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आज से नहीं दशकों पुरानी थी सपा-बसपा की दोस्ती, अब साइकिल पर फिर बैठा हाथी


RAGHVENDRA CHAURASIA 09/10/2018 11:40 AM
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Lucknow. बहुजन समाज पार्टी व समाजवादी पार्टी का आज से नहीं बल्कि दशकों पुराना रिश्ता है। बसपा संस्थापक कांशीराम व सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की आपस में गहरी दोस्ती थी। मुलायम सिंह ने काशीराम के शुरुआती सियासी करियर में काफी मदद की थी। सपा संस्थापक ने कांशीराम को अपने गृह जनपद इटावा से चुनाव लड़ाकर पहली बार संसद भेजा था। जिसके बाद काशीराम ने भी उनकी मदद की और इटावा में बसपा का प्रत्याशी मुलायम सिंह के खिलाफ नहीं उतारा। मुलायम सिंह की दोस्ती के कारण ही एक बार फिर यूपी में मायावती व अखिलेश करीब आए हैं। प्रदेश में सपा-बसपा मिलकर चुनाव लड़ जाए तो भाजपा का सूपड़ा साफ होना तय है।

Aaj Se Nahi Dashkon Purani Thi Sapa-bsp Ki Dosti

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  होटल में साथ में रहते थे

मुलायम सिंह व काशीराम अनुपम होटल में एक साथ रहा करते थे। होटल मालिक बलदेव शर्मा ने मीडिया को बताया कि उस समय कांशीराम के लिए बड़ी संख्या में फोन आते थे। इसी वजह से कांशीराम के कमरे में फोन की लाइन डलवा दी थी। मुलायम सिंह यादव का फोन होटल में ज्यादा आया करता था। होटल मालिक से मुलायम कहते थे कि कांशीराम हमारे मेहमान हैं उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इससे आप समझ सकते हैं कि मुलायम का काशीराम के प्रति कितना प्रेम था। 

  काशीराम को पसंद था नीला रंग 

बसपा संस्थापक काशीराम को नीला रंग सबसे ज्यादा पसंद था इसी कारण उन्होंने अपनी कंटेसा गाड़ी को भी नीले रंग में पुतवा दी थी। कांशीराम ने पार्टी का प्रचार करने के लिए इसी गाड़ी से पूरे यूपी का दौरा किया था। कांशीराम पहली बार इटावा से 1991 में सांसद बनकर संसद पहुंचे थे। कांशीराम की मेहनत की बदौलत आज पूरे देश में तीसरे नंबर की पार्टी बसपा है।

 गेस्ट हाउस कांड के बाद से सपा बसपा में खटास

साल 1991 में कांशीराम -मुलायम के गृह जिले इटावा से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से ही कांशीराम का मुलायम के प्रति यह आदर अचानक उभर कर सामने आ गया था। इस जीत के बाद यूपी में मुलायम सिंह यादव व कांशीराम की जुगलबंदी शुरु हुई और इसका फायदा यूपी के चुनाव में देखने को मिला। साल 1995 में मुलायम सिंह यादव की सरकार सत्ता में आई, मगर 2 जून 1995 को गेस्ट हाउस कांड के बाद सपा-बसपा की बीच खाईं पैदा हो गई। दोनों दलों में खटास आने के बाद कई सालों एक दूसरे पर सियासी जहर उगलते रहे। 

Aaj Se Nahi Dashkon Purani Thi Sapa-bsp Ki Dosti

  बुआ और बबुआ आए साथ 

यूपी में सपा-बसपा की दशकों पुरानी कड़वाहट को भुलाकर मायावती व अखिलेश यादव 2019 का लोकसभा चुनाव मोदी के खिलाफ एक साथ लड़ने का मन बनाया है। इससे पहले अखिलेश व मायावती उपचुनाव भी एक साथ लड़ चुके हैं उपचुनाव में भाजपा की सारी सीटें छीन ली। इसी कारण बीजेपी सपा बसपा के गठबंधन से डरी हुई है। मायावती व अखिलेश 2019 में बड़ा चमत्कार कर सकते हैं। 

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