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26/11 मुंबई हमला: कसाब के एके-47 पर भारी पड़ी तुकाराम की लाठी


ABHIMANYU VERMA 26/11/2018 17:21:13
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New Delhi. 26/11 मुंबई हमले की आज 10वीं बरसी है। 2008 में इसी दिन यानि 26 नवंबर को आतंकियों ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में खूनी खेल खेला था। इस हमले में जहां 150 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी और सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हुए थे। इस आतंकी हमले के दौरान अजमल कसाब इकलौता आतंकी था, जिसे जिंदा पकड़ा जा सका था। शायद वह भी जिंदा पकड़ा न जाता, अगर मुंबई पुलिस के सहायक इंस्‍पेक्‍टर तुकाराम ओंबले ने अपनी जान पर खेलकर उसे पकड़ा न होता।

Story of Tukaram Omble and terrorist Kasab

हालांकि तुकाराम देश के लिए अपना फर्ज निभाते हुए शहीद हो गए। आइए आज हम आपको बताते हैं तुकाराम की बहदुरी की कहानी...

   कसाब के एके-47 पर भारी पड़ी तुकाराम की लाठी

हमले वाली रात करीब 10 बजे मुंबई की डीबी मार्ग पुलिस को सूचना मिली कि खतरनाक हथियारों से लैस दो आतंकी, जिन्होंने सीएसटी में यात्रियों को भून डाला है, चौपाटी की ओर जा रहे हैं। जिस पर 15 पुलिसवालों को डीबी मार्ग से चौपाटी की ओर मरीन ड्राइव पर बैरीकेडिंग करने के लिए भेजा गया। जब गाड़ी में सवार आतंकियों ने पुलिस के बैरीकेडिंग को देखा तो वह 40 से 50 फीट पहले ही रुक गए और यू-टर्न लेकर वापस भागने लगे। 

Story of Tukaram Omble and terrorist Kasab

आतंकियों को पहचानते ही पुलिस ने यह नहीं सोचा कि उन आतंकियों के पास कितने खतरनाक हथियार हैं या वे खुद कितने खतरनाक हैं। बस, धड़ाधड़ गोलियां बरसाते हुए पुलिस ने गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। ड्राइविंग सीट पर बैठा अबू इस्माइल इस एनकाउंटर में ज्यादा समय तक टिक न सका और पुलिस ने उसे वहीं गोलियों से भून डाला और दूसरा आतंकी कसाब मरने का नाटक करने लगा। 

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Story of Tukaram Omble and terrorist Kasab

उस समय तुकाराम ओंबले के पास सिर्फ एक लाठी थी और कसाब के पास एक एके-47 थी। कसाब ने मौका पाकर हमला करने की कोशिश की, लेकिन ओंबले ने कसाब की बंदूक की बैरल पकड़ ली थी। उसी समय कसाब ने ट्रिगर दबा दिया और गोलियां ओंबले के पेट और आंत में लगीं। ओंबले वहीं गिर गए, लेकिन उन्‍होंने अपनी अंतिम सांस तक बैरल को पकड़े रखा था, ताकि कसाब और गोलियां न चला पाए। कसाब ने उन पर पांच गोलियां दागीं थी। ओंबले उसी पल शहीद हो गए। उनकी वजह से ही पुलिस कसाब को जिंदा पकड़ सकी और उस पर केस चलाया जा सका। इसके बाद साल 2012 में कसाब को फांसी दे दी गयी। 

Story of Tukaram Omble and terrorist Kasab

तुकाराम ओंबले की इस बहदुरी के लिए भारत सरकार की ओर से उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्‍मानित किया गया था। कसाब के जिंदा पकड़े जाने की वजह से ही हमले के पीछे लश्‍कर-ए-तैयबा की साजिश सामने आई और पाक को हाफिज सईद जैसे लोगों पर केस चलाना पड़ा।

Web Title: Story of Tukaram Omble and terrorist Kasab ( Hindi News From Newstimes)


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