सोशल मीडिया लोकसभा चुनाव समीकरण: 50 करोड़ से ज्यादा यूजर...बसपा का ध्यान कहां...


SHUBHENDU SHUKLA 28/07/2018 22:08:21
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Lucknow. लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां अपने हर हथकंडे अपना रही है। सोशल मीडिया का सहारा लेने से भी नहीं चूक रही है। जो भी हो सोशल मीडिया की भूमिका को किसी भी क्षेत्र में सार्थकता को नकारा नहीं जा सकता है। बीजेपी की बात करें तो सोशल मीडिया की पूरी टीम ही गठित कर दी है। वाट्सएप से लेकर फेसबुक ट्वीटर तक युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी भी सोशल मडिया को अहम स्थान देती है। लेकिन हैरान करने वाली बात है कि सोशल मीडिया पर यूजर 23 करोड़ से बढ़क करीब 50 करोड़ पहुंचने वाले हैं। लेकिन इसके बाद भी बसपा सुप्रीमो का ध्यान इस ओर नहीं है। इससे मायावती के सोशल मीडिया फैन्स को निराशा भी पहुंच रही है। बता दें कि 2014 में भी मायावती का अंदाज सोशल मीडिया को लेकर कुछ इसी तरह रहा था। ऐसे में जानकारों की माने तो कहीं ये गलती उन पर भारी न पड़ जाए। 

Social Media Lok Sabha Election Equation

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  बढ़ रही लोकप्रियाता

राजनीति का दौरा चुनाव आते ही बढ़ता जा रहा है। वहीं, बसपा सुप्रीमो की लोकप्रियता में भी कहीं से कमी नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक के लोग बहन जी को ही प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। यहां तक कि महागठबंधन में उनकी बढ़ती मांग को देखते हुए यह भी कहा जा सकता है कि इस बार का आम चुनाव महासंग्राम की तरह की होगा। 

  अकाउंट बने फर्जी

सोशल मीडिया को लेकर बसपा सुप्रीमो ने यह बयान जारी कर फैन्स को निराश कर दिया है कि जो भी अकाउंट उनके नाम से बने हैं, फर्जी हैं। जबकि कई अकाउंट मायावती फैन क्लब के नाम से बने हैं। इस बात से नकारा नहीं जा सकता कि मायावती के फैन की संख्या कहीं से कम हैं। हांलाकि, यह बात भी सच है कि बसपा पार्टी सोशल मीडिया पर कभी भी अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराती। इससे पहले 2014 के लोकसभा और 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में बसपा सुप्रीमो ने साफ कह दिया था कि सोशल मीडिया उनके वोटरों को प्रभावति नहीं कर पाएगा। लेकिन राजनीतिक जानकारों की माने तो यूं ही सोशल मीडिया की उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता है।

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  क्या कहते हैं आंकड़े

सोशल मीडिया को लेकर एक अंग्रेजी अखबार में छपे आंकड़ों की माने तो   2014 के लोकसभा चुनावों में राजनीतिक पार्टियों ने लगभग 400 से 500 करोड़ रुपए खर्च किए थे। यह खर्च सिर्फ सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी को मजबूत बनाने को लेकर किया गया था। अब अनुमान यह लगाया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर खर्च होने वाले रुपयों की संख्या 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि मोबाइल और नेट सस्ता होने की वजह से सोशल मीडिया यूजरों की संख्या बढ़ी है। 2019 में बढ़कर यह संख्या 50 करोड़ से ज्यादा होने वाली है।

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  मायावती ने किया साबित

बता दें कि 2007 में मायावती ने यह अपने दम पर सरकार बनाकर साबित कर दिया था कि वह किसी से कम नहीं हैं। अपने दम पर ही वह सरकार बनाने की क्षमता रखती हैं। वक्त के साथ उनको भी बदलना आता है। हाल में ही मायावती ने फूलपुर-गोरखपुर सीटों पर होने वाले उपचुनावों में सपा को समर्थन देकर यह साबित कर दिया कि वह लोकसभा चुनाव का पासा पलटने की हैसियत रखती हैं। 

 

Web Title: Social Media Lok Sabha Election Equation ( Hindi News From Newstimes)


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