सीएम के आदेश ठेंगे पर, आईजीआरएस में फर्जी निस्तारण का खेल...


SUJEET KUMAR 26/07/2018 18:06:26
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Lucknow. सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनता की समस्याओं को प्राथमिकता से निपटाने के लिए अधिकारियों को सख्त आदेश दिए हैं। लेकिन अधिकारी सरकार की छवि खराब कर कुर्सी पर  आराम फरमा रहे हेैं। शिकायतों का निस्तारण एसी में बैठकर फर्जी तरीक से करा दिया जा रहा है। पीड़ित के घर कोई भी अधिकारी या उनके मातहत जांच कराने नहीं पहुंचते हैं। कुछ इसी तरह का मामला मिर्जापुर जिले के ग्राम-नदौली, पोस्ट-विलरा पटेहरा, थाना-हलिया में सामने आया है। 

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 क्या है मामला 

जानकारी के मुताबिक विवाद दो सगे भाईयों के बीच का है। यहां डॉक्टर त्रिवेणी प्रसाद शुक्ला के पुत्र केदार नाथ शुक्ल तहसील में एडवोकेट हैं। जिनकी स्थानीय अधिकारियों और पुलिस से मिलीभगत है। आए दिन एडवोकेट अपने चाचा चंद्रभूषण शुक्ला को परेशान करते हैं। फर्जी मुकदमा भी चाचा और उनके बेटों के नाम से दूसरों की फर्जी गवाही दिलाकर कोर्ट में दर्ज करा चुके हैं। लेकिन इतना सब कुछ करने के बाद भी एडवोकेट की करतूत बढ़ती ही जा रही है। कुछ दिनों पहले दबंग एडवोकेट ने चंद्रभूषण शुक्ला के जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी। इसकी शिकायत आईजीआरएस में दर्ज कराकर उच्च अधिकारियों को भेजी गई। लेकिन अधिकारी मामले की लीपापोती में जुट गए। यहां तक कि मौके का निरीक्षण किसी ने नहीं किया और फर्जी तरीके से मामले का निस्तारण दिखा दिया। गौरतलब है कि सीएम अधिकारियों को चेतावनी दे चुके हैं कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन अधिकारी अपनी करस्तानी से बाज नहीं आ रहे हैं।

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भटकने को मजबूर

एडवोकेट की दबंगई से परेशान होकर वृद्ध चंद्रभूषण शुक्ला न्याय के लिए भटकने को मजबूर हैं। लेकिन उनकी न तो पुलिस ही सुन रही है और नही उच्च अधिकारी। लेखपाल वीरेन्द्र पांडेय और कानूनगो राम दरस गांव में जमीन नापने गए थे। लेकिन पीड़ित पक्ष की जमीन नापे बिना ही एडवोकेट के घर चाय नाश्ता कर उनकी बाइक से तहसील लौट आए। हैरान कर देने वाली बात है कि मामले को लेकर एसडीएम ने जमीन नापने का आदेश कर रखा है। लेकिन उनके आदेशों की धज्जियां भी लेखपाल उड़ा रहा है। इस बीच सीएम हेल्पलान नंबर से शिकायतों के निस्तारण को लेकर शिकायतकर्ता की संतुष्टी जानी गई। लेकिन जब उनको बताया कि निस्तारण फर्जी है, तो कहा कि उच्च अधिकारियों को मामला प्रेषित किया जा रहा है। लेकिन यहां से भी खानापूर्ति कर ली गई। 

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अधिकारियों की करस्तानी

प्रदेश सरकार जहां पीड़ितों की शिकायतों के निस्तारण को लेकर प्रयास कर रही है, वहीं अधिकारी सीएम के महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगा रहे हैं। बता दें कि आइजीआरएस पर डीएम, एसडीएम, एडीएम वित्त एवं राजस्व, आईजी न अन्य उच्च अधिकारियों को शिकायत दर्ज कराई गई थी। लेकिन जांच कर मामले का निस्तारण करने की बजाए फर्जी तरीके से निस्तारण दिखा दिया गया। अधिकारियों की हीलाहवाली को लेकर दबंग के हौसले बुलंद हैं, और वृद्ध का लगातार उत्पीड़न कर रहा है।

क्या कहते हैं एसडीएम

जब मामले को लेकर एसडीएम लालगंज से बात की गई तो कहा कि आप पीड़ित को भेज दें जमीन नपवा दी जाएगी। लेखपाल कानूनगो ने ऐसा क्यों किया। यह उनको पता नहीं है। जब पीड़ित तहसील पहुंचा तो एसडीएम साहब नदारद रहे। हैरान करने वाली बात है कि एसडीएम के संज्ञान में मामला होने के बाद भी शिकायत का निस्तारण दिखा दिया गया है।

  आराम फरमा रहे डीएम

जब मामले को लेकर डीएम मीरजापुर से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। हैरान करने वाली बात है कि सीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सीयूजी नंबर पर वह खुद ही कॉल रिसीव कर समस्याओं का निस्तारण करेगे। लेकिन अधिकारी सरकार की मंशा पर पलीता लगा रहे हैं। आईजीआरएस अधिकारियों के भ्रष्टाचार की भेट चढ़ता जा रहा है।

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Web Title: up government IGRS ( Hindi News From Newstimes)


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