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कैराना उपचुनाव: अखिलेश और मायावती फैक्टर, बनी थी ये खास रणनीति, अब 2019 का...


SHUBHENDU SHUKLA 31/05/2018 23:56:29
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Lucknow. लोकसभा चुनाव 2019 में विजय पताका फहराने की दृष्टि से अहम माने जा रहे यूपी में कैरान उपचुनाव के परिणामों से बीजेपी की बोलती बंद हो गई है। राष्ट्रीय लोकदल, सपा और बसपा के गठबंधन ने बदलती राजनीति की ओर संकेत किया है। कर्नाटक के बाद कैराना उपचुनाव जीतने के लिए बीजेपी ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने रैलियां की तो केशव मौर्या कैराना में ही डटे रहे। लेकिन मायावती और अखिलेश यादव की बनी खास रणनीति के सामने बीजेपी धराशाई हो गई। हैरान कर देने वाली बात है कि बसपा सुप्रीमो मायावती और अखिलेश यादव ने घर बैठे ही यह जता दिया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में वह भारी पड़ेंगे। 

Akhilesh Mayawati strategy wins in Karaana by-election

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  जनता का रुझान 

कर्नाटक चुनाव के बाद ही मायावती ने अनुमान लगा लिया था कि उनकी रणनीति यूपी में भी सफल होगी। इसके लिए अखिलेश और मायावती ने बेंगलुरु के होटल में लंबी वार्ता कर खास रणनीति बनाई थी। दोनों ही कैराना प्रचार करने नहीं गए। लेकिन बीजेपी को यह अहसास दिला दिया कि बिना मैदान में आए ही वह कोई भी जंग जीत सकते हैं। परिणाम यह रहा कि कैराना विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय लोक दल ने धमाकेदार जीत हासिल की।

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  बीजेपी की बढ़ी चिंता

हर चुनावों में बीजेपी के बड़े नेता चुनाव प्रचार में उतरते देखने को मिले। इस बाद भी सीएम और उपमुख्यमंत्री समेत कई मंत्रियों ने प्रचार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। यहां तक कि चुनाव के अंत तक डटे रहे। ईवीएम गड़बड़ी का मुद्दा भी काफी गरमाया। वहीं, अखिलेश और मायावती घर पर ही बैठे बैठे अंपायर बनकर मैच देखते रहे। बीजेपी ने इसका फायदा उठाने के लिए पूरी ताकत भी लगा दी। लेकिन गठबंधन की रणनीति और मायावती के चक्रव्यूह को फिर बीजेपी तोड़ने में नाकाम रही। देखा जाए तो कांग्रेस ने आरएलडी को समर्थन देकर खुद को चुनाव से पूरी तरह अलग रखा। 

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  गठबंधन के जीत का कारण मायावती फैक्टर...

  •   मायावती ने दिए दो लाख वोटर
  • बसपा सुप्रीमो मायावती चुनाव में तो नहीं गईं, लेकिन आरएलडी के खाते में दो लाख वोटरों को एक साथ ट्रांसफर कर दिया। मायावती को यह बात मालूम था कि उनके समर्थकों और वोटरों की संख्या कहीं से कम नहीं है। इसका सीधा फायदा आरएलडी को मिला। 
  •   सपा ने दिया कर्मठ प्रत्याशी

  • सपा को यह बात मालूम था कि विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों का वोट मिला था। ऐसे में उन्होंने आरएलडी को समर्थन देने के साथ ही कैराना के अपने विधायक नाहिद हसन की मां तबस्ससुम हसन जेसी कर्मठ प्रत्याशी भी दिया। अखलेश की यह रणनीति सफल साबित रही। 
  •   घर घर मांगे वोट

  • जाटों ने हिंदुत्व एजेंडा पर भरोसा नहीं करते हुए अजित सिंह की ओर रुख किया। अजित सिंह ने गली गली और घर घर पहुंचकर जनता से वोट मांगे। ऐसे में जाटों का स्वाभिमान जाग उठा और एकतरफा वोट किया। वैसे तो रालोद की राजनीति जाटों और मुस्लिमों को लेकर देखने को मिलती थी। लेकिन इस बार बसपा का साथ मिलने से आरएलडी और भी मजबूत हो गई। 
  •  परिवार का साथ
  • रालोद प्रतयाशी तबस्सुम के देवर कंवर भी इस बार चुनावी मैदान से हट गए और परिवार का साथ दिया। उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में 1.66 लाख वोट हासलि किए थे। निर्दलयी प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतर रहे कंवर तीन दिन पहले ही चुनावी समर से हट गए। 

Akhilesh Mayawati strategy wins in Karaana by-election

 

Web Title: Akhilesh Mayawati strategy wins in Karaana by-election ( Hindi News From Newstimes)


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