तुलसी जयन्ती प्रतियोगिता पुरस्कार वितरण समारोह


SHUBHENDU SHUKLA 14/08/2018 18:25:51
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Lucknow. उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के तत्वावधान में तुलसी जयन्ती एवं कहानी-कविता प्रतियोगिता पुरस्कार वितरण के अवसर पर समारोह का आयोजन मंगलवार को 14 अगस्त यशपाल सभागार हिन्दी भवन लखनऊ में किया गया। डाॅ. सदानन्दप्रसाद गुप्त कार्यकारी अध्यक्ष उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की अध्यक्षता में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ. जयप्रकाश, चण्डीगढ़ एवं मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ. हरिशंकर मिश्र मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ मां दीप प्रज्वलन, सरस्वती की प्रतिमा एवं तुलसीदास के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

Tulsi Jayanti Competition Award Delivery Festival in UP Hindi Institute

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  संगीत से मोहा मन

कार्यक्रम में वाणी वन्दना एवं तुलसी के पद ‘श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरन-भवभय-दारुनं, अब लौ नसानी अब न नसैहौं एवं कबहुंक हौं यहि रहनि रहौंगो का संगीतमय गायन कर प्रो कमला श्रीवास्तव ने लोगों का मन मोह लिया। मुख्य वक्ता के रूप में व्याख्यान देते हुए डाॅ. हरिशंकर मिश्र ने कहा, तुलसीदास जी भारतीय संस्कृति के उन्नायक थे। वे लोक चित्त के कवि थे। उनके काव्य व साहित्य में पूरा लोक परिलक्षित होता है। उन्होंने रामकथा को जनमानस के लिए लिखा। तुलसीदास जी का गहरा साक्षात्कार गंगा और गौ से हुआ।

  रामगाथा का स्वरूप

उन्होंने पहले लिखी रामकथा को विमत्र कथा के रूप को रामगाथा का स्वरूप प्रदान किया। रामकथा को रघुनाथ गाथा के रूप में रचा जिससे उसके लोक कल्याणकारिणी स्वरूप को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने रामकथा को आदम-सम्मत बनाने का कार्य किया। तुलसी के काव्य में प्रबन्ध कौशल दिखायी पड़ता है। तुलसी प्रत्यक्ष चिन्तन के पक्षधर थे। तुलसीदास जी को समाज के प्रत्येक वर्ग की आकांक्षाओं का ध्यान रहा। तुलसीदास जी ने समाज की परिस्थितियों का गहरायी से अध्ययन किया। समाज में तुलसी के काव्य की उपादेयता को उनके समकालीन कवियों ने काफी सराहा।

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  विभिन्न जातियों का देश

मुख्य अतिथि के रूप में चण्डीगढ़ से पधारे डाॅ. जयप्रकाश ने कहा - हम सौभाग्यशाली है कि हमारा जन्म ऐसे देश में हुआ है। तुलसीदास जी कृतज्ञ हैं कि जिस देश में भगवान राम ने जन्म लिया। भारत विभिन्न जातियों का देश है। तुलसी के समय समाज में आर्थिक विपन्नता थी। रचना का प्रतिपाघ इतिहास और दर्शन से मूल्यांकित होता है। विनय पत्रिका, कवितावली आदि रचनाओं में उस समय के समाज का वर्णन मिलता है। काल की पहचान राजा के शासन काल से होती है। तुलसीदास जी की रचनाओं राजा की शासन व्यवस्था, खेती, किसानों की दशा तथा कर वसूली व्यवस्था का विस्तार से वर्णन मिलता है। 

  काव्यों में पवित्रता

तुलसी समाज के उद्धार के लिए लड़ें। उन्होंने वेदों की सूक्तियों, वाक्यों का प्रयोग समाजोद्धार के लिए किया। उन्होंने अपने काव्यों में पवित्रता की स्थापना का प्रयास किया। उनकी रचनाएं पवित्रता का आधार स्तम्भ हैं। उनकी रचनाएं राम के आदर्शों से परि पूरित हैं। रामचरित मानस समाज का धर्म ग्रंथ है। एक साहित्यिक रचना धर्मग्रंथ बन गयी ऐसा विश्व में कहीं नहीं हुआ है। अध्यक्षीय सम्बोधन में डाॅ. सदानन्दप्रसाद गुप्त, कार्यकारी अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने कहा -तुलसीदास जी विश्व के शीर्षस्थ साहित्यकार है। 

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  आपाधापी का युग

तुलसीदास जी की पंक्तियां व प्रेरणा प्रदान करती है। तुलसीदास ने अपने समय में परम्पराओं का सामना किया। तुलसीदास ने यथार्थ को लेकर आदर्श की स्थापना करना चाहते थे। उनका काव्य विशाल भण्डार है। तुलसीदास ने राजा के शासन व्यवस्था की गंभीरता को उजागर किया। तुलसीदास अपने समय के सबसे बड़े व्यक्ति थे। वे सांस्कृतिक स्वाधीनता के पतझर थे, तुलसी मुगल सत्ता का प्रतीकार करते हैं। राम कथा को प्रतिसत्ता नहीं आदर सत्ता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। 

  दी गई पुरुस्कार राशि

डाॅ सदानन्दप्रसाद गुप्त कार्यकारी अध्यक्ष एवं डाॅ. जयप्रकाश के द्वारा कविता प्रतियोगिता में पवन कुमार यादव, लखनऊ स्थान प्रथम धनराशि रु. 7000, सर्वेश कुमार यादव, रायबरेली स्थान द्वितीय धनराशि रु., पुष्यमित्र उपाध्याय, एटा स्थान प्रथम धनराशि रु. 7000, शेखर अवस्थी, अमेठी स्थान सांत्वना, निशान्त कुमार सक्सेना, शाहजहांपुर स्थान सांत्वना एवं कहानी प्रतियोगिता में रंजना शुक्ला, फतेहपुर स्थान प्रथम धनराशि रु. 7000, खुशनुमा, अलीगढ़ स्थान द्वितीय, अनुराग मिश्र, हरदोई स्थान द्वितीय समान अंक होने के कारण द्वितीय पुरस्कार की धनराशि समान रूप से बांट दी गयी। रु0 2500-2500, अपराजिता सिंह, चन्दौली (स्थान तृतीय), दीपिका सक्सेना, सीतापुर (स्थान तृतीय), यादवेन्द्र सिंह, लखनऊ (तृतीय)समान अंक होने के कारण तृतीय पुरस्कार की धनराशि समान रूप से बांट दी गयी। रु. 1500-1500-1500 रु0 4500, जूही श्रीवास्तव, लखनऊ (सांत्वना) एवं रजनीश कुमार चैरसिया, वाराणसी (सांत्वना) पुरस्कार प्रदान किया गया।

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Web Title: Tulsi Jayanti Competition Award Delivery Festival in UP Hindi Institute ( Hindi News From Newstimes)


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