मोदी के लिए आसान नहीं होगी 2019 में लोकसभा की डगर


DEEP KRISHAN SHUKLA 02/01/2019 12:36:49
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NEWDELHI. पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में बम्पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा की डगर लोकसभा चुनाव 2019 में उतनी आसान नहीं नजर आ रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जहां उनके लिए बड़े विपक्षी नेता बन कर उभरे है, वहीं विभिन्न राज्यों में भी क्षेत्रीय दल लोक सभा चुनाव की तैयारियां अपने- अपने अंदाज में करने में जुटे है। अगर यह कहा जाए आगामी लोक सभा इलेक्शन भाजपा के लिए चुनौती भरा होगा तो यह कोई अतिशयोक्ति न होगी।

modi ke liye aasan nahi hogi 2109 me lok sabha ki dagar

नया साल को लेकर हर व्यक्ति अपने अपने नजरिए रखता है, किसी के लिए यह उम्मीदे लेकर आता है, तो किसी के लिए चुनौतियां। राजनैतिक दृष्टिकोण से देखे तो इस वर्ष लोकसभा चुनाव भी होने है, ऐसे में इसका महत्व और बढ जाता है। बीता चुनाव तो भाजपा के लिए संजीवनी साबित हुआ ​था। जिसमें अकेले 282 सीटों पर जीत दर्ज कर भाजपा ने अकेले साधारण बहुमत प्राप्त कर सबको चौंका दिया था। लेकिन इस लोकसभा चुनाव में वर्तमान परिदृश्य को देखकर जो कयास लगाए जा रहे है उन पर गौर करते तो यह नया साल भाजपा के खेवनहार नरेन्द्र मोदी के लिए चुनौतियों भरा है। एक ओर जहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उनके लिए बड़े विपक्षी नेता के रूप में खड़े है वहीं दूसरी ओर विभिन्न राज्यों में भी चुनौतियां कम नहीं है। आइए देखते है किस राज्य में क्या स्थितयां है

  यूपी में सपा बसपा का गठबंधन

भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है सर्वाधिक सीटों वाला उत्तर प्रदेश। पिछले लोक सभा में प्रदेश की 80 में से 73 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। लेकिन इस बार सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व बसपा सुप्रीमो मायावती का गठबंधन भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती है। ओबीसी व दलित वोट बैंक वाले इन दोनों बड़े क्षेत्रीय दलो का गठजोड़ के आगे लोक सभा 2014 के आंकड़ों को दोहरा पाना आसाल नही दिख रहा है। भाजपा के सहयोगी दल में आपना दल व सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओम प्रकाश राजभर भी अलग राग अलाप रहे है।

  बिहार में कांग्रेस, आरजेडी व अन्य दलों का महागठबंधन

लोकसभा चुनाव 2019 में आरजेडी, कांग्रेस समेत तमाम छोटे दलों ने महागठबंधन बनाया है। हलांकि यहां भाजपा, जेडीयू व एलजेपी ने भी गठबंधन किया है। बीजेपी पिछले चुनाव में जीती हुई सीटों से कम पर चुनावी मैदान में उतरेगी। बिहार में जिस तरह से आरजेडी का दायरा बढ रहा है वह भाजपा को परेशानी में डालता नजर आ रहा है। स्थितियां यह है कि चुनाव के बाद एलजेपी एनडीए के साथ रहे यह कह पाना भी मुश्किल है।

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  महाराष्ट्र में भाजपा का सहयोगी दल ही अलाप रहा अलग राग

नरेन्द्र मोदी महाराष्ट्र में अजीब पशोपेश में है। कांग्रेस ने जहां एनसीपी के साथ मिल कर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है वहीं शिवसेना राम मंदिर व आर्थिक मुदृों पर भाजपा से असहमति जताते हुए अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रहा है। जिससे स्पष्ट है कि पिछले चुनावी नतीजे दोहरा पाना यहां भाजपा के लिए मुश्किल होगा।

 राजस्थान, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ में भी होगी मुश्किल

राजस्थान, मध्य प्रदेश व राजस्थान में हाल ही के विधान सभा चुनाव के नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि इन राज्यों में मोदी का पहले जैसा जादू इस लोकसभा में नहीं चल पाएगा। बता दे कि पिछले चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। मध्य प्रदेश में 29 में से 27 सीटे भाजपा ने जीती थी। जबकि छत्तीसगढ की 11 में से 10 सीटों पर भाजपा काबिज रही थी। इन सभी राज्यों के नव निर्वाचित मुख्यमंत्रियों ने वोटरों का भरोसा बनाए रखने के लिए अपने चुनावी वादों का अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है।

