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अस्पताल प्रशासन की करतूत से मानवता शर्मसार, गर्भवती को चादर में ढोने को मजबूर


SHUBHENDU SHUKLA 10/06/2018 12:50:00
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Visakhapatnam. देश में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार तमाम तरह की योजनाएं चला रही है। मरीजों से उदारता बरतने के निर्देश भी सरकार जारी कर रही है। लेकिन अस्पताल प्रशासन की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है। आंध्र प्रदेशक के विशाखापट्टनम में अस्पताल प्रशासन की करतूत से मनवता शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यहां गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की मांग परिजनों ने डायल 108 पर की। लेकिन एंबुलेंस भेजने से साफ इंकार कर दिया। इसके बाद गर्भवती को चादर और डंडे के सहरारे बांधकर ढोना पड़ा। 

Visakhapatnam case Hospital refuses to send ambulance 6 kilometer walk to the pregnant

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  6 किमी दूर अस्पताल

आजतक के मुताबिक सड़क खराब होने की वजह से अस्पताल ने एंबुलेंस भेजने से मना कर दिया। गर्भवती महिला को चादर का स्ट्रेचर बनाकर 6 किलोमीटर तक ढोना पड़ा। हालांकि, 2 किलोमीटर बात उनको टेंपो मिल गया। इसके बाद किसी तरह अस्पताल पहुंचाया गया। गरीमत रही की अस्पताल प्रशासन के उदासीनता की भेंट गर्भवती नहीं चढ़ी। यदि गर्भवती को अस्पताल पहुंचाने में विलंब होता तो कुछ भी हो सकता था। 

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  क्या है मामला 

घटना के कोटाउरतला गांव की है। पीड़ित परिजनों के मुताबिक महिला गर्भवती थी। अचानक उसे दर्द उठा। इसके बाद डायल 108 पर सूचना दी गई और एंबुलेंस भेजने का अनुरोध किया गया। लेकिन सड़क खराब होने की बात कहते हुए एंबुलेंस भेजने से मना कर दिया गया। इसके बाद महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए चादर और डंडे के सहारे से स्ट्रेचर तैयार किया गया। इसके बाद किसी तरह अस्पताल पहुंचाया गया। 

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  नहीं है कोई स्वास्थ्य मंत्री

यहां के लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री नहीं होने के कारण इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। अस्पतालों की मनमानी लगातार जारी है। वहीं, मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना पर कुछ भी बोलने से (TDP) नेताओं ने चुप्पी साध ली है। विकास कार्य नहीं होने के कारण सड़कों की बदहाली से परेशान आदिवासियों को जान जोखिम में डालना पड़ता है।

Web Title: Visakhapatnam case Hospital refuses to send ambulance 6 kilometer walk to the pregnant ( Hindi News From Newstimes)


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