जानिए, क्यों मनाया जाता है छठ महापर्व


ABHIMANYU VERMA 13/11/2018 11:32:12
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Lucknow. बिहार और पूर्वांचल में छठ त्यौहार का एक विशेष महत्व है। इन क्षेत्रों में इस महापर्व को होली-दीपावली की तरह बड़े ही धूम-धाम तरीके से मनाया जाता है। वहीं, समय के साथ-साथ इस त्यौहार की लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है। अब इस पर्व को देश के अन्य राज्यों में भी लोग मनाने लगे हैं। बिहार-पूर्वांचल के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और नेपाल में भी छठी मइया को पूजा जाता है।

Why Chhath Maha Parve is celebrated

छठ पूजा के दिन घर के बच्चों और बुजुर्गों को छोड़कर लगभग सभी सदस्य व्रत रखते हैं। चार दिनों तक चलने वाला ये व्रत बेहद कठिन है और इसमें साफ-सफाई के साथ अन्य चीजों का भी विशेष ध्यान रखना होता है। साथ ही भोजपुरी के छठ मइया के गीत भी बहुत प्रसिद्ध हैं।  

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   बेहद कठिन है छठ का व्रत 

चार दिनों तक चलने वाला छठ का व्रत जितना फलदायी है, उतना ही कठिन इस व्रत को पूरा करना है। इस व्रत के पहले दिन नहाय-खाए के बाद दूसरे दिन खरना या लोहंडा मनाया जाता है। वहीं, व्रत के तीसरे दिन घाटों पर पूजा होती है और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद अगली सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ छठ पर्व का समापन किया जाएगा। इस व्रत के दौरान व्रतियों को बिना अन्न और जल ग्रहण के रहना पड़ता है। मान्यता है कि छठ का व्रत रखने से संतान की प्राप्ति होती है और बच्चों से जुड़े कष्टों का निवारण होता है। माना जाता है कि छठी मइया का व्रत रखने से सूर्य भगवान की कृपा बरसती है।

Why Chhath Maha Parve is celebrated 

   व्रत के नियम 

दीपावली के छठे दिन यानी कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को छठ पर्व मनाया जाता है। पूजा की शुरुआत चतुर्थी को नहाए-खाय से होती है। इसके अगले दिन खरना या लोहंडा की विधि होती है यानी प्रसाद में गन्ने के रस से बनी खीर दी जाती है। षष्ठी की शाम और सप्तमी की सुबह को सूर्य देव को अर्घ्य देकर छठ पूजा की समाप्ति की जाती है। इस बार छठ पूजा 11 से 14 नवंबर तक है। 

Why Chhath Maha Parve is celebrated

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इस दौरान व्रती को छठ पर्व पर चारों दिन नए और साफ-सुधारे कपड़े पहनने होते हैं। इसमें महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनते हैं। रात्रि के समय छठ पूजा के चारों दिन व्रती जमीन पर सोया जाता है। व्रती और घर के सदस्य भी छठ पूजा के दौरान प्याज, लहसुन और मांस-मछली का सेवन बिलकुल नहीं कर सकते। पूजा के लिए बांस से बने सूप और टोकरी का इस्तेमाल किया जाता है। छठ पूजा में गुड़ और गेहूं के आटे के ठेकुआ, फलों में केला और गन्ना ध्यान से रखें। 

   छठी मइया की कथा 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रियव्रत नाम का एक राजा था। राजा की पत्नी का नाम मालिनी था, लेकिन दोनों की कोई भी संतान नहीं थी। इस बात को लेकर दोनों बहुत दुखी रहते थे। इसके बाद संतान प्राप्ति के लिए राजा प्रियव्रत ने महर्षि कश्यप से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। इस यज्ञ के सफल होने से राजा की पत्नी मालिनी गर्भवती हुई। लेकिन उनके मरा हुआ बेटा पैदा हुआ, जिससे निराश होकर दोनों ने संतान प्राप्ति की उम्मीद बिलकुल छोड़ दी। यहां तक कि राजा ने आत्महत्या का मन बना लिया, जैसे ही उन्होंने खुद को मारने का प्रयास किया तभी छठी मइया प्रकट हुईं।  

Why Chhath Maha Parve is celebrated

 

छठी मइया ने राजा से कहा कि जो भी मानव उनकी सच्चे मन से पूजा करता है और व्रत रखता है उसे संतान की प्राप्ति होती है। इसके बाद राजा प्रियव्रत ने छठ का व्रत किया और उन्हें संतान की प्राप्ति हुई। इसके बाद से ही छठ के पर्व को मनाया जाने लगा। 

Web Title: Why Chhath Maha Parve is celebrated ( Hindi News From Newstimes)


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