 अपने गृह प्रांत में भी मोदी के लिए कम नहीं है मुसीबते

प्रधानमंत्री के गृह राज्य में 2014 के लोक सभा चुनाव में भाजपा ने सभी 26 सीटों पर अपनी जीत दर्ज कराई थी। लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव में जिस तरह भाजपा ने अपनी साख बचाई थी उसे देख कर यह कह पाना थोड़ा मुश्किल लग रहा है कि इस लोकसभा चुनाव में पिछला नतीजा भाजपा दोहरा पाएगी। 

  ममता गरज रहीं पश्चिम बंगाल में

पश्चिम बंगाल से बीजेपी के लिए तृण मूल कांग्रेस सबसे बड़ी चुनौती है। यहां कांग्रेस व ममता बनर्जी मिल कर चुनाव में उतरते है तो भाजपा का यहां अच्छा प्रदर्शन कर पाना मुश्किल होगा, क्योंकि यहां विपक्ष को एकजुट करने की मुहिम शुरू हो गयी है। 2014 में यहां भाजपा को दो ही सीटे मिल सकी थी।

  तमिलनाडु में कांग्रेस व डीएमके की जोड़ी

कांग्रेस के साथ डीएमके के गठबंधन ने तमिलनाडु में भी भाजपा को मुश्किल में डाल दिया है। डीएमके इस चुनाव में यहां सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है ऐसे कयास राजनैतिक गलियारों में लगाए जा रहे है। उस पर कांग्रेस का साथ भाजपा के लिए अच्छा नहीं होगा।

  कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस साथ लड़ेगे चुनाव

कर्नाटक में राज्य की जेडीएस पार्टी के साथ कांग्रेस चुनाव मैंदान में उतरेगी यह भाजपा के लिए सबसे बड़ी मुसीबत का सबब बनेगी। 2014 में सभी दलों ने अलग अलग चुनाव लड़ा था। उस समय भी इस राज्य में मोदी का जादू नहीं चल पाया था।

  आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू ने खड़ी की समस्या

टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू जो आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री भी है, उन्होंने इसके बाद कांग्रेस का दामन थाम लिया है। बीते चुनाव में वह भाजपा के साथ थे, लेकिन इस बार उनका साथ न होनो से प्रदेश में भाजपा के लिए मुसीबत का कारण है।

  तेलंगाना में केसीआर

तेलंगाना में हाल ही में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा 5 सीटों से सिमट कर 1 पर पहुंच गयी है। ऐसे में वहां केसीआर पार्टी के. चंद्रशेखर भाजपा के लिए बड़ी चुनौती लोक सभा चुनाव में बन सकते है।

  जे एण्ड के में महबूबा को छोड़ने के बाद पार्टी हो गयी अकेले

घाटी में भाजपा का महबूबा से रिस्ता टूट जाने के कारण पार्टी वहां अकेली पड़ गयी है। वहीं कांग्रेस ने नेशनल कांफ्रेंस के साथ मिल कर चुनाव लड़ने की घोषणा से यहां पार्टी कुछ खास कमाल दिखा पाएगी यह तय कर पाना मुश्किल दिख रहा है।

  आप की दिल्ली में इस नहीं है वैसे हालात

2019 के चुनाव में भाजपा ने राज्य की सभी 7 सीटे जीती थी, लेकिन वहां के बदलते सियासी माहौल में इस बार वह दोहरा पाना थोड़ा मुश्किल जरूर है। क्योंकि आम आदमी पार्टी से दिल्ली के मुख्यमंत्री मोदी के लिए बड़ी चुनौती होगे।

  हरियाणा में खट्टर सरकार की स्थित

हरियाणा में खट्टर सरकार की जो स्थित चल रही है उसे देख कर यह कयास लगाए जा रहे है कि यहां 2019 में भाजपा बीते चुनाव के आंकड़े दोहरा पाएगी यह कह पाना मुश्किल है।

  झारखंड में कांग्रेस झामुमो की जोड़ी

कांग्रेस ने बड़े ही शातिराना अंदाज में झारखंड में भी वहां सबसे मजबूत सियासी दल झामुमो के साथ चुनाव लड़ने का फैसला लेकर यहां भी भाजपा की डगर में रोड़ अटकाने को तैयार है। खास बात तो यह है कि आरजेडी भी इस गठबंधन में शामिल है।

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