वाराणसी में बच्चों के बीच ऐसे जन्मदिन मनाएंगे पीएम मोदी, जानिए 1950 से अब तक का सफर 


GAURAV SHUKLA 17/09/2018 09:45 AM
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Lucknow. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार (17 सितम्बर) को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अपना जन्मदिन मनाने के लिए जा रहे हैं। वह वाराणसी में दो दिन रहेंगे जिस दौरान वह बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद भी ले सकते हैं। अपने इस दो दिवसीय प्रवास के दौरान वह ज्यादातर समय बच्चों और युवाओं के साथ ही गुजारेंगे। अपने इस प्रवास कार्यक्रम के पहले दिन पीएम मोदी सोमवार की शाम जिला मुख्यालय से तकरीबन 15 किमी दूर नरउर गांव में सरकारी स्कूल में जाकर बच्चों के बीच अपना जन्मदिन मनाते हुए उनसे संवाद करेंगे। इसी के साथ अगले दिन 18 सितंबर को वह पीएम मोदी के महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की कर्मस्थली काशी हिंदू विश्वविद्यालय जाकर बीएचयू मैदान की सभा से काशी को तकरीबन 557 करोड़ की सौगात देंगे और शिलान्यास करेंगे।  

PM MODI Celebrate His Birthday with childrens in varanashi
गौरतलब है कि भारत के पश्चिमी तट पर स्थित राज्य गुजरात के मेहसाणा जिला के बडनगर में 17 सितम्बर 1950 को हीराबेन मोदी और दामोदर दास मूलचंद मोदी के घर में एक किलकारी गूंजी तो इस मध्यमवर्गीय परिवार में खुशी का माहौल छा गया। इस किलकारी का नाम नरेंद्र दामोदार दास मोदी रखा गया।  
गुजराती परिवार हीराबेन मोदी और दामोदरदास मूलचन्द मोदी की छह संतानों में नरेंद्र दामोदर दास मोदी तीसरे नम्बर के हैं। बचपन से ही नरेंद्र मोदी अपने स्टेशन पर चाय बेचने में अपने पिता की मदद करते थे। नरेंद्र मोदी ने बडनगर में ही प्राथमिक शिक्षा हासिल की है। जब नरेंद्र मोदी आठ साल के हुए तो उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखा में जाना शुरू कर दिया था। इसके बाद जब उनकी स्नातक की पढ़ाई पूरी हो गई तो उन्होंने अपना घर छोड़ दिया था। इसके बाद नरेंद्र मोदी ने लगभग दो साल पूरे देश में धार्मिक स्थानों का भ्रमण किया। भ्रमण से लौटने के बाद पीएम मोदी सीधे अहमदाबाद चले गए। अहमदाबाद में वह आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। बेहद मेहनती प्रवृत्ति के नरेंद्र मोदी की नजर आरएसएस के बड़े प्रचारकों पर पड़ी तो उन्होंने उन्हें आरएसएस के प्रचारक के तौर पर उन्हें जिम्मेदारी सौंप दी गई। इसके बाद उन्होंने बखूबी प्रचारक की भूमिका को निभाया।

Modi Bachpan ki pic
साल 1985 में नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े। भारतीय जनता पार्टी में उन्होंने तमाम जिम्मेदारियां निभाईं। नरेंद्र मोदी को पार्टी ने 2001 में सचिव बना दिया। यही वो साल था जब एक प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस प्राकृतिक आपदा भुज का भूकम्प ने राजनीति को भी प्रभावित किया था। दरअसल, गुजरात में आए भुज के भूकम्प ने राजनीति में भी उथल-पुथल मचा दी थी। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल की नकारात्मक छवि और विरोध के कारण उन्हे इस्तीफा देना पड़ गया। इस्तीफे के बाद से ही भाजपा में नए चेहरे की तलाश शुरू हुई। इस दौरान भाजपा किसी मजबूत और कुशल नेतृत्वकर्ता के हाथ प्रदेश की कमान सौंपना चाहती थी, क्योंकि गुजरात प्राकृतिक और राजनीतिक दोनों आपदाओं से जूझ रहा था। 
अब इसके बाद का हम वो वाक्या सुनाने जा रहे हैं, जो उस समय किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि भाजपा एक ऐसे नेता को सूबे का मुख्यमंत्री बनाएगी जो आगे चलकर देश का प्रधानमंत्री बनेगा। साल 2001 की बात है जब नरेंद्र मोदी एक पत्रकार के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें फोन कर पूछा कि भाई कहां हो तो नरेंद्र मोदी ने जवाब दिया, मैं श्मसान में हूं। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने नरेंद्र मोदी से कहा कि तत्काल दिल्ली आ मैं मिलना चाहता हूं। इसके बाद नरेंद्र मोदी दिल्ली पहुंचे तो अटल जी ने उनसे कहा कि यहां रहते-रहते बहुत मोटे हो गए हो अब तुम्हे गुजरात वापस लौट जाओ। हालांकि नरेंद्र मोदी कुछ देर के लिए वह अवाक जरूर रहे गए, लेकिन वह सब कुछ समझ गए थे। इसके बाद नरेंद्र मोदी दिल्ली गुजरात से पहुंचे और उन्होंने मुख्यमंत्री की शपथ ली। ता दें कि नरेंद्र मोदी जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तब वह आम आदमी थे। आम आदमी इसलिए क्योंकि उन्होंने कोई चुनाव भी नहीं लड़ा था, विधायक भी नहीं चुने गए थे, सीधे मुख्यमंत्री बना दिए गए थे।

PM MODI Celebrate His Birthday with childrens in varanashi

Web Title: PM MODI Celebrate His Birthday with childrens in varanashi ( Hindi News From Newstimes)


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