बड़ी खबर: एएमयू ने दलितों को आरक्षण से क्यों रखा वंचित? आयोग ने भेजी नोटिस...


SHUBHENDU SHUKLA 04/07/2018 23:31:42
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Lucknow. उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को नोटिस भेजकर आरक्षण के नियमों का अनुपालन नहीं करने को लेकर नोटिस भेजा है। आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने पत्रकारों से बातची के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा संवैधानिक उपबंधों व न्यायिक निर्णयों को नजरअंदाज करते हुए आरक्षण के नियमों अनुपालन कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद उच्च न्यायलय ने इस बात को साफ कर दिया था कि अलीगढ़ यूनिवर्सिटी मुस्लिम विद्यालय नहीं है। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई जगत गुरू कबीर फाउंडेशन के द्वारा भेजी गई शिकायत पर की गई है। जो नियम कानून सभी यूनिवर्सिटी के लिए हैं,  वही नियम अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पर भी लागू होते हैं। 

 Commission asks why AMU deprives Dalits from reservation

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  अनुदान आयोग का आदेश

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 23/03/2016 को आदेशित किया था कि अनुसूचित जाति को 15 व जन जाति के लोगों को 7.5 प्रतिशत आरक्षण नियुक्ति व प्रवेश समेत अन्य स्थानों पर दिया जाए। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ प्राप्त करने वाले वर्ग को उनके अधिकारों से विश्वविद्यालय ने अब तक वंचित रखा। लेकिन अब आयोग इस मुद्दे पर सख्त है। यदि नोटिस पर अमल नहीं किया जाता है, तो आयोग अपनी शक्तियों का प्रयोग कर उचित कार्रवाई करेगा। जरूरत पड़ी तो कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाएंगे। 

  AMU का इतिहास 

आयोग के अध्यक्ष ने जारी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह भ्रांतियां भी दूर कर दी है, जो कि यह माना ता रहा यह मुस्लिमों की यूनिवर्सिटी है। उन्होंने बताया कि सन 1877 में सर सैयद अहमद ने मोहम्मद एंग्लो ओरियन्टल कॉलेज शैक्षणिक संस्था के रूप में प्रारम्भ किया था। इसके बाद एक फाउंडेशन गठित की गई। विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए इसके बाद ही धन एकत्रित करना शुरू किया गया। जिसमें महाराजा विजय नगरम, ठाकुर गुरू प्रसाद सिंह, कुंवर जगजीत सिंह (बिजनौर), राजा हरि किशन सिंह, महाराजा दरभंगा, राय शंकर दास मुजफ्फरनगर, महाराज पटियाला, महाराजा महेन्द्र प्रताप सिंह व अन्य ने उस समय 58 हजार रुपया विवि की स्थापना के लिए दान किया था। इसके बाद 1920 अधिनियम के माध्यम से इसे स्थापित किया गया। 

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 संघीय कानून लागू होगा

उन्होंने बताया कि संविधान निर्माता डा भीमराव अम्बेडकर ने संविधान सभा में यह बात घोषित की थी कि एएमयू बीएचयू की तरह संविधान की 7वीं अनुसूचि में संघीय सूचि में रखा गया है। तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद, डा जाकिर हुसैन, मो करीम छागला, नुरूल हसन व अन्य शिक्षाविदों व विशेषज्ञों ने यह बात स्पष्ट किया था कि विवि की स्थापना न तो मुस्लिम समुदाय द्वारा किया गया है और न ही इसका संचालन ही किया जाता है। 

  50 प्रतिशत आरक्षण 

उन्होंने बताया कि सन 1990 में एएमयू द्वारा मुस्लिमों को विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था की थी। इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति ने असंवैधानिक करार देते हुए इसे खारिज कर दिया था। तब विवि ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में याचिका डालकर चुनौती दी थी। जिसे कोर्ट ने भी असंवैधानिक करार दिया था। बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अजीज बासा बनाम भारत संघ मामले में 1967 में स्पष्ट कर दिया था कि एएमयू की स्थापना मुस्लिम समुदाय ने नहीं की थी और न ही संचालित। लेकिन चिंताजनक है कि विवि आरक्षण के नियमों का अनुपालन नहीं कर रहा है। अपने अधिकार से लाखों छात्र अब तक वंचित रह गए। यदि उनको अधिकार मिला होता तो आज उन छात्रों का भविष्य सुनहरा होता। लेकिन अब आयोग का दायित्व है कि वह आरक्षण का लाभ दिलाए। 

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  आयोग लेगा एक्शन 

उन्होंने बताया कि नोटिस में विश्वविद्यालय को 8 अगस्त तक का समय दिया गया है। यदि नोटिस के नियमों का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो आयोग विवि के खिलाफ एक्शन लेगा। बता दें कि भेजे गए नोटिस में जवाब मांगा गया है कि विवि यह अवगत कराए कि आरक्षण का लाभ क्यों नहीं दिया गया। ऐसा किन परिस्थितियों में किया गया। जबकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी ऐसा कोई निर्णय नहीं दिया गया है। 

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  सियासी खेल का सवाल

मुद्दे को लेकर जब आयोग के अध्यक्ष से पत्रकारों ने यह सवाल किया गया कि सीएम यागी आदित्यनाथ ने कन्नौज में एएमयू में आरक्षण देने की बात कही थी इसके बाद से ही इस पर सियासत हो रही है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि आयोग का कार्य आरक्षण वर्ग के हितों की दिशा में काम करना है सियासत का कोई लेना देना नहीं है। हालांकि, उन्होंने इशारे में यह बात भी कई कि दलितों का मसीहा बनने वाले नेता अब तक कहां थे। आरक्षण वर्ग कहा हितैसी बताने वालों ने इस दिशा में ध्यान दिया होता तो आज यह स्थिति नहीं होती।

 Commission asks why AMU deprives Dalits from reservation

 Commission asks why AMU deprives Dalits from reservation

Web Title: Commission asks why AMU deprives Dalits from reservation ( Hindi News From Newstimes)


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