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शहाबुद्दीन की उम्रकैद की सजा बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने मिनटों में खारिज की अपील


NAZO ALI SHEIKH 30/10/2018 12:14:18
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New Delhi. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीवान के डॉन और सांसद रह चुके शहाबुद्दीन और उसके तीन साथियों को मिली उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए जमकर लताड़ लगाई और पूछा चंदा बाबू के बेटों की हत्या क्यों की। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने चंद मिनटों में ही याचिका को खारिज कर मामले को रफा-दफा कर दिया। वकील ने कुछ पूछना चाहा तो पीठ ने सवाल कर लिया गवाही देने जा रहे राजीव रौशन को क्यों मार डाला ? उसका मर्डर किसने करवाया।  

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shahabuddin ki umrakaid ki saja barkarar

सख्ती से पेश आई पीठ

चीफ जस्टिस गोगोई के साथ जस्टिस एके कौल और केएम जोसेफ की पीठ ने दिल दहला देने वाले हत्याकांड पर सख्ती से पेश आते हुए शहाबुद्दीन की याचिका को खारिज कर दिया। जब शहाबुद्दीन के वकीलों ने उसके बचाव में कुछ कहना चाहा तो बेंच ने कहा इन सभी अपीलों में कुछ भी नहीं है और हम हाईकोर्ट के आदेश के फैसले पर कोई हस्तक्षेप करना नहीं चाहते। कोर्ट ने बिहार के सरकारी वकील केशव मोहन से कोई सवाल नहीं किया और मामले को खत्म खारिज कर दिया। बता दें कि 09 दिसंबर, 2015 को स्पेशल कोर्ट ने शहाबुद्दीन को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। पिछले साल 30 अगस्त को पटना हाई कोर्ट ने भी उस फैसले को बरकरार रखा।

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क्या था मामला

बिहार एसिड अटैक और हत्याकांड इतिहास के एक स्याह पन्ने की तरह है। अगस्त 2004 में शहाबुद्दीन और उसके साथियों ने सीवान के प्रतापुर गांव में चंदा बाबू के दो बेटों सतीश और गिरीश रौशन को जिंदा तेजाब से नहला कर मार डाला था। उन दोनों का गुनाह सिर्फ ये था कि उन्होंने शहाबुद्दीन के गुंडों को रंगदारी देने से इंकार कर दिया था। 

चंदा बाबू ने गंवाई तीन संताने

शहाबुद्दीन की दहशत के आगे चंदा बाबू ने हार नहीं मानी और इंसाफ के लिए लड़ते रहे। चंदा बाबू को इंसाफ पाने की बहुत ही भारी कीमत चुकानी पड़ी, जब उनके तीसरे बेटे राजीव रौशन को 06 जून, 2014 को गवाही देने जाते समय सरे आम गोलियों से छलनी कर मार दिया गया था। शहाबुद्दीन अभी दिल्ली के तिहाड़ जेल में सजा काट रहा है। 

Web Title: shahabuddin ki umrakaid ki saja barkarar ( Hindi News From Newstimes)


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