायकों से संपर्क कर उनको मना सकती है। इसलिए सोनिया ने पहले ही कमर कस ली और निर्देश दे दिये कि कोई भी लंच करने नहीं आयेगा। विधायकों को उनके कमरों में ही लंच के पैकेट भेज दिये गये। इसने भाजपा की लंच पॉलिटिक्स को फेल कर दिया।

Web Title: sonia gandhi on karnataka ( Hindi News From Newstimes)


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