बीजेपी के बाद क्या कांग्रेस सिंधिया परिवार के सदस्य को मुख्यमंत्री बनाएगी?


RAGHVENDRA CHAURASIA 27/11/2018 19:32:24
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New Delhi. इंतजार खत्म 28 नवंबर दिन बुधवार का काफी लोगों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार था। हम बात कर रहें मध्य प्रदेश चुनाव की। मध्य प्रदेश की जनता अपने नेता को चुनने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पिछले 15 सालों से मध्य प्रदेश में बीजेपी का शासन हैै। क्या 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मध्य प्रदेश में सियासी वनवास खत्म करेगी या नहीं मगर सीएम के चेहरे पर मध्य प्रदेश की जनता की टिकटिकी लगी हुई है। अगर कांग्रेस मध्य प्रदेश में चुनाव जीतती है तो किसका सहरा सजाएगी। 

BJP Ki Tarah Congress Sindhiya Ko Mukhyamantri Banayegi

  सिंधिंया परिवार का अंग्रेजों के जमाने से राजनीति में अच्छा रसूख

देश में सिंधिंया परिवार का रसूख आज से नहीं बल्कि अग्रेंजों के जमाने से रहा है। वर्तमान समय में देश के दो बड़े दलों में सिंधिया परिवार के दो बड़े सदस्य हैं। भाजपा में वसुंधरा राजे​ सिंधिया मुख्यमंत्री हैं तो वहीं  कांग्रेस से ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद हैं। दरअसल 2018 मध्य प्रदेश  चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नजर आ रहे हैं वहीं कांग्रेस के सीनियर नेता कमलनाथ भी सीएम पद की रेस में हैं अब सवाल यह है कि कौन होगा अगला मध्य प्रदेश का राजा।

BJP Ki Tarah Congress Sindhiya Ko Mukhyamantri Banayegi

  ज्योतिरादित्य सिंधिया माधवराव सिंधिया के बेटे हैं

ज्योतिरादित्य सिंधिया माधवराव सिंधिया के बेटे हैं। सिंधिया का जन्म 1 जनवरी 1971को महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में हुआ था। भारत सरकार की पंद्रहवीं लोकसभा के मंत्रिमंडल में वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री है। सिंधिया लोकसभा की मध्य प्रदेश स्थित मध्य प्रदेश के गुना सीट से सांसद हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया राहुल गांधी के करीबी हैं। सिंधिया युवा हैं इसलिए उन पर लोगों की उम्मीदें ज्यादा हैं।

  कमलनाथ मात्र एक बार चुनाव हारे 

कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता कमलनाथ का जन्म कानपुर शहर में 18 नवंबर 1946 को हुआ था। मध्य प्रदेश् की छिदवाड़ा सीट से 1980 में कमलनाथ पहली बार सातवीं ​लोकसभा चुनाव के लिए चुने गए थे। वे 1996 तक लगातार 4 बार चुनाव जीतते आ रहे थे। कांग्रेस ने कमलनाथ को सन 1996 में हवाला कांड में नाम आने के बाद उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतार दिया। कमलनाथ की पत्नी अलकानाथ चुनाव जीत भी गईं। कमलनाथ को दिल्ली में सांसद न रहने के चलते लुटियंस जोन में मिला बड़ा बंगला खाली करने का नोटिस मिल गया। कमलनाथ ने बहुत कोशिश की कि ये बंगला उनकी पत्नी के नाम एलाट हो जाए मगर जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने अपनी पत्नी का इस्तीफा दिलवा दिया। छिदवाड़ा सीट पर 1997 के उपचुनाव में प्रत्याशी बन गए कमलनाथ वहीं बीजेपी ने उनके खिलाफ सुंदरलाल पटवा को मैदान में उतार दिया। पटवा ने ये चुनाव बखूबी लड़ा और कमलनाथ को उन्हीं के गढ़ में मात दे दी। हालांकि अगले साल 1998 में फिर चुनाव हुए और पटवा कमलनाथ से हार गए।

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  कमलनाथ को बिजनेस टायकून भी कहा जाता है

कांग्रेस के कार्यकाल में वे उद्योग मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, वन और पर्यावरण मंत्रालय, सड़क और परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। राजनीति के अलावा कमलनाथ को बिजनेस टायकून भी कहा जाता है, वो 23 कंपनियों के मालिक हैं, जो उनके दोनों बेटे चलाते हैं।

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  संजय गांधी से थी गहरी दोस्ती

कमलनाथ का मध्यप्रदेश से सिर्फ राजनीतिक रिश्ता है। वह रहने वाले पश्चिम बंगाल के हैं। उनकी असली ताकत गांधी परिवार से उनकी पुरानी मित्रता है। संजय गांधी और कमलनाथ की दोस्ती के किस्से आज भी राजनीतिक गलियारों के हॉट टॉपिक्स में से एक हैं। कहा जाता है कि दोनों की मित्रता दून स्कूल से प्रारंभ हुई थी जो कि संजय गांधी के मौत के बाद ही खत्म हुई लेकिन संजय गांधी की दोस्ती ने उन्हें गांधी परिवार के बेहद करीब ला दिया।

  साफ-सुथरे नेता की छवि

कमलनाथ की छवि वैसे तो काफी साफ-सुथरे नेता की है लेकिन हवाला कांड में नाम आने की वजह से उन्हें 1996 में आम चुनाव नहीं लड़ पाए थे, तब पार्टी ने उनकी जगह उनकी पत्नी अलका को टिकट दिया था जो कि भारी मतों से विजयी हुई थीं। लेकिन जब एक साल बाद वो इस कांड में बरी हुए थे तो उनकी पत्नी ने छिंदवाड़ा की सीट से इस्तीफा दे दिया और कमलनाथ ने वापस वहां से चुनाव लड़ा लेकिन वो बीजेपी के सुंदरलाल पटवा से हार गए। हालांकि उनका नाम साल 1984 के पंजाबी दंगों में भी उछला था लेकिन कोई भी अपराध उनका सिद्ध नहीं हो पाया।

 

 

 

 

Web Title: BJP Ki Tarah Congress Sindhiya Ko Mukhyamantri Banayegi ( Hindi News From Newstimes)


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