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भारत में समलैंगिकों को मिली इजाजत, मलेशिया में बरस रहे कोड़े


NAZO ALI SHEIKH 06/09/2018 15:02:37
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Malaysia. मलेशिया एक मुस्लिम बहुल देश है। इस देश में कोई भी गुनाह करने पर कोड़े मारने की सजा का प्रवधान है, चाहें वो पुरुष हो या महिला। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें दो महिलाओं पर शरई कानून के मुताबिक, सिर्फ इसलिए कोड़े बरसाए गए, क्योंकि उन्होंने आपस में समलैंगिक रिलेशनशिप बनाया था। शरिया अदालत के मुताबिक, सार्वजनिक रूप से दी गई सजा पर मानवधिकार संगठनों ने सख्त नाराजगी जताई है। 

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  सबके सामने कोड़े मारने की दी सजा

दोनों लेस्बियन महिलाओं को 03 सितंबर को सौ लोगों के सामने 6-6 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई थी। ये कोड़े उनके शरीर के नाजुक जगह पर मारे गए थे। 

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  सहमति से संबन्ध बनाने पर नहीं  है सजा

बता दें कि त्रिंगानु राज्य की शरिया अदालत के बाहर इस सजा को अंजाम दिया गया था। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे बहुत ही भयावह दिन बताया। इसी समूह की मलेशियाई शोधकर्ता रशेल शोआ-हावर्ड का कहना है कि सहमित से बनाए जाने वाले संबन्ध पर ऐसी भयावह सजा उन पर थोपना मानवाधिकारों को बेहतर बनाने की कोशिशों को बड़ा झटका है। मलेशिया में महिलाओं के समूह 'जस्टिस फॉर सिस्टर्स एंड सिस्टर्स इन इस्लाम' ने कानून की उस आदेश की मांग की है जिसमें महिलाओं को कोड़े से मारने की इजाजत दी गई थी। 

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इस समूह का कहना है कि जो सजा दी गई है वह इंसाफ की मौत है। हाल ही के दिनों में देश के भीतर ऐसी घटनाएं बढ़ गई हैं। अगस्त में एक ट्रांसजेंडर महिला को एक समूह ने पीट-पीटकर मार डाला था। जबकि कुछ दिन पहले ही समलैंगिक कार्यकर्ताओं की तस्वीरों को प्रदर्शनी से हटा दिया गया था। धार्मिक मामलों के मंत्री मुजाहिद युसुफ रवा ने इसे सही करार दिया है। 

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  इस्लामिक कानून में है इस सजा की इजाजत

मलेशिया में न्याय प्रणाली की दोहरी व्यवस्था है। मुसलमानों से जुड़े मामलों की सुनवाई इस्लामिक अदालतों में होती है, जबकि अन्य विवादों को सुलझाने के लिए सिविल अदालतों की व्यवस्था है। महिलाओं को कोड़े मारना सिविल अदालत में प्रतिबंधित है, लेकिन कुछ राज्यों में इस्लामिक कानून में इजाजत मिली है। 

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  भारत में सुप्रीम कोर्ट ने दी परमीशन

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद समलैंगिकता को अवैध बताने वाली IPC की धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को खास फैसला सुनाया और कहा कि समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों के सहमति से बनाए जाने वाले समलैंगिक यौन संबंध को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया।

रोचक जानकारी- 

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को हटाते हुए अपनी मर्जी से समलैंगिक संबन्ध बनाने को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया है। 

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