निर्भया कांड बरसी: बेहद शर्मनाक थी 16 दिसंबर, 2012 की वो काली रात


ABHIMANYU VERMA 16/12/2018 12:02:24
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New Delhi. आज निर्भया कांड के 6 साल पूरे हो रहे हैं। 16 दिसंबर, 2012, दिल्ली में एक दिल दहलाने वाली घटना हुई, जिसने देश को ही नहीं पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। उस काली रात को चलती बस में उस लड़की के साथ इतनी बर्बरता से रेप की घटना को अंजाम दिया, जिसे जानकर हर किसी रूह कांप जाए। इस गैंगरेप की घटना से दुनियाभर में भारत की छवि खराब हुई। वहीं, घटना के बाद पूरे देश में जनाक्रोश देखने को मिला। देश में कहीं शांतिपूर्ण तरीके से कैंडल मार्च निकाले गए, तो कहीं उग्र प्रदर्शन भी हुए थे। दिल्ली में प्रदर्शन के उग्र होने पर मेट्रो सेवा तक बंद करनी पड़ी थी। रायसीना हिल्सरोड पर तो दिल्ली पुलिस ने आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। तो चलिये आज हम आपको निर्भया कांड की बरसी पर बताते हैं कि उस काली रात को आखिर क्या हुआ था.... 

Full Story of the Nirbhaya Kand

16 दिसंबर 2012: निर्भया कांड

छह साल पहले दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। किसी को इस बात का अंदेशा नहीं रहा होगा कि इस दिन दरिंदे एक ऐसी घटना को अंजाम देने वाले हैं, जो देश के इतिहास के लिए एक कलंक बनकर रह जाएगी। उस रात पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया (काल्पनिक नाम) अपने दोस्त के साथ सिलेक्ट सिटी मॉल में सिनेमा देखने के लिए आई थी। उसको इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि उसके लिए ये रात ज़िंदगी की सबसे खौफनाक रात होने वाली है। 

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काफी रात हो चुकी थी, निर्भया और उसका दोस्त मुनिरका के बस स्टॉप पहुंचते हैं, वहां से वो अपने घर द्वारका जाने के लिए ऑटो वालों से मिन्नत करते हैं, लेकिन कोई ऑटो चालक उन्हें ले जाने के लिए तैयार नहीं होता है तो कोई ज्यादा किराये की मांग करते हैं। तभी दूर खड़ी बस में बैठे दरिंदो ने निर्भया को अपना शिकार बनाने की सोच ली थी। उस बस के पायदान पर खड़ा नाबालिग निर्भया को दीदी कहकर पुकारता है और पूछता है कि आपको कहां जाना है। वहीं, साधन न मिलने से परेशान निर्भया उससे कहती है द्वारका जाना है। नाबालिग लड़का कहता है कि आप परेशान क्यों हो रही हैं, उसकी बस द्वारका जा रही है।

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जिसके बाद अनहोनी से अंजान निर्भया और उसका दोस्त बस में इस उम्मीद से बैठ जाते हैं कि वह घर सही सलामत पहुंच जाएंगे। इसके बाद जैसे ही वो मुनिरका बस स्टैंड से बढ़ते हैं। उनके साथ बस में सवार उन दरिंदों के दिमाग में चल रही हवस की तरंगे हिलोरे मारना शुरू कर देती हैं, जिसके बाद निर्भया उन भेड़ियों के बीच घिर जाती है और एक—एक कर वो दरिंदे दुष्कर्म को अंजाम देते हैं, निर्भया अचेत हो जाती है, उसका दोस्त प्रतिवाद करता है। लेकिन 6 लोगों के सामने वो अपने आपको बेबस पाता है। मुनिरका के बस स्टैंड से महिपालपुर के उस रास्ते के बीच वो बस कई चक्कर लगाती है, लेकिन बाहर की दुनिया को भी ये पता नहीं चलता है। दिल्ली की सड़कों पर एक लड़की की अस्मत तार तार की जाती और पुलिस सो रही थी। महिपालपुर में वो दरिंदे निर्भया को सड़क किनारे पटक देते हैं।

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निर्भया का दोस्त पास से गुजर रहे राहगीरों से मदद की गुहार लगाता है, लेकिन लोगों में मर चुकी इंसानियत उसकी मदद करने की गवाही नहीं देती है। कुछ समय के बाद पुलिस की पीसीआर वैन आती है, उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराती है, जहां अब वो मौत से जंग लड़ती है। जब ये घटना पूरे देश के सामने आती है तो शायद दिल्ली को अहसास हो चुका होता है कि वो काली रात या दिन का उजाला उनके लिए भी काला हो सकता है। हजारों की भीड़, जिसका कोई नेता नहीं, तत्कालीन सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरती है। सरकार जागती है वो निर्भया को बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर के एलिजाबेथ अस्पताल भेजती है, लेकिन 13 दिन की जंग के बाद वो मौत के सामने हार जाती है। 

Full Story of the Nirbhaya Kand

Web Title: Full Story of the Nirbhaya Kand ( Hindi News From Newstimes)


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