दलितों को मिले अधिकारों को खत्‍म करने की कोशिश:  अनिल कुमार


SHUBHENDU SHUKLA 02/07/2018 17:17:36
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Patna. जनतांत्रिक विकास पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अनिल कुमार ने दलित व महादलित अधिकार सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्‍य की नीतीश सरकार में दलित और महादलित तबके के लोग डरे हुए हैं। लोगों में बेचैनी है। नरेंद्र मोदी हो या बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार। किसी ने इन के विकास एवं उत्‍थान के लिए कुछ नहीं किया। श्री कुमार ने पटना के श्रीकृष्‍ण मेमोरियल हॉल में सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महादलित के सम्‍मान व अधिकार को संवैधानिक रूप से छीनने की साजिश चल रही है। इसका ताजा उदाहरण माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय का वह आदेश है, जिसमें दलितों की आत्‍मरक्षा यानी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, अत्याचार निरोधकद्ध अधिनियम 1989, 11 सितंबर 1989, एससी- एसटी एक्‍ट में बदलाव की बात कही है। इस तरह से उन्‍हें संवैधानिक रूप में कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

Daliton Ko Mile Adhikaaron Ko Khat‍ma Karane KI koshish

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  जनता को गुमराह

श्री कुमार ने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर बिहार को विशेष राज्‍य के मुद्दे पर प्रदेश की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्‍होंने ये भी कहा कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार राजनीतिक फायदे के बजाय विशेष राज्‍य का दर्जा के लिए गंभीरता दिखायें और अगर केंद्र सरकार ये दर्जा नहीं देती है, तो गठबंधन तोड़कर बिहार की मान सम्‍मान की रक्षा करें। दलित व महादिलत समाज के साथ सभी के लिए समान शिक्षा का अधिकार मिलने की वकालत की। कहा कि देश में सभी प्राइवेट सकूल बंद होना चाहिए और सभी राजनेता ए ब्यूरो क्रेटस एडेलिगेट्स एऔर अधिकारी के बच्चे और दलित महादलित के बच्चा एक साथ पढ़ें। तभी समाज में बराबरी का भाव आयेगा। साथ ही हम समाज और देश का समेकित विकास की ओर बढ़ पायेंगे। इसी तरह प्राईवेट अस्पताल भी बंद होने चाहिए। जिससे सब को समान शिक्षा के साथ ही समान चिकित्सा मिल सके।

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  दलितों का उद्धार 

श्री कुमार ने बिहार में दलितों को लेकर पर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के मंशे पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि साल 2005 में जब वे सत्ता में आये और दलितों को महादलितों की श्रेणी में शामिल करने का फैसला किया। लोगों को लगा कि एक ईमानदार नेता की तरह‍ वे सालों से उपेक्षित दलितों का बिहार में उद्धार करेंगे। लगा था कि वे दलित समाज को भी ऊंचाईयों पर ले जाना चाहते हैं। मगर आज 12 साल बाद प्रदेश में दलितों की स्थिति और भी खराब हुई। अब पता चल रहा है कि नीतीश ने अति पिछड़ों का इस्‍तेमाल अपने राजनीतिक खेल के लिए किया है। सरकारी आंकड़े भी देश की सरकार के दावों की पोल खोलती हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्‍यूरो के अनुसारए साल 2016 में दलितों पर 746 फीसदी अत्‍याचार के मामलों में वृद्धि हुई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के कहती है कि प्रत्येक 18 मिनट में दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामले आते हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी किए ताजा आंकड़े कहते हैं कि साल 2016 में दलितों पर अत्‍याचार के मामले में बिहार दूसरे नंबर पर रहाए जहां 5,701 मामले दर्ज किये गए।

  यहां हुआ उत्पीड़न 

उन्‍होंने कहा कि पिछले दिनों भागलपुर नवगछिया के झंडापुर थाना क्षेत्र में एक दलित के परिवार के तीन लोगों को कुल्हाड़ी से काट कर निर्ममता पूर्वक हत्‍या कर दी गई  चंपारण के मैनाटांड इलाके में दबंग लोगों ने दलितों की करीब पचास एकड़ जमीन पर लगी फसल को लूट लिया और जमीन पर कब्जा कर लिया। इसमें स्थानीय विधायक व बिहार सरकार के गन्ना विकास मंत्री फिरोज उर्फ खुर्शीद आलम ने दबंगों को संरक्षण देने की बात समाने आई। वैशाली के दलित आवासीय विद्यालय में एक लड़की की बलात्कार के बाद निर्मम हत्याए भागलपुर में दलित महिलाओं पर हमला और रोहतास जिले के काराकाट थाना क्षेत्र के मोहनपुर गांव में 15 साल के एक दलित लड़के को दबंगों द्वारा जिंदा जला दिए जाने समेत कई ऐसे मामले आयेए जो बिहार में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के दलितों क्र प्रति प्रेम का पोल खोलती है। आश्‍चर्य तो तब हुआ, जब 22 में से जिन चार जातियों के स्‍तर में सुधार बताकर उन्‍होंने 2005 में महादलित में शामिल नहीं किया थाए आज उन्‍हें भी महादलित बना दिया। यानी लोग आगे बढ़ते हैं, मुख्‍यमंत्री ने डिमोशन करा दिया है।

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  37 फीसदी गरीबी रेखा से नीचे

श्री कुमार ने कहा कि यह तल्ख सच्चाई है कि 37 फीसदी दलित गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं। 54 फीसदी कुपोषित हैं, प्रति एक हजार दलित परिवारों में 83 बच्चे जन्म के एक साल के भीतर मर जाते हैं। यही नहीं 45 फीसदी बच्चे निरक्षर रह जाते हैं। 40 फीसदी सरकारी स्कूलों में दलित बच्चों को कतार से अलग बैठकर खाना पड़ता है, 48 फीसदी गांवों में पानी के स्रोतों पर जाने की मनाही है। वहीं, केंद्र की भाजपा सरकार का तो कुछ कहना ही नहीं। मोदी सरकार ने दलितों पर अत्‍याचार की छूट दे रखी है, जिसके बाद देशभर में दलित आंदोलन ने जोर पकड़ा है।  देशभर में दलितों पर हुए अत्याचारों के मामले की बात करें, तो 2016 में 40,801 केस दर्ज किए गए थे। जबकि 2015 में यह आंकड़ा 38,670 था। सवाल अत्याचार का नहीं, बल्कि दम तोड़ रही मानवीय संवेदनाओं का है। और अंत मे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार ने कसम खायी की मर मिटेंगे लेकिन बाबा साहेब के संविधान को बिखने नहीं देंगे।

 

Daliton Ko Mile Adhikaaron Ko Khat‍ma Karane KI koshish

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