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नियमों के विपरीत हो रहा सूचना आयुक्त व स्टाफ का चयन


SHUBHENDU SHUKLA 06/06/2018 20:09:25
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Lucknow. उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के सूचना आयुक्तों व स्टाफ का चयन पिक एंड चूज के आधार पर RTI act की नियत दिशा के विपरीत हो रहा है। यह आरोप समाजसेवी अशोक गोयल ने लगाए हैं। श्री गोयल ने न्यूज टाइम संवाददाता से बातचीत के दौरान कहा कि इनकी नियुक्ति की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। नियुक्तियों में गड़बड़ी के कारण कानून का उल्लंघन हो रहा है। कानून भ्रस्टाचार को खत्म करने का काम नहीं कर पा रहा है और जनता द्वारा टैक्स के रूप में दिये गये पैसे का निष्फल व्यव हो रहा है। जिसका लेखा परीक्षण होना नितांत आवश्यक है।

Information Commissioner and staff selection against the rules

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  नहीं मिल रहा न्याय 

उन्होंने कहा कि  RTI  से जनता को न्याय मिलने की उम्मीद जागी थी। लोगों को यह भरोसा था कि मुकदमो का निपटारा होगा और दोषियों को सजा मिलेगी। एक संवैधानिक संस्था फर्जी नियुक्तियों के आधार पर कैसे चलने दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि आयोग में पिक एंड चूज की नीति से बिना योग्यता परखे चुने गये सूचना आयुक्तों से सूचना दिलाने या act में दिये गये कार्यों को किये जाने की कोई उम्मीद शेष नहीं रहती है। क्योंकि विगत 12 सालों से भी अधिक की समय अवधि से बिना किसी कार्य संचालन नियमावली के आयोग में चलित है। इसलिए आयोग में किसी की कोई जिम्मेदारी नियत नहीं है।

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  न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन

सूचना आयुक्तों का आयोग में आने जाने का कोई समय नियत नहीं है। आदेश को जारी करने की कोई समय सिम नहीं है। जो धारा 19 (9) का स्पष्ट उल्लंघन है। आयोग के किसी भी आदेश में प्रभावित व्यक्तियों को अपने विनिश्चयों के लिए कोई कारण उपलब्ध नहीं कराते हैं, जो RTI act 2005 की धारा 4(1)(d) का खुला उल्लंघन है। आयोग सर्वोच्च न्यायालय के RTI act के संगत जारी आदेशों का भी उल्लंघन हो रहा है।

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बिना जांच किए सुनवाई

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग में शिकायत संख्या S1, 128/C/2018 की बिना जांच किये की जा रही अकारण सुनवाई कर दी गई। शिकायत पर रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाईटीज एवं चिट्स, लखनऊ मण्डल, लखनऊ ने जवाब में कोई सबूत नहीं दिया है। जबकि सूचना छुपाना एक अपराधिक कृत्य है। उन्होंने बताया कि सूचना अधिकारी ने उक्त सूचना के लिये रु.30,100 व रु. 150 प्रति पृष्ठ का 3 प्रकार का शुल्क मांगा है। जबकि RTI act में एक पन्ने का नियत शुल्क मात्र रु. है और 30 दिन गुजरने पर ये सूचना शुल्क नही मांगा जा सकता।

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  ऐसे हो रहा नियमों का उल्लंघन

1- RTI act की धारा 18(1) के अनुसार आयोग का यह कर्तव्य होगा कि वह किसी व्यक्ति द्वारा की गयी शिकायत को प्राप्त करें और जांच करे। लेकिन आयोग द्वारा इस नियम के तहत की गयी शिकायतों पर जांच किये बिना सुनवाई की विभिन्न तिथियां नियत कर दी जा रही है। शिकायतकर्ता व जन सूचना अधिकारी दोनों का ही आर्थिक मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न हो रहा है।
2- आयोग द्वारा सुनवाई की तामील नोटिसों में act के हिसाब से प्रार्थना पत्र पर की गयी किसी कार्यवाही का उल्लेख नहीं है और न ही होता है। 
3- आयोग की उक्त नोटिस में इस बात का भी कोई उल्लेख नहीं होता है कि वह शिकायतकर्ता को सुनवाई में क्यों बुलाना चाहता है। जबकि शिकायत पर धारा 20 की कार्यवाही आयोग और जन सूचना अधिकारी के बीच का मामला है 
4- act के विपरीत शिकायतकर्ता को आयोग की सुनवाई में उपस्थित होने को बाध्य किया जाता है। शिकायत बिना किसी कार्यवाही के समाप्त कर दी जाती है। शिकायतकर्ता के सुनवाई में उपस्थित होने पर बिना किसी विधि के आपत्ति मांगता है, वो भी 2 प्रतियों में। ये क्रम सालों साल चलता है, जिससे शिकायत का महत्व की अर्थहीन हो जाता है।

Information Commissioner and staff selection against the rules

Web Title: Information Commissioner and staff selection against the rules ( Hindi News From Newstimes)


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