जानिए क्यों दीपावली पर दी जाती है उल्लुओं की बलि 


ABHIMANYU VERMA 05/11/2018 15:01:56
255 Views

New Delhi. हिन्दू-मान्यताओं के अनुसार दीपावली का त्योहार इसलिए मनाया जाता है क्योंकि भगवान राम चौदाह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे। लेकिन इसे धन की वर्षा करने वाला त्योहार बोला जाये तो कुछ गलत नहीं होगा। इस पर्व पर लोग जितनी ख़रीदारी करते हैं, शायद ही किसी दूसरे त्योहार पर करते हों। यही वजह है कि धन की वर्षा करने वाले इस त्योहार में धन की देवी कही जाने वाली मां लक्ष्मी की पूजा की होती है। साथ ही इस समय एक विचित्र पक्षी की मांग भी बढ़ जाती है। हम बात कर रहे हैं उल्लू की। 

Why is owl sacrificed on Deepawali

  दीपावली पर उल्लुओं के शिकारियों की चांदी

जैसे-जैसे दीपावली का त्योहार नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे उल्लुओं की मांग बढ़ती जा रही है। शिकारी अवैध तरीके से उल्लुओं को मुंह मांगी कीमतों पर बेच रहे हैं। वन अधिनियम, 1972 के तहत उल्लुओं का शिकार करना दंडनीय अपराध है। इसके बाद भी पटना में उल्लुओं की खरीद-फरोख्त जारी है। दीपावली के वक्त 20 गुना बढ़ जाती है। 

अवैध रूप से बेचे जाने वाले उल्लू की कीमत आमतौर पर 300 से 500 रुपए होती है, लेकिन दीपावली के समय इसकी कीमत दो से छह हजार रुपए हो जाती है। यही नहीं, उल्लू के वजन, आकार, रंग, पंख के फैलाव के आधार पर उसका दाम तय किया जाता है। इसमें लाल चोंच और शरीर पर सितारा धब्बे वाले उल्लू का दाम 15 हजार रुपए से अधिक होता है। 

  आखिर क्यों है दीपावली पर उल्लू का महत्त्व

हिंदू-मान्यताओं के अनुसार उल्लू को धन की देवी मां लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस रात यह तंत्र-मंत्र की साधनाओं के लिए फलदायी होता है। तांत्रिक तंत्र-मंत्र को जगाने का काम करते हैं और इसके लिए वह उल्लुओं की बलि देते हैं। कुछ लोग कार्तिक अमावस्या यानी दीपावली पर उल्लू तंत्र के कुछ उपायों को आजमाकर अपने कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करते हैं। धन पाने के लिए दीपावली की कालरात्रि बहुत ही उपयोगी व सिद्धिदायिनी मानी गई है। इस दिन तंत्र साधना से घर की दरिद्रता दूर कर मां लक्ष्मीजी मनोकामना की पूर्ति करती हैं।

  उल्लू के चक्कर में जाना पड़ सकता है जेल

उल्लू एक ऐसा पक्षी जिसको कुछ लोग अशुभ मानते हैं तो कई लोग शुभ। लेकिन उल्लू को खरीदना व बेचना दोनों ही अपराध की श्रेणी में आता है। इनके शिकार या तस्करी करने पर कम से कम 3 वर्ष या उससे अधिक सजा का प्रावधान है। भारतीय वन्य जीव अधिनियम,1972 की अनुसूची-एक के तहत उल्लू संरक्षित पक्षी माना गया है। इसे एक विलुप्त प्राय जीवों की श्रेणी में रखा गया है। 

रॉक आउल, ब्राउन फिश आउल, डस्की आउल, बॉर्न आउल, कोलार्ड स्कॉप्स, मोटल्ड वुड आउल, यूरेशियन आउल, ग्रेट होंड आउल, मोटल्ड आउल विलुप्त प्रजाति के रूप में चिह्नित हैं। इनके पालने और शिकार करने दोनों पर प्रतिबंध है। पूरी दुनिया में उल्लू की लगभग 225 प्रजातियां हैं।

Web Title: Why is owl sacrificed on Deepawali ( Hindi News From Newstimes)


अब पाइए अपने शहर लखनऊ की खबरे (Lucknow News in Hindi) सबसे पहले Newstimes वेबसाइट पर और रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें न्यूजटाइम्स की हिंदी न्यूज़ ऐप एंड्राइड (Hindi News App)

कमेंट करें

अपनी प्रतिक्रिया दें

आपकी प्रतिक्रिया