प्रतिभा का पलायन रोकना 'मन्तव्य' का मन्तव्य: डिप्टी सीएम


RAJNISH KUMAR 28/12/2018 13:45:24
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Lucknow. राजधानी में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के घटक संस्थान आईईटी के माध्यम से वैज्ञानिक, कलात्मक और सांस्कृतिक प्रबुद्ध परिषद 'मन्तव्य' के तत्वावधान में सनातन प्रवाह का आयोजन किया गया। सीतापुर रोड स्थित आईईटी के पं॰ राम प्रसाद बिस्मिल प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा मौजूद रहे।

pratibha ka palayan rokna mantavya
 
कार्यक्रम के दौरान निदेशक एच के पालिवाल ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के 95वीं जन्मदिवस पर विगत तीन दिनों से आयोजित हो रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में ही मन्तव्य का आयोजन किया गया है। यह संस्थान के लिए गर्व की बात है कि हमें उन महानुभावों को सुनने का अवसर मिल रहा है, जिन्होंने अपने जीवन के पल खुद अटल जी के साथ बिताए हैं। इस दौरान अटल जी पर बनी डाक्यूमेंट्री की प्रस्तुति भई की गयी। इसके बाद मन्तव्य के संस्थापक सदस्यों में शामिल अमरेंद्र ने बताया कि किस तरह मूर्ख दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उनके मन में यह विचार आया कि भारत में हो रहे बुद्धिहीन कर्म और कर्महीन बुद्धि को दिशा दिये जाने का जरूरत है।

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बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में मौजूद यूपी के डिप्टी सीएम डा दिनेश शर्मा ने कहा कि मन्तव्य का मन्तव्य है कि प्रतिभा के पलायन को रोका जा सके। अटल जी पर अपना विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिनके करियर का निर्धारण उनके स्वंय के द्वारा न करके संगठन के द्वारा किया जाता है। अटल जी का नाम उनमें ही शामिल है। डिप्टी सीएम ने इस दौरान यह भी बताया कि किस तरह देश सफल नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। 

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मुख्य वक्ता के तौर पर कार्यक्रम में मौजूद स्वांत रंजन ने कहा कि डिप्टी सीएम ने जो मंतव्य बताया है वह इसी तरह के कार्यक्रमों से ही आगे बढेगा। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बताया था कि किस तरह सिर्फ भारत में ही नदियों को मां तुल्य माना जाता है। मुख्य वक्ता ने उदाहरण देते हुए बताया कि विष का पान करने से एक व्यक्ति को नुकसान होता है और शस्त्र के प्रहार से भी सिर्फ एक व्यक्ति को नुकसान होता है लेकिन अगर दूषित विचारों का प्रचार प्रसार हो तो समाज का ही नुकसान होता है। हमारी संस्कृति में मां, बाप, अतिथि सबको देवता तुल्य माना गया है। इसकी विशेषता सभी को साथ लेकर चलने की है। भले ही हमारे वहां भाषाएं अलग अलग हो लेकिन सभी में भारतीय संस्कृति का जिक्र एक सा है। भारतीय संस्कृति सबसे पुरानी परम्पराओं में से है और यह ऐसे ही आगे बढ़ेगी। कार्यक्रम के दौरान डॉ. ज्योति भूषण श्रीवास्तव ने मंच का संचालन किया।

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कार्यक्रम में मुख्य वक्ता अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ स्वान्त रंजन रहे। अधीश जी के नाम पर वस्त्र दान भी किया गया, जिसमें भारी संख्या में जरूरतमंदों को उनकी जरूरत वस्त्र दान में दिया गया। राम राष्ट्र काव्य धारा में दर्शकों को राष्ट्र भक्ति में सरोबार होने का अवसर भी दिया।कार्यक्रम के दौरान सुदर्शन संभाषण व्याख्यान माला आयोजित करने की घोषणा हुई। 

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