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सावन में जप लें ये मंतर, सारे कष्ट हो जाएंगे छूमंतर


INDRESH KUMAR YADAV 02/08/2018 15:39:26
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Lucknow. सावन का पवित्र महीना शुरु हो चुका है। इस माह में लोग भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। इसके अलावा श्रावण मास में सुहागिन महिलाएं जहां एक तरफ अपने पति की लंबी आयु के लिए पूजा-पाठ करती हैं। वहीं दूसरी तरफ कुंवारी युवतियां मनचाहे वर की प्राप्ति हेतु भगवान शिव की आराधना करती हैं। सावन के इस पावन माह में शिवाष्टक स्तोत्र का पाठ व्यक्ति के सारे कष्टों को दूर कर देता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर वो शिवाष्टकं स्त्रोत क्या हैं।

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  जानिए क्या हैं शिवाष्टकं स्त्रोत

यह शिवाष्टकं आठ पदों में विभाजित है जिसकी स्तुति परंब्रह्म शिव की आराधन का एक उत्तम साधन है। शिव के इस स्तोत्र की महिमा स्वयं शंकराचार्य ने भी कही है।

शास्त्रों में कहा गया है कि शिव को प्रिय शिवाष्टकं स्तोत्र का पाठ और श्रवण मनुष्य को हर बुरी परिस्थितियों से शीघ्र ही मुक्ति दिलाता है। सावन के महीने में शिव की इस स्तुति का सस्वर पाठ भाग्यहीन व्यक्ति को भी सौभाग्यशाली बनाता है।

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शिवाष्टकं स्तोत्र

 

प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथ नाथं सदानन्द भाजाम् ।

भवद्भव्य भूतेश्वरं भूतनाथं, शिवं शङ्करं शम्भु मीशानमीडे ॥ 1 ॥

गले रुण्डमालं तनौ सर्पजालं महाकाल कालं गणेशादि पालम् ।

जटाजूट गङ्गोत्तरङ्गै र्विशालं, शिवं शङ्करं शम्भु मीशानमीडे ॥ 2॥

मुदामाकरं मण्डनं मण्डयन्तं महा मण्डलं भस्म भूषाधरं तम् ।

अनादिं ह्यपारं महा मोहमारं, शिवं शङ्करं शम्भु मीशानमीडे ॥ 3 ॥

वटाधो निवासं महाट्टाट्टहासं महापाप नाशं सदा सुप्रकाशम् ।

गिरीशं गणेशं सुरेशं महेशं, शिवं शङ्करं शम्भु मीशानमीडे ॥ 4 ॥

गिरीन्द्रात्मजा सङ्गृहीतार्धदेहं गिरौ संस्थितं सर्वदापन्न गेहम् ।

परब्रह्म ब्रह्मादिभिर्-वन्द्यमानं, शिवं शङ्करं शम्भु मीशानमीडे ॥ 5

कपालं त्रिशूलं कराभ्यां दधानं पदाम्भोज नम्राय कामं ददानम् ।

बलीवर्धमानं सुराणां प्रधानं, शिवं शङ्करं शम्भु मीशानमीडे ॥ 6 ॥

शरच्चन्द्र गात्रं गणानन्दपात्रं त्रिनेत्रं पवित्रं धनेशस्य मित्रम् ।

अपर्णा कलत्रं सदा सच्चरित्रं, शिवं शङ्करं शम्भु मीशानमीडे ॥ 7 ॥

हरं सर्पहारं चिता भूविहारं भवं वेदसारं सदा निर्विकारं।

श्मशाने वसन्तं मनोजं दहन्तं, शिवं शङ्करं शम्भु मीशानमीडे ॥ 8 ॥

स्वयं यः प्रभाते नरश्शूल पाणे पठेत् स्तोत्ररत्नं त्विहप्राप्यरत्नम् ।

सुपुत्रं सुधान्यं सुमित्रं कलत्रं विचित्रैस्समाराध्य मोक्षं प्रयाति ॥

Web Title: remember these mantra in the month of savan ( Hindi News From Newstimes)


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