#Chhath puja: छठ का त्योहार क्यों मनाया जाता है , जानिए इस व्रत का क्या है महत्व


ANAMIKA PANDEY 13/11/2018 13:41:59
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Why Chhath festival is celebrated know what significance of this fast is

Lucknow. छठ पूजा का त्योहार सूर्य देव की पूजा के लिए मनाया जाता है । यह त्योहर साल में कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष के पष्ठी को मनाया जाता है । चार दिनों तक चलने वाला यह व्रत छठ पूजा, डाला छठ, सूर्य पष्ठी पूजा आदि कई नामों से  जाना या बुलाया जाता है ।

 

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छठ पूजा क्यों होती है

छठ पूजा एवं व्रत सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा हो जाएं तो सेहत अच्छी रहती है, और ऐसा कहा जाता है कि छठ मां की कृपा से संतान की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से संतान सूर्य के समान तेजस्वी और ओजस्वी होती है , एवं मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।  

 

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जानिए चार दिन पूजा का चलन

छठ पूजा चाह दिनों तक चलती है इस साल ये त्योहार 11 नवम्बर से शुरू होगी और 14 नवम्बर तक चलेगी ।

रविवार यानि 11 नवम्बर को नहाय- खाय

सोमवार यानि 12 नवम्बर को खरना

मंगलवार यानि 13 नवम्बर संध्या अर्ध्य

बुधवार यानि 14 नवम्बर सूर्योदय और पारण

 

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छठ का व्रत पहले दिन नहाय- खाय का यह त्योहार कार्तिक माह के शुक्ल पष्ठी को मनाया जाता है, इस दिन प्रात काल स्नान करके नये कपड़े पहनते है, और शाकाहारी भोजन करते हैं।

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दूसरे दिन खरना होता है ये कार्तिक माह के शुक्ल पंचमी को होता है और इसमें पूरे दिन व्रत रख कर शाम को भोजन ग्रहण करते हैं।  इसे खरना कहा जाता है, इस दिन निर्जल उपवास किया जाता है । शाम को गुड़ से बनी चावल की खीर बनाई जाती है, इसमें नमक और चीनी दोनों का प्रयोग वर्जित होता है इस व्रत में । इसी दिन चावल की पिठ्ठा व घी लगी रोटी का भी प्रसाद बनता है ।

 

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तीसरे दिन की छठ पूजा का विशेष महत्व है । जिसमें विशेष प्रसाद बनाया जाता है जिसमें ठोकुआ, एवं चावल का लड्डू भी बनाया जाता है इसके बाद प्रसाद व फल को बांस की टोकरी में सजाया जाता है । इस टोकरी की पूजा कर व्रत करने वाले सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तालाब और नदी के तट पर जाते है, जहां स्नान करके अस्त होते सूर्य की आराधना की जाती है ।

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छठ पूजा के चौथे दिन पारण का होता है सुबह सूर्योदय के समय भी तीसरे दिन जो सूर्य अस्त के समय जो पूजा की जाती है वही चौथे दिन सूर्योदय के समय पूजा की जाती है। इसमें विधिवत पूजा करके प्रसाद बांटा जाता है । इसके बाद मां छठी मईया को प्रणाम करके पारण किया जाता है ।  

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