फर्जी मुठभेड़ में पूर्व मेजर जनरल समेत 7 को उम्रकैद


RAJNISH KUMAR 15/10/2018 10:01 AM
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New Delhi. असम में 1994 में फर्जी मुठभेड़ में पांच युवकों की हत्या के मामले में आर्मी कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सात सैन्यकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में एक तत्कालीन मेजर जनरल, दो कर्नल और चार सैनिक शामिल हैं। 

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यह फैसला असम के डिब्रूगढ़ जिले के डिंजन स्थित दो इन्फैंट्री माउंटेन डिविजन में हुए कोर्ट मार्शल में सुनाया गया। हालांकि उच्च स्तर पर (जैसे कोलकाता स्थित ईस्टर्न आर्मी कमांड और नई दिल्ली स्थित आर्मी हेडक्वॉर्टर्स से) इसकी पुष्टि बाकी है। सूत्रों ने बताया कि इसकी आधिकारिक पुष्टि होने में दो से तीन महीने लग सकते हैं। जिन सात लोगों को दोषी ठहराया गया है, उनमें तत्कालीन मेजर जनरल एके लाल, कर्नल थॉमस मैथ्यू, कर्नल आरएस सिबिरेन, जूनियर कमिशंड ऑफिसर्स और नॉनकमिशंड ऑफिसर्स दिलीप सिंह, जगदेव सिंह, अलबिंदर सिंह और शिवेंदर सिंह शामिल हैं। दोषी सैन्यकर्मी इस फैसले के खिलाफ आर्म्ड फोर्सेज ट्राइब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं। 

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दरअसल तलप टी एस्टेट के असम फ्रंटियर टी लिमिटेड के जनरल मैनेजर रामेश्वर सिंह की उल्फा उग्रवादियों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद सेना ने ढोला आर्मी कैंप में नौ लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें 5 लोग 23 फरवरी 1994 को कुख्यात डांगरी फर्जी एनकाउंटर में मार दिए गए। इनमें प्रबीन सोनोवाल, प्रदीप दत्ता, देबाजीत बिस्वास, अखिल सोनोवाल और भाबेन मोरन शामिल थे। ये सभी ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) के कार्यकर्ताओं थे, जिन्हें 14 फरवरी से 19 फरवरी 1994 के बीच तिनसुकिया जिले की अलग-अलग जगहों से उठाया था। 

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