क्या यही है आजादी का 71वां साल? 3 शेल्टर होम का घिनौना सच, रूह कंपाने वाली दास्तां...


SHUBHENDU SHUKLA 08/08/2018 14:18:45
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Lucknow. बिहार और यूपी के शेल्टर होमों का काला सच सामने आने के बाद पूरे देश में उबाल देखते बन रहा है। लेकिन सरकारों को बच्चियों की दर्द भरी आवाजें सुनाई नहीं दे रही। कुंभकरणी निंद्रा में सोई सरकारों को भला ये चीत्कार सुनाई भी कैसे देगी। उनके पास तो गरीबों की फरियाद सुनने तक का वक्त नहीं हैं। हां वोटों के लिए हाथ जोड़ने की तो दूर पैरों पर गिड़गिड़ाने का समय जरूर निकल जाता है। आजादी के 71 साल 15 अगस्त 2018 को पूरा होगा। लेकिन इसके बाद भी बेटियों के पैरों में जंजीरें जकड़ दी गई हैं। हैवानियत की भेंट बच्चियां चढ़ रही हैं। 

Incidents of sexual abuse with girls in these Shelter Homes of UP and Bihar
यह काला सच अंग्रेजों के जमाने की ही याद दिलाता है। जब आतताई अंग्रेज मां- बहन और बेटियों के साथ घिनौनी से घिनौनी घटनाओं को अंजाम देते थे और वह गिड़गिड़ाती रहती थीं। उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं था। सिर्फ चंद क्रांतिकारी और देशभक्त ही विरोध के लिए अंग्रेजी हुकूमत का लोहा लेने सामने आते थे। उनको भी कुचल दिया जाता था। अब वह बातें आजादी के वर्षों बाद भी निराश्रित बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकारी शेल्टर होम में रूह कंपाने की घटनाएं याद दिलाती हैं। इन घटनाओं ने पूरे देश को शर्मसार कर के रख दिया है।  

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  कैसे पूरा होगा सपना?

बिहार के मुजफ्फरपुर और यूपी के देवरिया व हरदोई में मासूम बालिकाओं के साथ रोंगटे खड़ी कर देने वाली घटनाएं हो रही हैं। पूरा देश इन दरिंदगी भरी घटनाओं से हिल चुका है। अब सवाल खड़ा होता है कि देश को सोने की चिड़िया दिखाने वाले स्वार्थी नेता क्या भाषणबाजी से लोगों का सपना कर सकते हैं। जबकि कई सफेदपोश ही बेटियों की जिंदगी बर्बाद करने में मस्त हैं। महात्मा गांधी की यह बात तो आज भी लोगों के सामने कौंधती है, कि जब घर की बहू बेटियां, मां और बहनें रात में भी बिना डर के सड़कों पर घूम सकती हों तब समझो कि अपना देश आजाद हो गया है। लेकिन हैरान करने वाली बात है कि सड़कों पर तो दूर बेटियां अपने ही घर में सुरक्षित नहीं रह गई हैं। देश की आजादी को 71 साल होने वाले हैं। इसके बाद भी महिलाओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है। केवल एक ही सवाल लोगों के मन को झकझोर रहा है। क्या ही है आजाद भारत।  

  तीन शेल्टर होम का घिनौना सच

जिन बालिगा गृहों में बच्चियों को सुरक्षित रखने के नाम पर लाखों रुपए सरकार खर्च कर रही है। उन बेटियों के जिस्म को यहां नोचने का खेल खेलकर करोड़ों की धनउगाही का खेल चलता रहा। पहले बिहार के मुजफ्फरपुर इसके बाद यूपी देवरिया और अब हरदोई की बालिका गृहों में बच्चियों के साथ हाने वाली घटनाओं ने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं।  हैरान करने वाली बात है कि जिन नेता और और अधिकारियों के कंधों पर देश को आगे बढ़ाने और चलानेक का भार जनता ने सौंपा है, वह खुद ही इस घिनौने कारनामों में लिप्त हैं। लेकिन इसके बाद भी देश को अंदर से खोखला करने में मस्त सफेदपोश कानून की पकड़ से कोशो दूर ही रह जाते हैं। 

  दीवारों में दर्द की चीत्कारें

शेल्टर होमों में बच्चियों के जिस्म को नोचने औ यातनाओं की आवाजें दीवारों के अंदर ही दफन होकर रह जा रही हैं। शर्मनाक है कि यह आवाजें बाहर निकल भी गई तो राजनीति का अखाड़ा बना जाती हैं। जिन अपराधियों को सजा दिलाने के लिए सभी नेताओं को एकजुट होना चहिए वह एक दूसरे की नाकामियों और बयानबाजी में मस्त हो जाते हैं। आज दीवारों में दब चुकी बच्चियों की दर्द भरी आवाजें न्याय की भीख मांगने के लिए सिर्फ आंशुओं को लिए सरकार की ओर झांक रही है। लेकिन पूरा का पूरा तंत्र सिर्फ बयानबाजी करते टीवी चैनलों और अखबारों में नजर आता है। लेकिन इतना सबकुछ होने के बाद भी ये सरकार देश चलाने का दावा कर जनता को गुमराह ही करने में मस्त रहती हैं। 

  खामोश रहना गुनाह 

आपको शायद दे बात भी मालूम होगा कि जहां अंदर कहीं नाइंसाफी हो रही हो वहां बाहर खामोश रहना गुनाह है। यह बातें गुरू रवीन्द्र नाथ टैगोर ने करीब नब्बे साल पहले ही देश के लिए कह गए थे। लेकिन उन बातों को अनसुना कर यह साबित करने से यह भी सामने आ रहा है कि न केवल हम बहरे हैं, बल्कि अंधे भी हैं। लोगों को सफेदपोशों की हैवानियत भरी हकीकत नजर ही नहीं आती। जिनसे लोग उम्मीद करते हैं, वही बेसहारा लोगों के साथ मुजफ्फरपुर, देवरिया जैसे घिनौने कांड को अंजाम देने में मस्त हैं। अब आप को घटनाओं के सामने आने के बाद यह लगे कि ऐसा सिर्फ इन्हीं तीन जगहों पर हुआ है, तो आप फिर सफेदपोशों की जाल में फंसकर धोखा खा रह हैं। यह घिनौना आतंक दीमक की तरह आपके शहरों और गांवों को भी खोखला कर रहा है। 

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  सरकारों की चुप्पी

इतनी शर्मनाक हरकत के बाद भी यही कहा जा रहा है कि आप सरकार से सवाल मत करो। सिर्फ महाभारत में द्रौपदी के कपड़े उतरते हुए सभा में वीरों की तरह देखते और मूक दर्शक बने रहो। अब सरकार से आप उम्मीद न करें तो ही बेहतर है। वह कुछ भी कर पाने में असमर्थ दिखती नजर आ रही हैं। बिहार और यूपी की सरकार के मुंह से बोल नहीं निकल रहे हैं। बेटियों के साथ हो रही अत्याचार की सीमा पर आपको अब खामोश रहने की जरूरत नहीं है। इसके लिए एकजुट होकर आवाज उठाना होगा। दोषियों को सजा दिलाने के लिए सफेदपोशों के लिए आजादी के पहले की तरह अंग्रेजों जैसा आंदोलन करना होगा। वरना ये घिनौना कांड और जांच की खेल समय समय पर चलती ही रहेगी।  

Incidents of sexual abuse with girls in these Shelter Homes of UP and Bihar

 

 

Web Title: Incidents of sexual abuse with girls in these Shelter Homes of UP and Bihar ( Hindi News From Newstimes)


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