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अयोध्या केस की सुनवाई टलने से मोदी सरकार पर बढ़ेगा मंदिर निर्माण का दबाव


ABHIMANYU VERMA 29/10/2018 13:17:34
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New Delhi. अयोध्या विवाद को लेकर आज से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होनी थी, लेकिन ये सुनवाई अगले साल जनवरी तक टल गयी है। खबर के मुताबिक, जनवरी, 2019 में अयोध्या विवाद की नियमित सुनवाई शुरू होगी, जिसके लिए एक नई बेंच बन सकती है। हालांकि अभी तक सुनवाई की तारीख का ऐलान नहीं किया गया है। वहीं, ऐसा माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने से केंद्र की भाजपा सरकार पर मंदिर निर्माण को लेकर दबाव और भी ज्यादा बढ़ जाएगा।

बता दें कि इस मामले में जस्टिस गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस जोसेफ की नई बेंच करने वाली थी।

ayodhya case ki sunvai 2019 january tak tali

यह भी पढ़ें:-....... अयोध्या जमीन विवाद : जनवरी तक टला मामला, अभी तारीख भी तय नहीं

  राम मंदिर के पक्षकारों को करना पड़ेगा इंतजार

सोमवार को कोर्ट में सुनवाई टलने से मंदिर निर्माण की उम्मीद में बैठे पक्षकारों और संतों को एक बड़ा झटका लगा है। उन्हें उम्मीद थी कि इस मामले में कोर्ट जल्द अपना अंतिम फैसला सुना देगा और कोर्ट का फैसला उनके ही पक्ष में होगा। हालांकि सुनवाई टलने से अब संतों की उम्मीदों पर पानी फिरता दिखाई पड़ रहा है। संत काफी समय से इस मामले के जल्दी निपटारे और मंदिर निर्माण की मांग करते रहे हैं। कई बार संतों की तरफ से सरकार को चेतावनी भी दी गयी कि 2019 से पहले मंदिर का निर्माण किया जाये, नहीं तो वह लोकसभा चुनाव में भाजपा का पुरजोर विरोध करेंगे।  

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   कानून बनाने को लेकर सरकार पर बढ़ेगा दबाव

अयोध्या विवाद में सुनवाई टलने से अब भाजपा सरकार पर दबाव बढ़ जाएगा। इस मामले को लेकर संत और राम जन्मभूमि के पक्षकार लगातार 2019 से पहले मंदिर निर्माण की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यही, नहीं भाजपा के अपने ही लोग मंदिर निर्माण के लिए दबाव डाल रहे हैं। इसी महीने विजय दशमी से एक दिन पहले आरएसएस प्रमुख ने केंद्र सरकार से मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की बात कह चुके हैं। 

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वहीं, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने रविवार को सुनवाई से पहले कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनकर रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट मंदिर के विपरीत फैसला सुनाता है तो वे संसद में कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण करवाएँगे।

शीत कालीन सत्र में विधेयक ला सकती है सरकार?

ऐसे में केंद्र की भाजपा सरकार के पास एक ही रास्ता बचता है कि वह मंदिर निर्माण के लिए सदन के शीत कालीन सत्र में विधेयक लाए, लेकिन इससे सरकार को ही फायदा होगा। ऐसा करके वह राम मंदिर के समर्थकों को मंदिर निर्माण का भरोसा दिलाकर उनका वोट अपना पक्ष में कर सकती है। 

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वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार पर सीधा हमला करने से बचेगा। अगर इस मुद्दे पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस सीधे सरकार पर हमला करती है तो इससे उसे ही नुकसान होने वाला है और उसका सॉफ्ट हिंदुत्व का प्लान फेल हो सकता है। ऐसे में मोदी सरकार के पास शीत कालीन सत्र मुद्दे को भुनाने के लिये आखिरी मौका साबित होने वाला है।

  क्या है अयोध्या विवाद? 

साल 1992, 6 दिसंबर को राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले आंदोलन के दौरान अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरा दी गयी थी। इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा चला। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर, 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था।

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उस समय इलाहाबाद ने अपने फैसले में था कि विवादित भूमि को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए, जिसके बाद रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने असंतुष्टि जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या की विवादित जमीन को लेकर याचिका दायर की। दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी। इसके बाद इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं दायर कर दी, जिसके बाद से ही ये मामले सुप्रीम कोर्ट में है। 

Web Title: ayodhya case ki sunvai 2019 january tak tali ( Hindi News From Newstimes)


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