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चुनावी समीकरण: लोकसभा में दिखेगी गठबंधन की पारी, मायावती का पूरा होगा सपना!


SHUBHENDU SHUKLA 13/06/2018 11:20:01
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Lucknow. यूपी में सीएम रह चुकीं मायावती की सख्त कानून व्यवस्था से जनता बेहद ही खुश रहती है। वहीं, अखिलेश यादव के विकास कार्यों ने जनता का दिल जीता है। लेकिन वर्षों से यूपी में सपा बसपा की सरकार बनाने के ​बाद जनता ने एक बार बीजेपी के वादों पर अमल करते हुए सरकार बनाने का मौका दिया। बीजेपी के भी बहुत कुछ बेहतर नहीं करने पर जनता को निराश ही दिख रही है। कर्नाटक का चुनाव और यूपी के गोरखपुर, फूनपुर, नूरपुर कैराना के उपचुनावों ने मायावती को हरी झंडी दे दी है। उनका वर्चस्व भी पार्टियों में बढ़ा है। अब लोकसभा चुनाव में शेष समय रहने के कारण फिर से चुनावी दंगल की सरगर्मी चढ़ गई है। 

Mayawati dream to complete Lok Sabha election equation

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  राजनीति में महारत

बसपा सुप्रीमो मायावती को राजनीति में महारत हासिल है। जिसकी बदौलत अकेले दम पर बसपा पार्टी को मुकाम तक पहुंचाकर स्थापित कर दिया। लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही मायावती के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा तेज हो गई है। जनता का समर्थ भी उनको भरपूर मिल रहा है। शायद इसका एक मूल कारण यही हो सकता है, कानून व्यवस्था। चूंकि सपा सरकार में अपराध का बोलबाला काफी बढ़ गया था। जिससे जनता नाखुश थी। इसी का फायदा उठाकर बीजेपी ने उप्र अपराध मुक्त का नारा दिया था और सत्ता में आई। फिलहाल अपराध मुक्त का ख्वाब दिखाने वाली बीजेपी ने सपा के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। महिलाओं के साथ छेड़खानी, रेप, हत्या जैसी वारदातों में बेतहाशा वृद्धि हुई है।

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  पीएम मोदी के खिलाफ विपक्ष

बीजेपी के बढ़ते कदमों को रोकने का सिलसिला अब शुरू हो चुका है। मायावती और अखिलेश यादव के साथ ने इसे कर भी दिखाया है। लेकिन अब सभी पार्टियों की निगाहें लोकसभा चुनाव पर टिक गई हैं। जिसे लेकर पार्टी के बड़े नेताओं में बयानबाजी और जुबानी जंग भी शुरू हो गई है। सपा बसपा के एकजुट होने के बाद मायावती ही उनका बीजेपी का लोहा लेने के लिए सबसे उपर उभर कर सामने आई हैं। लोगों का भरोसा मायावती पर अन्य नेताओं की अपेक्षा कहीं अधिक बढ़ा है। मायावती की सियासी परवान दोबारा चढ़ती दिख रही है। उनकी इस आंधी के सामने कोई भी नहीं टिक पाया। यह भी एक बड़ी वजह है कि मायावती ने बैठक बुलाकर पार्टी के कार्यों में बड़े बदलाव किए हैं। पार्टी के उन सभी नेताओं को चेतावनी दे दी है कि जो सिर्फ बसपा को आगे ले जाने की सोच रखेगा वही यहां टिक सकेगा।  

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  मायावती बनेंगी पीएम

गठबंधन के साथ अब तक हुए चुनावी समीकरण पर गौर करें तो मायावती का वर्चस्व काफी मजबूत है। दलित संगठनों मायावती को प्रधानमंत्री बनाने की मांग भी तेज हो गई है। यह मांग लोकसभा चुनाव के दौरान और भी तेज हो जाएगी। फिलहाल गठबंधन के साथ हुए चुनावों में मिली विजय के बाद अब सभी का ध्यान एक बार एमपी, राजस्थान व छत्तीसगढ़ की ओर केन्द्रित हो गया है। मना जा रहा है कि यहां विधानसभा चुनावों में बसपा और कांग्रेस का प्रदर्शन करामात कर सकता है। यदि यह चुनावी गणित सफल रहा तो बीजेपी को हार का सामना करना पड़ सकता है।   

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  बहन जी ही बनेंगी पीएम

बताते चलें कि कर्नाट चुनाव के बाद कुमारस्वामी को पीएम बनाए जाने के सभी विपक्ष एकजुट हुए थे। यहां भी मायावती को समर्थन देने वालों की कमी नहीं थी। गौर फरमाएं तो मई माह के अंतिम हफ्ते में बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक हुई थी। इसमें तकरीबन 15 राज्यों से बसपा कार्यकताओं ने शिरकत की थी। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर बहन जी को पीएम बनाने की एक ही बात कही। इतना ही नहीं खुद मायावती ने भी आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर बड़े बदलाव के सबूत पेश किए। 

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बनेगी नई छवि

राजनीति में कब क्या हो जाए यह किसी को मालूम नहीं होता। इस के लोकसभा चुनाव की राजनीति की दिशा भी कुछ यही बयां कर रही है। यदि गठबंधन में बीजेपी के खिलाफ कामयाबी मिलती है, तो मायावती पीएम बनने की दावेदारी से गुरेज नहीं करेंगी। फिलहाल अभी से नतीजों पर भी नहीं पहुंचा जा सकता है। चूंकि अब एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनावम में दलितों और आदिवासियों की संख्या यहां के राजनीति की दशा दिशा तय करेगी। यहां की जीत के बाद ही आगे के बारे में जानकारी कुछ कह पाएंगे।

2013 का विश्लेषण 

2013 के चुनावी समीकरणों पर गौर करें तो यदि एमपी में बसपा और कांग्रेस एकसाथ मिलकर चुनाव लड़ते तो बीजेपी को 40 सीटों का नुकसान होता। छत्तीसगढ़ में दोनों पार्टी यदि एकजुट होकर चुनाव लड़ते तो बीजेपी से  3.5 प्रतिशत वोट ज्यादा मिलते। जो भी हो मायावती ने भी यह बात साफ कर दिया है कि यदि अन्य पार्टियों को सम्मान जनक सीटें मिलती हैं, तभी उनके साथ चुनाव लड़ेंगी। अन्यथा बसपा अकेले ही चुनाव लड़कर विजय पताका फहराएगी।  

  यहां अच्छा हुआ तो

एमपी और छत्तीसगढ़ के बाद राजस्थान में होने वाले चुनाव पर ध्यान केन्द्रित किया जाए तो मायावती के लिए यहां एक बेहतर अवसर होगा। दोनों राज्यों के साथ ही राजस्थान को भी जोड़ा जाए तो ये क्षेत्र कुल 66 लोकसभा सीटों के दायरे में फैला हुआ है। यहां प्रदर्शन अच्छा हुआ तो मायावती की स्थिति गठबंधन में बाहर और भीतर दोनों जगह मजबूत हो जाएगी। उनके पीएम दावेदारी की चर्चा में भी वजन बढ़ जाएगा। जो भी हो जानकारों की माने तो जो भी परिणाम अब देखने को मिल रहे हैं, उसमें मायावती दमदार तीरके से वापसी करने वाली हैं। 

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Web Title: Mayawati dream to complete Lok Sabha election equation ( Hindi News From Newstimes)


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