देवरिया कांड: BJP राज में बेटियों की सुरक्षा भगवान भरोसे, जांच में सामने आ रही खामियां...


SHUBHENDU SHUKLA 08/08/2018 12:57:38
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Lucknow. यूपी में बीजेपी की सरकार बनते ही कानून व्यवस्था अपराधियों की भेंट चढ़ गया है। हत्या, रेप, छेड़खानी की वारदातें तो दूर सफेदपोश धड़ल्ले से बच्च्यिों के साथ दरिंदगी करने में मस्त हैं। प्रदेश में क्राइम का हाल देवरिया स्थित मां विंध्यवासिनी बालिका संरक्षण गृह में नाबालिग बच्चियों से हुए घिनौने कांड सच बयां कर रही है। हैरान करने वाली बात है कि इस घिनौने खेल को लेकर सियासत शुरू हो गई है। विपक्षी पार्टी जहां सरकार पर आरोप लगाकर सरकार की नाकामी बताने में व्यस्त हैं। वहीं, सरकार विपक्षी दलों के पूर्व में बने सरकारों का पाप बता रही है। हालांकि, इस घिनौनी करतूत से यूपी सरकार की छवि खराब होने लगी है। जांच में न केवल बच्चियों से हैवानियत और भी बड़े खुलासे हो रहे हैं। फिलहाल अब प्रेदश सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है। वहीं, बालिका गृह की संचालिका की बेटियों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। 

Deoria Shelter Home Case Investigations

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  अब तक हुई कार्रवाई

देवरिया स्थित बालिका गृह के काले कारनामों का सच सामने आने के बाद प्रशासन ने संचालिका गिरिजा त्रिपाठी के गोरखपुर स्थित बृद्धाश्रम को भी सील कर दिया है। शर्म की बात तो यह है कि जिन महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाया गया है, वही महिलाएं बेटियों की जिंदगियां बर्बाद कर रही हैं। संचालिका की काली करतूत ने जिस घिनौनी करतूत को अंजाम दिया है, उसके लिए जो भी सजा सुनाई जाए कम ही होगी।  

  सीएम को सौंपेंगे रिपोर्ट

जहां पुलिस आरोपी की दो बेटियों सहित, बालिका गृह की अधीक्षिका कंचनलता, कर्मचारी कनकलता व वृद्धाआश्रम के मर्मचारी अंकित मिश्रा, लालमती, माला श्रीवास्तव को हिरासत में लेकर पूछताछ में जुटी है। वहीं, अफसर अब अपने सही कर्यों का पुलिंदा कागजों में दिखाकर सीएम को रिपोर्ट सौंपने में लग गए हैं। वहीं, यह भी सच सामने आ रहे हैं कि प्रशासनिक जांच में खामिया भी सामने आ रही हैं। 

  20 लड़कियां गायब

मेडिकल जांच रिपोर्ट में शारीरिक शोषण की पुष्टि होने के साथ ही 20 लड़कियों के गायब की खबर भी सामने आ रही है। बता दें कि जिला प्रशासन को यहां से 43 लड़कियाों के होने की जानकारी संचालिका ने दी थी। संचालिका ने बताया था कि 2017 में 43 लड़कियां थीं। लेकिन पुलिस ने जब बालिका गृह में रेड मारा तो 23 लड़कियां ही गायब पाई गईं। ऐसे में जो रिपोर्ट सामने आई उसने सभी के नींद उड़ दिए। आखिर ये 20 लड़कियां कहां गई। ये लड़कियां कहां गई और कौन थी इसकी जानकारी निलंबित डीपीओ तक नहीं दे पा रहे हैं। डीपीओ पर गाज गिरने के बाद पत्रावली खोजने में जुट गए हैं। हैरान करने वाली बात है कि डीपीओ साहब के पास ही लड़कियों की लिस्ट नहीं है। ऐसे में कई सवाल खड़े होने लगे हैं। यदि इन लड़किकयों की जानकारी प्रशासन के पास होता तो शायद 20 लड़कियां कौन थीं, कहां की थीं जैसे कई सवालों का जवाब मिल पाता। 

  आईजी ने लिखा पत्र

मामले को लेकर आईपीएस आईजी नागरिक सुरक्षा कानून अमिताभ ठाकुर ने मामले से जुड़ी अन्य जानकारियों को अवगत कराने के लिए देवरिया एसपी को पत्र लिखा है। खबरों के मुताबिक इस पत्र में सफेदपोशों से जुड़े लोगों की आशंका जाहिर की है। अमिताभ ने एसपी देवरिया रोहन पी कनय को पत्र के हवाले से बताया है कि  बाल संरक्षण मामले में गिरिजा त्रिपाठी उनसे मिलने के लिए कुछ दिनों पहले आई थीं। उन्होंने पत्र में यह भी बताया कि 1998-2000 में वह एसपी देवरिया थे। लेकिन इतने वर्षों बात अचानक उनसे मिलने गिरजा पहुंची। ऐसे में उन्होंने आशंका जताई है कि कार्रवाई के खतरे को भांपकर गिरजा राजधानी पहुंचकर उच्च अधिकारियों से सहयोग लेकर बचने की कोशिश में जुटी होंगी। उन्होंने इस प्रकरण के जांच की मांग भी की है। 

  दीवारों में दफन आवाजें

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप कांड ने पूरे देश को झकझोर कर ​रख दिया था। बिहार में 34 बच्चियों से रेप मामले को लेकर घिनौना खेल खेलने का सच सामने आया था। संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष भी शुरू हुआ। लेकिन अब यूपी के देवरिया स्थित बालिका गृह के काले कारनामों का सच सामने आते ही महिलाओं के अश्रय गृह संदेह और सवाल के घेरे में आ गए हैंं। नाबालिग बेसहारा बच्चियों और महिलाओं की आवाजें दरिंदगों की दरिंदगी से दीवारों में दफन होकर रह जा रही हैं। लेकिन शासन और प्रशासन तभी अपनी कुंभकरणी निद्र से जागती है, जब कोई बड़ा कांड होता है। यदि प्रशासनिक अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त न रहें तो इस तरह की होने वाली शर्मिंदगी भरी घटनाओं से बच्चियों की जिंदगी बर्बाद होने से बच जाए।   

  अब कार्रवाई में जुटे

हैरान करने वाली बात है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा था। लेकिन अधिकारी अपनी कुर्सियों में आराम फरमाने में मस्त रहते हैं। यदि समय समय पर सख्ती से जांच होती रहे तो काले कारनामों में लिप्त पहले ही सलाखों के पीछे पहुुंच जाए। लेकिन प्रशासन को इंतजार रहता है, उस समय का जब कोई बड़ा कांड हो। इन घिनौने खेलों का काला चिठ्ठ सामने आने के बाद सरकार हरकत में आई है। इसके पहले सिर्फ राजनीति और भाषबाजी कर जनता को गुमराह करने में मस्त रही। 

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हैरान करने वाली बात तो यह है कि अपनी नाकामियों को भी सरकार कामयाबी ही दिखाती है। यदि समय-समय पत्र कुर्सी में आराम फरमा रहे सरकार के मंत्री नेता व प्रशासनिक उच्च अधिकारी छोमारी या औचक निरीक्षण करते रहते तो बच्चियों की जिंदगी बर्बाद होने से बचाई जा सकती। लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों की करस्तानी का आलम यह है कि चौखट पर खड़े गरीब पीड़ितों को धक्के मारकर भगा दिया जाता है, तो खुद निरीक्षण करने के लिए भला कैसे निकलें। 

Web Title: Deoria Shelter Home Case Investigations ( Hindi News From Newstimes)


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